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अफ़ग़ानिस्तान: काबुल यूनिवर्सिटी पर चरमपंथी हमला, 19 लोगों की मौत
अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार काबुल यूनिवर्सिटी पर होने वाले हमले में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई है और 22 घायल हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक़ आर्यान का कहना है कि तीन बंदूक़धारी यूनिवर्सिटी परिसर में दाख़िल हुए जिसके बाद कैम्पस में भगदड़ मच गई और छात्र-छात्रा चारों तरफ़ भागने लगे.
यूनिवर्सिटी परिसर में ईरानी बुक फ़ेयर का उद्घाटन होने वाला था.
सुरक्षाकर्मियों ने कैम्पस को घेर लिया और हमलावरों की फ़ायरिंग का जवाब दिया.
सुरक्षाकर्मियों ने तीनों हमलावर को मार दिया.
तालिबान ने इस हमले में शामिल होने से इनकार किया है और हमले की निंदा की है.
अफ़ग़ानिस्तान में शैक्षणिक संस्थानों को पहले भी निशाना बनाया जाता रहा है.
तालिबान ने हमले से इनकार किया
ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन ने हाल के वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान में शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया है. पिछले महीने काबुल के एक ट्यूशन सेंटर पर हमला किया गया था जिसमें 24 लोग मारे गए थे.
आईएस ने 2018 में काबुल यूनिवर्सिटी पर हुए हमले की भी ज़िम्मेदारी ली थी जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे.
पिछले कुछ महीनों में जब से तालिबान ने सरकार से दोहा में शांति वार्ता शुरू की है, तब से अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी हमलों में इज़ाफ़ा देखा जा रहा है.
यूएन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से पिछले हफ़्ते कहा था कि अभी भी तालिबान के अंदर अल-क़ायदा का एक गुट सक्रिय है, हालांकि तालिबान ने अमरीका को आश्वस्त किया था कि वो अल-क़ायदा से हर तरह के संबंध तोड़ देगा.
सोमवार को हुए हमले के बाद अफ़ग़ानिस्तान के एक पत्रकार ने ट्वीट किया, "अफ़ग़ानिस्तान में रोज़ाना होने वाली हिंसा से कोई भी जगह और कोई भी आदमी सुरक्षित नहीं है. अब किताबें, क़लम और छात्र भी सुरक्षित नहीं हैं."
एक हफ़्ते पहले काबुल के एक शिक्षण संस्थान पर हुए चरमपंथी हमले में कम से कम 40 छात्र मारे गए थे. यह संस्थान शिया बहुल इलाक़े में स्थित था. उस समय इस्लामिक स्टेट ने हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.
सोमवार को काबुल यूनिवर्सिटी पर हुए हमले की निंदा करते हुए तालिबान ने इशारा किया कि 'अफ़ग़ानिस्तान प्रशासन' से जुड़े 'बुरे तत्व' इस हमले के पीछे हो सकते हैं.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान का मानना है कि इस तरह के हमलों के पीछे कुछ ऐसे हथियारबंद गुटों का हाथ हो सकता है जो कि अफ़ग़ानिस्तान में अफ़रा-तफ़री मचाना चाहते हैं और शांति की तमाम उम्मीदों पर पानी फेरना चाहते हैं.
अफ़ग़ानिस्तान इस समय न केवल इस तरह की हिंसा का शिकार है बल्कि देश के कई इलाक़ों में उसके सुरक्षाकर्मियों और तालिबान लड़ाकों के बीच भी हिंसक झड़पें हो रही हैं.
अब सभी लोग यही सोच रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में यह सब कभी ख़त्म भी होगा या नहीं?
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