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हेमंत नगराले: मुंबई के नए पुलिस कमिश्नर
सचिन वाझे मामले में मुंबई पुलिस में बुधवार को कई बड़े बदलाव किए गए है.
अब हेमंत नगराले मुंबई के नए पुलिस आयुक्त होंगे. वहीं अब तक यह पद सॅंभाल रहे परमबीर सिंह को होमगार्ड का डीजी बनाया गया है.
रजनीश सेठ को महाराष्ट्र का नया पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी बनाया गया है.
नगराल ने मीडिया से बात करते हुए कहा,"मुंबई पुलिस में अभी कुछ बुरी घटनाओं के कारण अशांति है. जो जांच चल रही है, उस पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा. हम मुंबई पुलिस का गौरव फिर से प्राप्त करेंगे."
"हम कानून के मुताबिक काम करेंगे. मैं सभी ऑफिसर्स को निर्देश दूंगा की कानून के मुताबिक अपनी ड्यूटी करें."
कौन हैं हेमंत नगराले?
हेमंत नगराले महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले के रहने वाले हैं. उनकी प्राथमिक शिक्षा चंद्रपुर के जिला परिषद स्कूल से हुई है. उसके बाद उच्च स्कूली शिक्षा उन्होंने नागपुर से पूरी की.
स्कूल के बाद नगराले ने नागपुर से ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद मुंबई में वित्त प्रबंधन में मास्टर्स डिग्री हासिल की.
1987 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चुने जाने से पहले उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के लिए चुना गया था. प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग चंद्रपुर जिले के राजुरा में बतौर अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) हुई.
इसके बाद 1992 में, उन्हें सोलापुर का पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) बनाया गया था. उस समय बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने के बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा फैली थी. उस हिंसा को काबू करने में नगराले के प्रयास को काफी सराहा गया था.
1994 में वे रत्नागिरि ज़िले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बनाए गए. उस समय एनरॉन- दाभोल पॉवर प्रोजेक्ट का मामला गरमाया हुआ था. दाभोल प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए उन्होंने सख्ती बरती थी, जिसका कि स्थानीय लोगों ने काफी विरोध किया था.
1996-98 में सीआईडी के एसपी रहते हुए उन्होंने एमपीएससी पेपर लीक मामले की जॉंच की थी.
सीबीआई की बड़ी जांच
1998 में हेमंत डेप्यूटेशन पर केंद्रीय जॉंच ब्यूरो (सीबीआई) गए जहॉं कई महत्वपूर्ण मामलों की जॉंच की थी.
इन मामलों में हर्षद मेहता, केतन पारेख और माधवपुरा कोआपरेटिव घोटाले प्रमुख थे. यही नहीं इन्होंने 2003 के अब्दुल करीम तेलगी के नकली स्टाम्प पेपर मामले की जॉंच में भी सहयोग किया था.
2007 में नगराले को पूर्वी क्षेत्र का अपर आयुक्त बनाया गया. इस दौरान इलाके में फैली सांप्रदायिक हिंसा से इनका सामना हुआ था.
2008 में ये महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी यानी एमएसईडीसीएल का स्पेशल आईजी बनाए गए. इस पद पर होते हुए भी इन्होंने उस साल मुंबई में हुए आतंकी हमलों के दौरान अपनी जान जोख़िम में डालकर कई लोगों की जान बचाई थी.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ मिलकर इन्होंने कैंटीन में पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधा दिलाने के लिए भी काफी प्रयास किया. इस प्रयास से राज्य भर में 40 से ज्यादा पुलिस कैंटीन खोले गए.
मुंबई पुलिस के संयुक्त आयुक्त रहते हुए हेमंत नगराले ने पुलिस के लिए साफ़- सुथरी आवास नीति को लागू किया. इसके तहत घर आवंटन में पारदर्शिता को काफी बढ़ावा दिया गया. उनके इस प्रयास को पुलिसकर्मियों के बीच काफी सराहा गया.
2014 में नगराले को थोड़े समय के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर की अतिरिक्त ज़िम्मेदारी सौंपी गई.
2014 से 2016 के बीच ये नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त रहे. मराठा आरक्षण की मॉंग करते हुए पूरे राज्य से मुंबई में रैली के लिए हजारों लोग आए थे. और उस समय इस पूरी मुहिम में सुरक्षा का जिम्मा इन्हीं के कॅंधों पर था. तीन दशक लंबे कॅरियर में नगराले को 2018 में एक मामले में निलंबित भी किया जा चुका है.
अपने कॅरियर में हेमंत नगराले को कई मेडलों और सम्मानों से नवाज़ा गया है. इनमें राष्ट्रपति का पुलिस मेडल, विशेष सेवा मेडल और आंतरिक सुरक्षा मेडल शामिल हैं. गोल्फ़ और टेनिस खेलने में इनकी काफी रुचि है.
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