अनलॉक4: दिल्ली मेट्रो का चलना आख़िर क्यों ज़रूरी है?

दिल्ली मेट्रो

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    • Author, कमलेश
    • पदनाम, बीबीसी संवावदाता

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली मेट्रो को खोले जाने को लेकर केंद्र सरकार से अनुरोध किया है. इसके बाद से ही दिल्ली मेट्रो का संचालन शुरू करने को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है.

अरविंद केजरीवाल ने रविवार को एक वीडियो कांफ्रेंस में कहा कि हमने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि दिल्ली को बाकी राज्यों से थोड़ा अलग समझा जाए. यहां अब कोरोना की स्थिति ठीक हो रही है. दिल्ली में चरणबद्ध तरीके से मेट्रो को चलने की अनुमति दी जाए. चाहे ट्रायल के आधार पर ही अभी अनुमति दी जाए. मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही निर्णय लेगी.

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू के बाद से ही दिल्ली मेट्रो का परिचालन बंद है.

अनलॉक 1 यानी लॉकडाउन के चरणबद्ध तरीके से खुलने के बाद से ही दिल्ली मेट्रो को फिर से शुरू किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. हर बार अनलॉक के नए दिशानिर्देश आने से पहले दिल्ली मेट्रो खुलेगी या नहीं इस पर चर्चा शुरू हो जाती है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री के बाद अब दिल्ली मेट्रो ने भी संचलान की पूरी तैयारी होने की बात कही है.

डीएमआरसी में एग्ज़क्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल का कहना है, "सरकार से आदेश मिलते ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे. मेट्रो में यात्रियों की यात्रा सुरक्षित बनाने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे.''

कुछ दिनों पहले डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगू सिंह ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की परिचालन प्रणाली और रखरखाव का मुआयना किया है.

इस बारे में डीएमआरसी ने एक ट्वीट में बताया था, "डीएमआरसी के प्रमुख मंगू सिंह ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का मुआयना किया. विभिन्न परिचालन प्रणाली और रखरखाव गतिविधियों के प्रभावी कामकाज की जांच करने के लिये यह नियमित निरीक्षण का हिस्सा था."

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मेट्रो पर बढ़ता कर्ज़ का बोझ

क्या कोरोना संक्रमण के दौर में केवल जनता के लिए ही मेट्रो चलाना ज़रूरी है? ऐसा बिल्कुल नहीं हैं. दरअसल मेट्रो का चलना, अब लोगों के लिए कम और मेट्रो के लिए ज़्यादा ज़रूरी है.

पिछले पांच महीनों से दिल्ली मेट्रो बंद होने से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के लिए ऋण का भुगतान करना मुश्किल हो गया है. इस संबंध में केंद्र सरकार से मदद मांगी जा रही है.

डीएमआरसी को दिल्ली मेट्रो के निर्माण के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जिका) ने बेहद कम ब्याज दर पर ऋण दिया गया था. ये ऋण फेज के अनुसार चरणबद्ध तरीके से दिया गया है.

डीएमआरसी हर साल इस ऋण का भुगतान करती है लेकिन पांच महीनों से मेट्रो बंद होने से ऋण भुगतान करना मुश्किल हो गया है.

डीएमआरसी के एक अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में मेट्रो चलाना आम जनता के साथ दिल्ली मेट्रो के लिए भी ज़रूरी हो गया है.

वीडियो कैप्शन, केजरीवाल ने की मेट्रो चलाने की अपील, बताया प्लान

अधिकारी ने कहा, "मेट्रो एक राष्ट्रीय संपत्ति है अगर इसका संचालन नहीं हुआ तो देश के लिए समस्या हो जाएगी. दिल्ली मेट्रो किश्तों में लोन लेती है. एक किश्त का दस साल बाद भुगतान शुरू हो जाता है. पहले हम छह-आठ महीनों में किश्त का पैसा निकाल लेते थे लेकिन अब तो करीब पांच महीनों से मेट्रो ही नहीं चल रही है."

"डीएमआरसी को रोज़ाना लगभग 10 करोड़ रूपये का नुक़सान हो रहा है. दिल्ली मेट्रो पर जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी का लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये का ऋण है."

डीएमआरसी के ऋण की गारंटी सरकार देती है. अगर डीएमआरसी ऋण का भुगतान नहीं कर पाती तो केंद्र सरकार को इसकी भरपाई करनी होती है.

लेकिन, अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने डीएमआरसी से कहा है कि वह विभिन्न परियोजनाओं के लिये जापान इंटरनेशनल कोरपोरेशन एजेंसी से लिये गये कम ब्याज दर वाले कर्ज़ को चुकाने के लिये दिल्ली सरकार से मदद मांगे.

