रूसी राष्ट्रपति पुतिन तनाव की अटकलों के बीच नए साल में भारत पर बोले

वैश्विक पटल पर आए बदलावों के बीच यह बात काफ़ी ज़ोर-शोर से कही जा रही है कि रूस और भारत के रिश्तों में दूरियाँ आई हैं.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लवरोफ़ ने दिसंबर महीने की शुरुआत में क्वॉड गुट पर सख़्त टिप्पणी करते हुए भारत को चीन के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों की 'लगातार, आक्रामक और छलपूर्ण' नीति में एक मोहरा बताया था.

सर्गेइ लवरोफ़ ने कहा था, "पश्चिम एकध्रुवीय विश्व बहाल करना चाहता है. मगर रूस और चीन से उसका मातहत होने की संभावना कम है. लेकिन, भारत अभी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तथाकथित क्वॉड जैसी पश्चिमी देशों की चीन-विरोधी नीति का एक मोहरा बना हुआ है."

रूसी मंत्री ने ये भी कहा कि पश्चिमी मुल्क भारत के साथ रूस के करीबी संबंध को भी कमज़ोर करना चाहते हैं.

दूसरी तरफ़ दो दशक बाद पहली बार रूस और भारत के बीच होने वाली वार्षिक बैठक को टाल दिया गया. इसे लेकर भी काफ़ी गहमागहमी हुई लेकिन दोनों देशों ने इसकी वजह कोविड 19 महामारी को बताया.

पुतिन मई 2000 में रूस के राष्ट्रपति बने और तब से भारत-रूस के बीच यह वार्षिक बैठक हो रही है. यह पहली बार है जब वार्षिक बैठक को टाला गया है. दूसरी तरफ़ रूस और पाकिस्तान की बढ़ती क़रीबी की भी बात कही जा रही है.

हाल के दिनों में रूस और पाकिस्तान के बीच भी क़रीबी बढ़ी है. इसी साल नवंबर के पहले हफ्ते में रूसी सैनिक के जवान पाकिस्तान में सैन्य अभ्यास के लिए आए थे.

इसके अलावा, पाकिस्तान में रूस एलएनजी पाइपलाइन बना रहा है. पाकिस्तान में सैन्य अभ्यास को लेकर रूस सफ़ाई दे चुका है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रूसी मिशन के उप-प्रमुख रोमान बाबश्किन ने इसी महीने 20 दिसंबर को कहा था कि भारत को रूस और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए.

रोमान ने कहा था, ‘’हम लोगों को लगता है कि भारत को इस मामले में चिंतित नहीं होना चाहिए. रूस संवेदनशील मामलों को लेकर बहुत सतर्क रहता है. लेकिन हम पाकिस्तान के साथ स्वतंत्र रूप से द्विपक्षीय संबंधों के लेकर भी प्रतिबद्ध हैं. पाकिस्तान के साथ भी हमारा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक एजेंडा है. पाकिस्तान एससीओ (संघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन) का सदस्य है. किसी भी देश के साथ द्विपक्षीय रिश्ता किसी देश के ख़िलाफ़ नहीं होता.’’

पुतिन का भारत को संदेश

इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया भर के गिने-चुने राष्ट्र प्रमुखों को बधाई संदेश दिया है और संबंधों की ऐतिहासिकता का हवाला दिया है. पुतिन ने भारत को भी इसमें प्रमुखता से शामिल किया है. इसमें पाकिस्तान का ज़िक्र तक नहीं है.

पुतिन ने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नए साल की बधाई देते हुए कहा कि रूस और भारत के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी हैं, जो इस साल की कठिनाइयों और समस्याओं, ख़ासतौर पर कोरोना महामारी के बावजूद जारी रही.

पुतिन ने ज़ोर देकर कहा कि दोनों देश एक व्यापक राजनीतिक संवाद बनाए रखते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हैं. इसके अलावा एससीओ और ब्रिक्स में सहयोग से भी अच्छे परिणाम मिलते हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल रूस और भारत द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक एजेंडों पर सामयिक मुद्दों को साथ मिलकर हल करने के प्रयास जारी रखेंगे.

चीन को भेजी शुभकामनाएं

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भेजे संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक बातचीत के संबंधों में पिछले साल विस्तार हुआ और सरकारों, सांसदों, मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच लगातार संपर्क बना रहा.

राष्ट्रपति ने रूस और चीन के बीच तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं का उल्लेख किया. इसके अलावा ज़ोर देकर कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण होने वाली कठिनाइयों के बावजूद, दोनों देश व्यापार और आर्थिक संबंधों के उच्च स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहे.

रूस के राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मॉस्को और बीजिंग ने क्षेत्रीय और वैश्विक एजेंडों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम किया और एससीओ और ब्रिक्स में भी साझेदारी बेहतरीन रही.

उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्ष को हमारे संयुक्त कार्य में नई उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा, जो कि पड़ोसी, मित्रता, सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों की पूरी श्रृंखला को बढ़ावा देगा, जिसकी 20 वीं वर्षगांठ हम जल्द ही मनाएंगे"

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