You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बिहार चुनाव: नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल पर क्या हावी है बीजेपी?
- Author, मोहम्मद शाहिद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नीतीश कुमार ने सोमवार को सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. ऐसी चर्चा है कि बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.
नीतीश कुमार की कैबिनेट में कुल 14 मंत्रियों को जगह दी गई है. इनमें बीजेपी से सात, जेडीयू से पांच जबकि वीआईपी और हम से 1-1 व्यक्ति ने मंत्री पद की शपथ ली है.
चुनावी टिकटों से लेकर सरकार बनने तक जाति का गणित हर तरफ़ हावी रहता है.
बिहार सरकार के नए मंत्रिमंडल का क्या जातिगत गणित है? इस सवाल पर राजनीतिक विश्लेषक सुरूर अहमद कहते हैं कि मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही साफ़ हो चुका था कि पिछड़े समुदाय को अधिक जगह दी जाएगी.
उन्होंने कहा, "उप-मुख्यमंत्री बनने वाले तारकिशोर प्रसाद वैश्य समाज से आते हैं और रेणु देवी अत्यंत पिछड़ी जाति से आती हैं. लेकिन यह पूरा का पूरा मंत्रिमंडल बेहद नए लोगों से भरा हुआ है. इसमें मंगल पांडे ही सिर्फ़ पुराना नाम शामिल हैं जबकि विजय कुमार चौधरी पहले स्पीकर रह चुके हैं. नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार जैसे दिग्गज नेताओं का नाम मंत्रिमंडल से ग़ायब है."
"इस मंत्रिमंडल में अधिकतर नए लोगों को शामिल किया गया है और इनमें अधिकतर लोगों ने पहले कोई विभाग नहीं संभाला है."
जीतनराम मांझी के बेटे को भी जगह
बीजेपी दो पिछड़ी जाति से आने वाले नेताओं को उप-मुख्यमंत्री बना सकती है. इसके अलावा दलित समाज से आने वाले डॉक्टर रामप्रीत पासवान को भी कैबिनेट में जगह दी गई है.
दलित नेता और हम पार्टी के प्रमुख जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने भी मंत्री पद की शपथ ली है.
वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि नीतीश कुमार की सरकार का मंत्रिमंडल बेहद संतुलित है.
वो कहते हैं, "बीजेपी पर यह आरोप लगने लगा था कि पिछड़ी जातियों को ही तवज्जो दी जा रही है क्योंकि दोनों उप-मुख्यमंत्री पिछड़ी जातियों से आते हैं. इसको संतुलित किया गया है क्योंकि बीजेपी ने मंगल पांडे और अमरेंद्र प्रताप सिंह को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया है. इसका अर्थ है कि सवर्णों को भी बीजेपी ने तवज्जो दी है."
जेडीयू से पांच विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है जिसमें एक महिला मंत्री को भी शामिल किया गया है.
राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र किशोर कहते हैं कि यह अभी शुरुआती मंत्रिमंडल है और इसमें अभी विस्तार होना है लेकिन देखने में यह लगता है कि इस मंत्रिमंडल में मुख्य सामाजिक समूहों को साथ लेने की पूरी कोशिश की गई है.
वो कहते हैं, "जैसा कि अभी कोई मुस्लिम चेहरा इस मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है. नीतीश कुमार हमेशा अल्पसंख्यक समुदाय को अपने मंत्रिमंडल में जगह देते रहे हैं और ऐसी उम्मीद है कि आगे और भी चेहरे इसमें शामिल होंगे."
असली चुनौती विभागों का बंटवारा?
बिहार में बड़े भाई की भूमिका में रही जेडीयू अब सीटों के मामले में तीसरे पायदान पर है और एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है.
इसका साफ़ असर मंत्रिमंडल पर भी दिख रहा है जहां संभावित दो उप-मुख्यमंत्री और पांच मंत्री बीजेपी से होंगे और ऐसा अनुमान है कि स्पीकर का पद भी बीजेपी के पास ही जाएगा.
अब सवाल विभागों के बंटवारे को लेकर उठता है. क्या इसको लेकर भी बीजेपी-जेडीयू में उठापटक हो सकती है? इस पर मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि बीजेपी नीतीश कुमार पर पूरी तरह हावी हो पाएगी यह कह पाना मुश्किल है लेकिन आज के शपथ ग्रहण से साफ़ दिख गया कि यह पूरा शो बीजेपी का था.
वो कहते हैं, "शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह, जेपी नड्डा और देवेंद्र फडणवीस जैसे वज़नदार नेता थे जिससे दिखता था कि यह जेडीयू की नहीं बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. बीजेपी पक्ष का मनोबल भी बहुत ऊंचा था और इससे संकेत मिल रहा है कि बीजेपी इस बार छोटे भाई की तरह नहीं बल्कि बड़े भाई की तरह सरकार चलाएगी."
नीतीश पर आगे हावी होगी बीजेपी?
वहीं, सुरूर अहमद कहते हैं कि विभागों के बंटवारे पर काफ़ी माथापच्ची होगी क्योंकि यह मंत्रिमंडल नए लोगों का है.
वो कहते हैं, "गृह, वित्त, पथ निर्माण, स्वास्थ्य ऐसे विभाग हैं जो काफ़ी अहम माने जाते हैं और ऐसा अनुमान है कि इस बार भी वित्त और स्वास्थ्य विभाग बीजेपी के पास ही जाए. हालांकि, वित्त जैसा विभाग कौन संभाल पाएगा इसको लेकर भी संशय है. वित्त विभाग अब तक सुशील मोदी संभालते आए थे."
नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में बीजेपी का वर्चस्व साफ़ देखा जा सकता है. इससे यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि आगे भविष्य में बीजेपी नीतीश पर पूरी तरह हावी हो सकती है.
सुरूर अहमद कहते हैं कि नीतीश कुमार पर बीजेपी नहीं बल्कि उसका एक तबक़ा हावी हो रहा है जो सुशील कुमार मोदी को नहीं चाहता था.
वहीं, सुरेंद्र किशोर कहते हैं कि बीजेपी और नीतीश कुमार यह सरकार साथ चलाएंगे क्योंकि दोनों एक-दूसरे को छोड़ नहीं सकते हैं और किसी के साथ जा नहीं सकते हैं, अगर साथ छोड़ेंगे तो सरकार गिर जाएगी.
राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह का विपक्ष ने बहिष्कार किया था. मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि नीतीश कुमार की राह बीजेपी से ज़्यादा विपक्ष के कारण मुश्किल होगी.
वो कहते हैं कि आज के बहिष्कार से साफ़ हो गया है कि कथित चुनावी धांधली के मामले में महागठबंधन नीतीश कुमार सरकार को राहत नहीं देने जा रहा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)