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छोटी मशीनों के लिए कैमिस्ट्री का नोबल
दुनिया की सबसे छोटी मशीनों के विकास के लिए साल 2016 का कैमिस्ट्री का नोबल पुरस्कार ज़ांग पियरे सोवाश, सर जे फ्रेज़र स्टॉडडार्ट और बेनार्ड फेरिंगा को मिला है.
तीनों वैज्ञानिकों को मॉलिक्यूल यानि आणविक स्तर पर मशीनों को डिज़ाइन करने के लिए कुल 727,000 पाउंड यानी करीब 61.5 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि मिलेगी.
स्वीडन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेस में इनके नामों की घोषणा की गई. पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों ने जो मशीन ईजाद की है वो बाल से भी एक हज़ार गुना पतली है.
इन्हें शरीर के अंदर दवा देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. उदाहरण के लिए कैंसर की कोशिकाओं में इसके ज़रिए दवा डाली जा सकती है.
नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इसके ज़रिए स्मार्ट मशीनों को तैयार किया जा सकता है.
पुरस्कार इस कामयाबी को बयां करता है कि आने वाले वक़्त में मॉलिक्यूल को जोड़कर कार की मोटर से लेकर छोटी मांसपेशियां तक बनाई जा सकती हैं.
नोबल पुरस्कार कमेटी के सदस्य ओलोफ रेमस्ट्रॉम का कहना है कि '' इन वैज्ञानिकों ने मोलीक्यूलर स्केल को नियंत्रित करने में महारत हासिल की है."
जांग पियरे सोवाश 1944 में पेरिस में पैदा हुए हैं. वो स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफसर रहे हैं. सर फ्रेज़र स्टॉर्डडार्ट 1942 में ब्रिटेन के एडिनबर्ग में जन्मे और अमरीका की नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं.
बेर्नाड एल फेरिंगा 1951 में नीदरलैंड में पैदा हुए और नीदरलैंड की ग्रॉनिंगन यूनिवर्सिटी में ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं.
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