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'भारत-पाकिस्तान बातचीत बिना धमकी के होनी चाहिए'
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है.
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया था.
भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर पर 18 सितंबर को हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है.
संयुक्त राष्ट्र में सुषमा-नवाज़ के भाषण और अन्य सवालों पर बीबीसी ने राजनयिक रहे हुसैन हक्क़ानी से बातचीत की है. हुसैन हक्क़ानी की राय, उन्ही के शब्दों में-
"दुनियां में कोई नहीं मानता कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. ये उसी तरह की बात है जैसे पाकिस्तान को छोड़कर कोई और कश्मीर की बात नहीं करता.
नवाज शरीफ़ शायद चाहते थे कि कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण हो जाए. लेकिन नवाज़ और सुषमा दोनों के भाषण से जिस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण हुआ है, वह है आतंकवाद.
आतंकवाद को ख़त्म किए बग़ैर पाकिस्तान को दुनिया में बहुत अधिक समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं है.
सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में बताया कि पाकिस्तान की भूमि से होने वाला चरमपंथ केवल भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए समस्या है.
यह कोई नई बात नहीं है. इससे पहले ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी कहा था कि दुनिया के 70 फ़ीसदी आतंकवाद का कोई न कोई सिरा, कहीं न कहीं पाकिस्तान से ज़रूर जुड़ता है.
एक पाकिस्तानी होने की वजह से मुझे यह चिंता है कि आतंकवाद की वजह से पाकिस्तान का नाम दुनियाभर में बदनाम हो रहा है.
पाकिस्तान के लोगों को यह सोचना चाहिए कि उनके देश का नाम आतंकवाद के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है. इसे ख़त्म किए बग़ैर क्या पाकिस्तान बाकी दुनिया के साथ अच्छे संबंध रख पाएगा या नहीं?
मेरा मानना है कि आतंकवाद के रहते हुए भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य नहीं हो पाएंगे. ये रिश्ते इसी तरह चलते रहेंगे. अगर भारत-पाक बुनियादी समस्या का समाधान करना चाहते हैं तो पड़ोसियों के रूप में एक-दूसरे से बात करनी पड़ेगी.
आतंकवाद की धमकी के साथ बातचीत नहीं हो सकती है.
वहीं भारत में किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि पाकिस्तान टूट जाएगा या हम उसे तोड़ देंगे. इसे पाकिस्तान में धमकी की तरह लिया जाता है.
बातचीत बिना किसी धमकी के होनी चाहिए.
आतंकवाद ख़त्म होना चाहिए. पाकिस्तान को हाफ़िज़ सईद, दाऊद इब्राहिम और मसूद अज़हर जैसे लोगों को बंद करना चाहिए. इस तरह के गुटों को उसे मिटाना होगा.
भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते ऐसे होने चाहिए, जैसा पाकिस्तान के संस्थापक कायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना चाहते थे. वो कहा करते थे कि भारत-पाकिस्तान ऐसे पड़ोसियों की तरह रहें, जैसे कनाडा और अमरीका रहते हैं.
भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की जनता से ग़रीबी, बेरोज़गारी और आतंकवाद जैसी समस्याओं के ख़ात्मे के लिए सरकार से बात करने की अपील की है.
इस तरह की बात पाकिस्तान में शुरू हो गई है. मैं या मेरे जैसे तमाम लोग, जो या तो पाकिस्तान में हैं या पाकिस्तान से बाहर, वो यह सवाल उठा रहे हैं कि पाकिस्तान की असल समस्याएं क्या हैं? और, पाकिस्तान कहां जा रहा है?
पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताक़त वहां कि जनता नहीं सेना है. पाकिस्तान की जनता आवाज़ उठाती रहेगी. अब देखना यह होगा कि उसकी आवाज़ में कब इतनी ताक़त आती है कि पाकिस्तान की सेना अपनी सोच बदल ले. "
(बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत पर आधारित.)