'ग़नी वही बोले जो भारत सुनना चाहता था'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने कहा है कि अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की ओर से पाकिस्तान के बारे में दिया जाने वाला बयान दुर्भाग्यपूर्ण है.

रविवार को अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए अशरफ़ ग़नी ने पाकिस्तान पर एक बार फिर चरमपंथी संगठनों का समर्थन करने का आरोप लगाया था.

अफ़गान राष्ट्रपति ग़नी ने सम्मेलन में मौजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज़ अज़ीज़ को सीधे संबोधित करते हुए कहा,"हमें सीमा पार आतंकवाद को पहचानने की ज़रूरत है. पाकिस्तान ने 50 करोड़ डॉलर अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए देने का वादा किया है. अज़ीज़ साहब इस रकम को चरमपंथ को नियंत्रित करने के लिए खर्च किया जा सकता है. क्योंकि शांति के बिना किसी भी तरह की आर्थिक सहायता बेकार है."

सम्मेलन में भाग लेने के तुरंत बाद पाकिस्तान पहुंचने पर सरताज अज़ीज़ ने कहा कि भारतीय मीडिया ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क के बारे में बात कर के पाकिस्तान पर दबाव डालने की कोशिश की लेकिन अगर सम्मेलन की घोषणा को देखा जाए तो इसमें पाकिस्तान के लिए ख़तरा बनने वाले दूसरे चरमपंथी संगठनों के बारे में भी बात की गई.

सरताज अज़ीज़ ने कहा कि तनाव के बावजूद भारत जाने के फैसले का उद्देश्य यह था कि अफ़गानिस्तान के साथ संबंध प्रभावित न हों.

उनका कहना था कि 'अफ़गान राष्ट्रपति का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसे समझा भी जा सकता है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा बढ़ी है, हत्याओं में बढ़ोत्तरी हुई है, पाकिस्तान की तुलना धमाकों तादाद बढ़ी है. अफ़गानिस्तान में निराशा की स्थिति है. पिछले वर्षों में इस निराशा की प्रवृत्ति को देखें कि हर हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगता है तो ये समझ आता है कि इस तरह का बयान क्यों आता है.'

एक सवाल के जवाब में सरताज अज़ीज़ ने कहा कि हम समझते हैं कि 'राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी यह बयान एक विरोधी देश की धरती पर दे रहे थे और निश्चित रूप से वह वही कह रहे थे जो वे सुनना चाह रहा था.'

उनका कहना था कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान को अलग करने की भारत की कोशिशें ज्यादा समय तक नहीं चल सकतीं.

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