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राजनीति के सवाल और युवाओं की आवाज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी चुनाव एक्सप्रेस जब भारत की पटरियों पर अपने तमाम साथियों के साथ निकली तो साथ में बीबीसी इंडिया एफ़एम के सहयोगी भी इस चुनाव यात्रा के मुसाफ़िर बने. एफ़एम टीम के लोगों का इस यात्रा के दौरान मुख्य फ़ोकस था भारतीय युवा वर्ग पर. टोह ली कि कितना जागरुक है आज का युवा अपने मताधिकार के बारे में, क्या हैं उनके सपने देश के लिए, किस तरह के बदलाव चाहते हैं वो व्यवस्था में... ऐसे कुछ मुद्दों पर एफ़एम संवाददाताओं ने देश के कुछ जाने-माने शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से बात की. पढ़िए, कुछ अंश- भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
क्या बाकी पेशों की तरह राजनीति में भी रिटायरमेंट की उम्र होनी चाहिए, इस सवाल पर आईआईएम के एक्ज़क्यूटिव एमबीए प्रोग्राम के अधिकतर छात्रों का कहना था कि नेताओं को भी एक उम्र के बाद रिटायर होकर अगली पीढ़ी के लिए जगह बनानी चाहिए. साथ ही इन छात्रों का मानना है कि राजनीति में आने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम ज़रुरी होना चाहिए. इस ट्रेनिंग में नेताओं को सिखाया जाए कि औरों के साथ उनका बर्ताव कैसा हो ताकि वो लोकसभा में झगड़ा कम और मिल-जुलकर काम ज़्यादा करें. उनका यह भी कहना था कि वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना सब की ज़िम्मेदारी है और राजनीति में युवा नेताओं की हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए. ये छात्र ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहां एकता हो, गांव-शहर में फ़र्क न हो, जहां महिलाओं की सत्ता औऱ व्यापार जगत में भागीदारी बढ़े, जो हर क्षेत्र में आगे हो और दुनिया का नेतृत्व करें. **********************************
जयहिंद कॉलेज, मुंबई यहां हमने बात की कुछ छात्रों से जो इन चुनावों में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले थे. सभी छात्र इस अधिकार के प्रयोग को लेकर न सिर्फ काफी उत्साहित थे बल्कि जागरुक भी थे. वे अपने वोट के ज़रिए व्यवस्था में हिस्सेदारी औऱ बदलाव लाना चाहते थे. ********************************** उस्मानिया युनिवर्सिटी, हैदराबाद यहाँ के छात्रों से हमने पूछा कि यदि उन्हें मौका मिले देश का प्रधानमंत्री बनने का और उन्हें दी जाए देश बदलने की ताकत तो वे क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे.
इसपर रोचक बदलावों की तस्वीर सुनने को मिली. एक छात्र ने कहा कि वो संसद में ‘राईट टू रिकॉल’ जैसा बिल पास करवाना चाहेंगे जिससे उन सांसद और नेताओं को जनता पद से हटा सके जो अपने वादे पूरे करने में असमर्थ रहे हैं. इसके अलावा ये छात्र भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता जैसी बुराइयों को दूर करना और सभी के लिए शिक्षा अनिवार्य हो, ये चाहते हैं. इनका ये भी कहना है कि महिलाओ के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण हो और आम आदमी सभी नीतियों के केंद्र में हो, ऐसे बदलाव भी लाना चाहते थे. ********************************* कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी, भुवनेश्वर भुवनेश्वर में हमने पूछा कि क्या ऐसा नियम बनाना चाहिए जिससे हर देशवासी के लिए वोट करना अनिवार्य हो?
इस प्रश्न का उत्तर दिया छात्रों ने काफ़ी अलग अलग अंदाज़ में. कुछ का मानना था कि एक प्रजातंत्र का हिस्सा होने के कारण वोट देना सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए. वहीं कुछ का मानना था कि यदि देश और इलेक्शन के बारे में जागरुकता बढ़ाई जाए तो वोट देने वालों की संख्या अपने आप ही बढ़ जाएगी मगर ऐसा कोई नियम नहीं होना चाहिए. एक छात्र ने कहा कि ऐसा कोई नियम बनाने से पहले वोट डालने की पूरी प्रणाली में सुधार होना चाहिए. ********************************** प्रैसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता
कैसा होगा आपके सपनों का भारत, इस प्रश्न के जवाब में एक छात्र का कहना था कि वो शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सुधार चाहती हैं क्योंकि अक्सर छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले जाते हैं. ये छात्र ऐसे नेता चाहते हैं जो चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे करें, जो ज़िम्मेदार हों और जनता के प्रति जवाबदेह हों. जब इनसे पूछा गया कि क्या वो राजनीति में करियर बनाना चाहेंगे तो इस बारे में मिले-जुले जवाब मिले. एक छात्रा का कहना था कि राजनीति में भ्रष्टाचार की वजह से युवा वर्ग इसे करियर के तौर पर नहीं लेना चाहता लेकिन इसमें बदलाव लाने के लिए उन्हें राजनीति में आना चाहिए. |
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