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ब्रितानी स्कूलों में फल-फूल रहे हैं हिंदू विरोधी विचार-रिपोर्ट: प्रेस रिव्यू
ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू परिवारों के बच्चों को कथित रूप से उनके धर्म और जाति की वजह से अपमान का सामना करना पड़ रहा है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, ब्रिटेन की हेनरी जैक्सन सोसाइटी ने 998 हिंदू परिजनों के साथ इंटरव्यू के आधार पर तैयार अपनी रिपोर्ट में पाया है कि हिंदू बच्चों को उनके स्कूलों में भारत में होने वाले घटनाक्रमों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, हिंदू बच्चों का उनके शाकाहारी खानपान और धार्मिक रीति-रिवाज़ों के लिए मज़ाक बनाया जाता है.
इस रिपोर्ट में एक परिजन के हवाले से लिखा गया है कि 'उनके बच्चे को दूसरे बच्चों की ओर से कई मौकों पर परेशान (बुलिंग) किया गया, विशेष रूप से पीएम मोदी के उभार और आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद.'
पिछले साल लेस्टर में हुई हिंसा के बाद ये पहला अध्ययन है जिसमें हिंदू विरोधी नफ़रत के मामलों का अध्ययन किया गया है.
सीबीआई ने ऑक्सफ़ैम के ख़िलाफ़ दर्ज की एफ़आईआर
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने बुधवार को चैरिटी संस्था ऑक्सफ़ैम के ख़िलाफ़ एफ़सीआरए क़ानून का कथित रूप से उल्लंघन करने के मामले में केस दर्ज किया है.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, सीबीआई ने ऑक्सफ़ैम और उसके पदाधिकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के बाद उनके दिल्ली स्थित दफ़्तर पर तलाशी अभियान चलाया है.
इस एफ़आईआर में ऑक्सफ़ैम की ओर से किए गए कथित उल्लंघनों की जानकारी दी गयी है.
एफ़आईआर कहती है कि आयकर विभाग के 'सर्वे' के दौरान मिले 'इमेल कम्युनिकेशन' से पता चला है कि ऑक्सफ़ैम इंडिया "विदेशी सरकारों और संस्थानों के माध्यम से" भारत सरकार पर एफ़सीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए दबाव बनाने की योजना बना रही थी.
एफ़आईआर में लिखा गया है, "ऑक्सफ़ैम के पास उस तरह की पहुंच और प्रभाव है जिसके दम पर वह बहुपक्षीय विदेशी संगठनों से अपनी ओर से भारत सरकार से संपर्क करने को कह सकती है. इसने ऑक्सफ़ैम इंडिया को सालों तक वित्त पोषित करने वाले विदेशी संगठनों/तत्वों की विदेश नीति के उपकरण के रूप में उजागर किया है."
गृह मंत्रालय ने ये भी कहा है कि ऑक्सफ़ैम ने एफ़सीआरए पंजीकरण ख़त्म होने के बाद इससे जुड़े प्रावधानों का हल निकालने के लिए अपने फ़ंड्स को दूसरे तरीकों से मंगाने की योजना बनाई.
गृह मंत्रालय ने कहा है, "सीबीडीटी के आईटी सर्वे के दौरान मिली ईमेल्स में पता चला है कि वह सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च को अपने कर्मचारियों/सहयोगियों के माध्यम से कमीशन के रूप में पैसे दे रही थी."
इस संगठन के टीडीएस डेटा में भी कथित रूप से यही सामने आया था. इस डेटा के मुताबिक़, साल 2019-20 में सीपीआर को 12.71 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऑक्सफ़ैम इंडिया ने सामाजिक कार्यक्रमों को चलाने के लिए एफ़सीआरए लाइसेंस लिया था और सीपीआर को अपने कर्मचारियों और सहयोगियों के माध्यम से पेशेवर एवं तकनीकी सेवाओं के लिए कमीशन दिया जाना इसके उद्देश्यों के अनुरूप नहीं था.
गृह मंत्रालय ने कहा है, "ऑक्सफ़ैम इंडिया साल 2020 में एफ़सीआर संशोधन क़ानून लागू होने के बाद भी अपने कई साझेदारों को आर्थिक मदद देती रही जबकि ये क़ानून इसका उल्लंघन करता है. ये कानून कहता है कि एफ़सीआरए पंजीकृत संस्थान विदेशों से आए पैसे को किसी अन्य संस्थान को नहीं दे सकते, फिर चाहे वह संस्थान एफ़सीआरए के तहत पंजीकृत हो अथवा नहीं."
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केंद्र सरकार ने राज्यों को कोविड वैक्सीन देना बंद किया
केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने से राज्यों को कोविड वैक्सीन देना बंद कर दिया है.
अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने राज्यों को वैक्सीन देना बंद कर दिया है और उनसे कहा गया है कि वे अपने स्तर पर वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से वैक्सीन हासिल करें.
अधिकारियों ने बताया है कि केंद्र सरकार ने ये फ़ैसला वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए किया है. क्योंकि थोक में वैक्सीन ख़रीदने और राज्यों की ओर से नहीं लिए जाने की सूरत में वो ख़राब हो सकती हैं.
बता दें कि ये फ़ैसला एक ऐसे दौर में लिया गया है जब देश भर में कोविड 19 संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ना शुरू हो गए हैं.
हालांकि, केंद्र सरकार के इस फ़ैसले और उसके बाद उपलब्ध कराई गयी जानकारी से ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि वैक्सीन ख़रीदने के लिए अब केंद्र सरकार पैसे ख़र्च करेगी या इसका वहन राज्य सरकारों को अपने बजट से करना होगा.
जामताड़ा से पकड़े गए पांच लोग, कस्टमर केयर रैकेट का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने बीते बुधवार बताया कि उसने झारखंड के जामताड़ा से पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है और एक शख़्स को मुर्शिदाबाद से गिरफ़्तार किया गया है.
ये मामला पैन-इंडिया कस्टमर केयर रैकेट से जुड़ा है जिसने पिछले कुछ समय में ढाई हज़ार लोगों के साथ करोड़ों रुपये का फ़्रॉड किया है.
द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस की सायबर क्राइम यूनिट ने 22 मार्च को दुबई के एक शख़्स के साथ दस लाख रुपये का फ्रॉड होने की शिकायत मिलने के बाद इस मामले की जांच शुरू की थी.
डीसीपी आउटर नॉर्थ ने बताया है कि अभियुक्तों से कई सिम कार्ड और 34 मोबाइल फ़ोन बरामद किए गए हैं. वहीं, मुर्शिदाबाद से पकड़े गए नसीम मल्तिया से 21761 सिम कार्ड और नौ मोबाइल फ़ोन बरामद किए गए हैं.ये भी पढ़ें:-
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