तेल कीमतों से जूझते भारत की नज़र ईरान और वेनेज़ुएला पर: प्रेस रिव्यू

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर में कहा गया है कि भारत पेट्रोल निर्यातक देशों के समूह ओपेक और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ तेल उपभोक्ता देशों को एकजुट करने के लिए राजनयिक प्रयास कर सकता है, क्योंकि ओपेक देशों ने तेल आपूर्ति सीमित करके कच्चे तेल के दाम बेवजह बढ़ा रखे हैं.

ख़बर में कहा गया है कि कोरोना महामारी की वजह से पटरी से उतरी अर्थव्यवस्थाएं अब तेज़ी से रिकवरी कर रही हैं जहां ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, लेकिन कच्चे तेल की सीमित आपूर्ति की वजह से ईंधन की घरेलू कीमतें आसमान छू रही हैं.

भारत इससे निपटने के लिए ईरान और वेनेज़ुएला जैसे देशों से अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन दोबारा आयात करने की योजनाओं पर काम कर रहा है.

ख़बर में एक आला अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा संकट कृत्रिम है जिसे तेल उत्पादक देशों ने बनाया है, इस संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं.

अमरीका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. बदले समीकरणों में तेल निर्यात की वजह से ईरान को बड़ा फ़ायदा हो सकता है.

सरकारों को गिरा सकता है सोशल मीडियाः राम माधव

बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी ख़बर के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कहा है कि सोशल मीडिया इतना ताकतवर हो गया है कि ये सरकारों को गिरा भी सकता है और इसकी वजह से अराजकता पैदा हो सकती है जिससे लोकतंत्र कमज़ोर पड़ सकता है.

अपनी नई किताब 'बिकॉज़ इंडिया कम्स फर्स्ट' के विमोचन के अवसर पर राम माधव ने कहा कि लोकतंत्र में तनाव पैदा हो गया है और 'अराजनीतिक' एवं 'विदेशी ताक़तों' की वजह से उसे नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

कोलकाता में प्रभा खेतान फाउंडेशन की मेज़बानी में आयोजित कार्यक्रम में राम माधव ने कहा, सोशल मीडिया इतना शक्तिशाली है कि ये सरकारों को गिरा भी सकता है और उसे रेग्यूलेट करना बहुत मुश्किल है क्योंकि ये सीमा-रहित है. ये ताक़तें अराजकता को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे लोकतंत्र कमज़ोर होगा. लेकिन इसका समाधान भी संवैधानिक दायरे में रहकर होना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि मौजूदा क़ानून इससे निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. राम माधव ने कहा, ''हमें नए क़ानूनों और नियमों की ज़रूरत है. सरकार इस दिशा में पहले से ही काम कर रही है.''

राम माधव का ये बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय नियमों का पालन करने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और उनके सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर पर दबाव बनाया गया है.

इसे लेकर काफी विवाद हुआ है और सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार तथा ट्विटर को नोटिस जारी कर चुका है, जिसमें नफ़रत फैलाने वाली सामग्री को नियंत्रित करने और क़ानून बनाकर दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बात कही गई है.

भारत अब मालदीव में करेगा बंदरगाह का विकास

दैनिक जागरण में छपी ख़बर में कहा गया है कि वैश्विक कूटनीति और समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत अब मालदीव में बंदरगाह का विकास करेगा. इसके लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है.

भारतीय विदेशमंत्री एस जयशंकर ने मालदीव जाकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. भारत के लिए मालदीव रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है. दोनों देश समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर कार्य करेंगे. दोनों ही देशों ने हिंद महासागर में स्वतंत्र आवागमन की नीति पर सहमति जताई है.

मालदीव के इस बंदरगाह का नाम सिफावारु बंदरगाह है. ख़बर में कहा गया है कि भारत ने ये समझौता मालदीव के आग्रह पर किया है. इससे मालदीव की सुरक्षा बढ़ेगी जिससे इलाके की सुरक्षा को बल मिलेगा.

मोहन भागवत ने कहा भारत को बौद्धिक क्षत्रिय की ज़रूरत

जनसत्ता में छपी ख़बर के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने सत्य और ज्ञान आधारित विश्व बनाने में भारत के प्रयासों में बौद्धिक गुलामी को बड़ी बाधा बताते हुए कहा है कि भारत को बौद्धिक क्षत्रिय की ज़रूरत है.

मोहन भागवत ने कहा कि ''इसका मतलब संघ के बौद्धिक क्षत्रिय नहीं बल्कि भारत के बौद्धिक क्षत्रिय चाहिए. भारत का पक्ष प्रभावशाली तरीके से लेकर दुनिया में चलने वाले बौद्धिक क्षत्रिय चाहिए.''

सरसंघचालक ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि ''हिंदुत्व सत्य के सतत अनुसंधान का नाम है, ये काम करते-करते आज हिंदू समाज थक गया है, सो गया है, परंतु जब जागेगा, तब पहले से अधिक ऊर्जा लेकर जागेगा और सारी दुनिया को प्रकाशित कर देगा.''

'ऐतिहासिक कालगणना: एक भारतीय विवेचन' पुस्तक का विमोचन करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि ''सम्पूर्ण विश्व पर प्रभुत्व स्थापित करने को इच्छुक शक्तियां कमजोर देशों को अपने तरीके से प्रभावित करना चाहती हैं, कई देशों में लोगों को अपने तरीके से जीने की छूट नहीं है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों को भारत ही एकमात्र ऐसा देश दिखता है, जहां उन्हें आश्वस्ति मिलती है.''

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