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दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को क्यों करना पड़ा महाभियोग का सामना
भ्रष्टाचार स्कैंडल को लेकर दक्षिण कोरियाई संसद ने राष्ट्रपति पार्क गुन-हे के खिलाफ महाभियोग के पक्ष में वोट किया है.
इससे पहले राष्ट्रपति ने कहा था कि वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. इस स्कैंडल के कारण दक्षिण कोरिया में लंबे समय से राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हो रहे था. अब राष्ट्रपति के सारे अधिकार प्रधानमंत्री ह्वांग क्यो-अह के पास चले जाएंगे.
दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने 56 के मुक़ाबले 234 वोटों से महाभियोग पर मुहर लगा दी. इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने भी महाभियोग के पक्ष में मतदान किया.
हाल के हफ्तों में इस राजनीतिक स्कैंडल के कारण हज़ारों कोरियाई नागरिक राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर गए थे. कोरियाई राष्ट्रपति पर अपनी दोस्त को फायदा पहुंचाने का आरोप है.
क्या है स्कैंडल
पार्क और चोई सून-सिल के बीच पुरानी दोस्ती है. 1974 में पार्क गुन हे की मां को उत्तर कोरियाई जासूस ने मार दिया था. इनका इरादा पार्क के पिता की हत्या का था. तब पार्क की उम्र 22 साल हो रही थी. वह यूरोप में पढ़ाई कर रह थीं. 1979 में पार्क के पिता की भी हत्या हो गई थी. पार्क के पिता आर्मी चीफ और राष्ट्रपति रहे थे. पार्क की दोस्ती इसी उठापटक के बीच चोई सून-सिल से हुई थी.
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि पार्क कठपुतली की तरह काम कर रही थीं. हालांकि कई लोगों का कहना है कि ये सनसनीखेज दावे अप्रमाणिक हैं. आधिकारिक जांच में चोई पर सरकार की नीति को प्रभावित करने और गोपनीय सूचनाएं हासिल करने की बात शामिल है. चोई पर यह भी आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति से संबंधों का फायदा उठाकर कंपनियों पर दबाव बनाया और लाखों डॉलर की रकम रिश्वत के रूप में ली. कहा जा रहा है कि इसमें पार्क भी शामिल थीं.
इस स्कैंडल के बाद दक्षिण कोरिया की राजनीति में भूचाल सा आ गया था.
राष्ट्रपति पार्क अपनी करीबी और वफादार चोई सून-सिल से संबंधों के कारण कटघरे में हैं. आरोप है कि राष्ट्रपति से करीबी के कारण चोई ने अवैध तरीके से वित्तीय लाभ हासिल किए. अभियोजकों का कहना है कि पार्क इस मामले में भ्रष्टाचार के दायरे में आ रही हैं. इस मामले में वह पिछले कई हफ्तों से आरोपों को खारिज करती आ रही थीं. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने कई बार माफ़ी भी मांगी थी.
इस वोट का मतलब हुआ कि पार्क को पद छोड़ना होगा. हालांकि इस फ़ैसले को अभी नौ जजों वाले संवैधानिक कोर्ट से मंजूरी लेनी होगी.
इसे होने में अभी 6 महीने का वक्त लगेगा. यदि इस फैसले को मंजूरी मिल जाती है तो पार्क को पद छोड़ना होगा. दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहला वाकया होगा जब किसी राष्ट्रपति को कार्यकाल के बीच से हटाया जाएगा.
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