डीएमआरसी से मिली जानकारी के मुताबिक़ केंद्र सरकार से इस ऋण की अदायगी में आने वाली मुश्किल को लेकर बात चल रही है. लेकिन भुगतान कौन करेगा, इस पर कोई निर्णय नहीं मिला है.

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दिल्ली की लाइफलाइन मेट्रो

अगर आम जनता की बात करें तो दिल्ली मेट्रो सिर्फ़ दिल्ली वालों के लिए ही नहीं बल्कि एनसीआर से दिल्ली आने-जाने वालों के लिए भी बेहद अहम हो गई है.

भारत में दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू और लखनऊ जैसे शहरों में भी मेट्रो हैं. लेकिन, सबसे ज़्यादा विस्तार और यात्री परिचालन दिल्ली में होता है. दिल्ली में फिलहाल बसों को सीमित यात्री संख्या के साथ चलाने की इजाजत है. ऐसे में सार्वजनिक परिवहन के ना चलने से सड़कों पर चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ गई है. ऐसे में दिल्ली मेट्रो के बंद रहने से बाजारों और ऑफिस के खुलने के बाद भी लोग कम संख्या में ही पहुँच पा रहे हैं.

डीएमआरसी से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली मेट्रो में रोज़ाना करीब 60 लाख लोग सफर करते हैं. सिर्फ़ दिल्ली ही नहीं बल्कि एनसीआर में भी आवजाही को मेट्रो ने सुविधाजनक बना दिया है.

पहचान ज़ाहिर ना करते हुए डीएमआरसी के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो के ना चलने से लोगों को आने जाने में तो दिक्कतें हो रही है साथ ही पर्यावरण पर भी इसका असर हो रहा है. जो 60 लाख लोग रोज़ मेट्रो से जाते थे वो अब अपनी गाड़ियों से जा रहे हैं. ऐसे में ट्रैफिक और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे है.

लेकिन, डीएमआरीस के बार-बार पूरी तैयारी का दावा करने और दिल्ली सरकार के अनुरोध के बावजूद भी मेट्रो शुरू क्यों नहीं की जा रही है.

इस पर अधिकारी का कहना है कि दिल्ली मेट्रो की तैयारी तो पूरी है लेकिन शायद सरकार में डर है कि मेट्रो चलाने से लोगों की आवाजाही बढ़ जाएगी. हो सकता है कि दफ़्तरों में भी ज़्यादा स्टाफ बुला लिया जाए. लोग वीकेंड या छुट्टी पर ज़्यादा बाहर निकलने लगें. सात ही फिलहाल कोरोना संक्रमण के मामलों में भी कमी आनी शुरू नहीं हुई है. इसलिए मामले और बढ़ जाने का डर हो सकता है.

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मेट्रो का रखरखाव

लंबे समय से मेट्रो ना चलने से डीएमआरसी को उनके रखरखाव के खर्च और तकनीकी समस्याओं से निपटना भी पड़ रहा है.

किसी भी गाड़ी की तरह मेट्रो को भी रखरखाव की ज़रूरत है. ऐसे में दिल्ली मेट्रो इस संबंध में क्या कर रही है.

डीएमआरसी के अधिकारी का कहना है कि ये बात सही है कि मेट्रो का रखरखाव ज़रूरी है. ये बिजली और सिग्नल से चलती है. अगर ये संचालन में नहीं रहती तो इसके सिस्टम में समस्या आ सकती है. इसलिए हर लाइन पर रोज सुबह और शाम दो ट्रेन चलती हैं. मेट्रो के सिस्टम की रोज़ जांच होती है. ऐसा करने से मेट्रो के ट्रैक को मेंटेन करने में सुविधा होती है. इसके साथ ही ओवर-हेड केबल और इक्वीपमेंट को भी चेक किया जा सकता है. मेट्रो चलने से दूसरे तकनीकी फाल्ट का भी पता लगाया जा सकता है.

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डीएमआरसी के मुताबिक़ अगर अनुमति मिल जाए तो दो दिन के अंदर मेट्रो चला सकते हैं.

मेट्रो जब भी चलें लेकिन उसके लिए प्रोटोकॉल तैयार कर लिया गया. दूसरे सार्वजनिक वाहनों की तरह ही मेट्रो में हर यात्री को मास्क पहनना होगा, सैनेटाइजेशन होगा, सोशल डिस्टेंसिंग रखनी पड़ेगी. एक सीट छोड़कर बैठना होगा. हर स्टेशन पर जैसे चार एंट्री एग्जिट हैं तो एक ही खोला जाएगा. हो सकता है पहले दौर में केवल सरकारी कर्मचारियों को जाने की इजाज़त मिले. ये भी संभव है कि सफर के लिए आरोग्य सेतु को अनिवार्य कर दिया जाए.

लेकिन इन सबके लिए केंद्र सरकार की फरमान का इंतजार करना होगा.

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