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शाह फ़ैसल बोले- मेरी राजनीति शुरू होने से पहले ही ख़त्म- प्रेस रिव्यू
ब्यूरोक्रेसी से राजनीति में क़दम रखने वाले शाह फ़ैसल पिछले साल से नज़रबंद हैं. सोमवार को उन्होंने अचानक से जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) प्रमुख के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
उन्होंने इस्तीफ़े के बाद कहा कि उनकी राजनीति शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गई है. फ़ैसल ने द हिन्दू अख़बार से ये भी कहा कि उनकी ब्रैंडिंग जिस तरह से राष्ट्र विरोधी के तौर पर की गई उससे वो बहुत दुखी हैं. 2010 की सिविल सर्विस परीक्षा में शाह फ़ैसल टॉपर थे.
पिछले साल पाँच अगस्त को केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म किया था. उसके बाद 14 अगस्त को शाह फ़ैसल को दिल्ली एयरपोर्ट से पुलिस ने अपने नियंत्रण में ले लिया था और तब से नज़रबंद हैं. जून 2018 से ही जम्मू-कश्मीर पर केंद्र का शासन है. फ़ैसल श्रीनगर में 'हाउस अरेस्ट' हैं.
द हिन्दू को भेजे लिखित बयान में शाह फ़ैसल ने कहा है, ''मैं अपने जीवन में अब आगे बढ़ना चाहता हूं. कुछ रचनात्मक करने का इरादा है. मेरी राजनीति तो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गई. लेकिन मैंने इनसे भी सबक़ लिया है. मेरी ओर से कही गई कुछ बातें समस्या पैदा करने वाली थीं. लेकिन अब नहीं.''
सोशल मीडिया की पोस्ट को डिलीट किया
शाह फ़ैसल ने जेकेपीएम पार्टी से जुड़ी सभी पोस्ट को डिलीट कर दिया है. उन्होंने कहा, ''मैं उन चीज़ों के बारे में बात नहीं करना चाहता. मेरे पास परिवर्तन के लिए कोई शक्ति नहीं है. आईएएस के सदस्य के रूप में मैं इस देश के भविष्य का हिस्सा हूं. मैं इस जुड़ाव को अहम मानता हूं. मेरी ब्रैंडिंग जिस तरह से राष्ट्र विरोधी के तौर पर की गई उसे लेकर बहुत दुखी हूं.''
शाह फ़ैसल ने फ़रवरी 2019 में नई राजनीतिक पार्टी बनाई थी. उन्होंने 2019 में आईएएस से इस्तीफ़ा दे दिया था लेकिन सरकार ने उनके इस्तीफ़े को स्वीकार नहीं किया था. 2018 में उनके कुछ ट्वीट्स को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू हुई थी. शाह फ़ैसल ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि यहां से कहां जाऊंगा. लेकिन मैं इतना जानता हूं कि यहां की शिक्षा के लिए बहुत काम करना है. स्वास्थ्य, ग़रीबी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बहुत काम करना है. मैं अतीत में उलझकर अपनी ज़िंदगी को नहीं गँवाना चाहता. ''
दिल्ली एयरपोर्ट से जब शाह फ़ैसल को सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में लिया था तब उसके एक दिन पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर कहा था कि उनकी पीढ़ी को भी धोखे का स्वाद मिल गया है.
मीडिया ने पहले ही दोषी करार दिया है: रिया चक्रवर्ती
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मीडिया कवरेज़ को लेकर लगातार सवाल उठे हैं. बिहार चुनाव को देखते हुए मीडिया की इस मामले दिलचस्पी और उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती की निजी ज़िंदगी को लेकर जिस तरह की बातें कही जा रही हैं उस पर भी सवाल उठ रहे हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिया चक्रवर्ती ने कहा कि सुशांत की आत्महत्या को मीडिया ने बिहार चुनाव की वजह से इस तरह उछाला है.
रिया चक्रवर्ती ख़ुद सुशांत आत्महत्या मामले में जांच के दायरे में हैं.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में रिया ने कहा, "न्यूज़ चैनल बार-बार इस मामले से जुड़े गवाहों के बयान ले रही है और उनसे पूछताछ कर रही है. याचिकाकर्ता (रिया चक्रवर्ती) को मीडिया ने पहले ही दोषी करार दिया है जबकि सुशांत आत्महत्या मामले में उनकी भूमिका पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ. मामले को इस तरह लगातार सनसनीखेज बनाने और निजता के हनन की वजह से याचिकाकर्ता गंभीर ट्रॉमा में है."
सोमवार को मुंबई में ईडी ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक और पिता इंद्रजीत से करीब 10 घंटों तक पूछताछ की. ईडी सुशांत राजपूत के पिता केके सिंह की ओर से दायर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है. यह एफ़आईआर पटना में दर्ज कराई गई थी.
रफ़ाल विमानों को फिलहाल एलएसी से दूर रखने के निर्देश
फ्रांस से भारत आए रफ़ाल लड़ाकू विमानों ने युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में रफ़ाल विमानों ने रात के वक्त अभ्यास शुरू किया.
जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक, वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ों के बीच कठिन रास्तों में रफ़ाल विमानों का यह अभ्यास पूर्वी लद्दाख में चीन और कश्मीर में पाकिस्तान से लड़ाई की स्थिति में बेहद काम आएगा.
अख़बार लिखता है, अगर सीमा पर ख़ासकर लद्दाख सेक्टर में चीन से लगी सीमा पर हालात बिगड़ते हैं तो रफ़ाल अपनी 'मीटि योर' और स्कैल्प मिसाइलों के साथ हमला करने में सक्षम होंगे.
भारतीय वायुसेना की अंबाला बेस स्थित गोल्डन एरोज़ स्क्वाड्रन को फ्रांस से लाए गए पांच रफ़ाल विमान मिले हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में उड़ान भरते समय रफ़ाल विमानों को फिलहाल वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से दूरी बनाकर चलने को कहा गया है. ऐसा इसलिए ताकि अक्साई चिन में तैनात चीनी सेना के रडार इनके फ्रीक्वेंसी सिग्नेचर्स की पहचान न कर सकें.
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