कोरोना संकट: दिल्ली में संक्रमण रोकने की चुनौती के बीच राजनीति का पेंच

अमित शाह

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    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बिहार में चुनावी बिगुल फूंकने और पश्चिम बंगाल की जनता से नरेंद्र मोदी को मौक़ा देने की अपील के बाद, राष्ट्रीय त्रासदी प्रबंधन ग्रुप के मुखिया और देश के गृह मंत्री अमित शाह का फ़ोकस पिछले दो दिनों से लगातार दिल्ली पर बना हुआ है, जहां सोमवार को उन्होंने राजधानी के मुख्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संकट पर नार्थ ब्लॉक में दोपहर के समय तक़रीबन घंटे भर की बैठक की.

महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद दिल्ली में संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं जिसकी वजह से राष्ट्रीय राजधानी लगातार न सिर्फ़ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुर्ख़ियों में बना हुआ है.

मंगलवार तक दिल्ली में पॉज़िटिव मरीज़ों की कुल तादाद 41 हज़ार से ऊपर जा चुकी थी. अब तक 1327 लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है.

सोमवार को राजधानी में संक्रमण के दो हज़ार से अधिक केस सामने आए थे.

सर्वदलीय बैठक

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दिल्ली-केंद्र की अलग-अलग राय

जहां दिल्ली सरकार कह रही थी कि राजधानी में संक्रमण कम्युनिटी स्प्रेड के स्तर तक पहुंच चुका है तो केंद्र का नज़रिया इससे अलग था. वहीं दिल्ली में सिर्फ़ दिल्ली वालों का इलाज, राजधानी में मौजूद अलग-अलग सरकारी अस्पतालों का अलग-अलग एजेंसियों - केंद्र, राज्य और नगर निगमों के अधीन होना भी एक अजीब सी तस्वीर पेश कर रहे थे.

भारतीय जनता पार्टी के क़ब्ज़े वाले नगर निगम क्षेत्र कह रहे थे कि आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार लोगों से मौतों तक के आंकड़े छिपा रही है जबकि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अस्पताल उन्हें वक़्त से डाटा नहीं मुहैया करवा रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषण कहती हैं, "एक नज़रिया बन रहा था कि देश की राजधानी राजनीति का शिकार हो रही है, दिल्ली की जनता बुरे हाल में है और अमित शाह बिहार में वर्चुअल रैली कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राजनीतिक अखाड़ेबाज़ी में मशगूल हैं."

राधिका रमाशेषण आगे कहती हैं, "सवाल उठ रहे थे कि जब दिल्ली का ये हाल है तो दूसरी जगहों का क्या होगा...और बात ये होने लगी थी कि लॉकडाउन के बाद नरेंद्र मोदी हुकूमत ने राज्यों को उनके हाल पर छोड़ दिया है."

24 मार्च को लॉकडाउन के ऐलान के और चार घंटे की मोहलत के बाद उसको लागू किए जाने के बाद कई हल्क़ों में ये सवाल उठे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में पहले से किसी से सलाह क्यों नहीं ली, और अगर लेते तो जिस तरह का संकट कामगारों और मज़दूरों के साथ पेश आया उससे बचा जा सकता था.

मोदी पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप

अब कई जगहों पर ये कहा जाने लगा है कि मोदी ने लॉकडाउन की घोषणा का राजनीतिक फ़ायदा उठा लिया और आज जबकि कई तरह के संकट जैसे बेरोज़गारी, बीमारी का फैलाव वग़ैरह उस तालाबंदी की वजह से उभर रहे हैं तो राज्य सरकारों के सर इसकी ज़िम्मेदारी ठोक वो अलग हो लिए हैं.

राधिका रामाशेषण कहती हैं कि इस बीच बिहार, बंगाल के अलावा गुजरात में कांग्रेस विधायकों के टूटने, राजस्थान में सरकार गिराने के आरोप लगते रहे, और दिल्ली में हालत के बद-से-बदतर होने की ख़बरें भी सामने आती रहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली के अस्पतालों और कोरोना मरीज़ों की हालत को दयनीय बताया था और एक बार तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी पूछ लिया कि आपने इस मामले में क्या किया?

दिल्ली महिला

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टेस्टिंग पर ज़ो

सोमवार की बैठक में टेस्टिंग की संख्या को 20 जून से प्रतिदिन 18,000 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही एक नई टेस्टिंग किट भी उपलब्ध करवाई जाएगी जिसकी क़ीमत 450 रूपये होगी.

प्रोग्रेसिव मेडिकोज़ एंड साइंटिस्ट फ़ोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्टर हरजीत सिंह भाटी का कहना है कि अधिक से अधिक टेस्टिंग ही संक्रमण के फैलाव को रोकने में मददगार साबित हो सकती है, और हुकूमतों को समझना होगा कि 'प्राइमरी प्रिवेंशन, अर्ली डिटेक्शन,' यानी पहले ही बीमारी को पहचान कर उसकी रोकथाम ही फ़िलहाल इससे निपटने का एक उपाय है.

अमित शाह के साथ बैठक में शामिल हुए आप सांसद संजय सिंह ने ये भी कहा कि संक्रमण के फैलाव को समझने के लिए घर-घर जाकर स्वास्थ्यकर्मियों की टीम सर्वे करेगी.

रविवार को दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली नगर निगमों से हुई बैठक के बाद अमित शाह ने कहा था कि दो दिनों के भीतर कोविड टेस्टिंग की संख्या दोगुनी कर दी जाएगी और छह दिनों में उसे तिगुना तक ले जाने का इरादा है.

वीडियो कैप्शन, दिल्ली में कोरोना वायरस से हालात बिगड़े, स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल?

गृह मंत्री का ये भी कहना था कि चिह्नित क्षेत्रों (कंटेनमेंट ज़ोन्स) में सर्वे किया जाएगा, साथ ही साथ आइसोलेशन सेंटर्स में तबदील किए गए 500 रेल डिब्बों को दिल्ली को देने और प्राइवेट अस्पतालों के 60 फ़ीसद बेड्स को सस्ते दामों पर मरीज़ों को दिए जाने के फ़ैसले की बात भी उन्होंने कही थी.

रेलवे आइसोलेशन सेंट्रस के आने के बाद दिल्ली में कुल बेड्स की तादाद 9,800 से बढ़कर 17,800 हो जाएगी.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि रेल कोच आइसोलेशन सेंटर्स का इस्तेमाल कम गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों के लिए किया जाएगा.

प्राइवेट अस्पतालों में सस्ते बेड्स को लेकर नीति आयोग की टीम को एक रिपोर्ट दो दिनों में तैयार करने को कहा गया है.

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्त और कांग्रेस की दिल्ली ईकाई के प्रमुख अनिल चौधरी दोनों का कहना था कि बैठक में फिर से लॉकडाउन लागू किए जाने को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं हुई.

अरविंद केजरीवाल ने बाद में ट्वीट के माध्यम से कहा कि दिल्ली में लॉकडाउन को लेकर कई तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं लेकिन इस तरह का कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.

आदेश कुमार गुप्त ने मीडिया से कहा कि उन्होंने प्रस्ताव रखा है कि कोरोना वॉलंटियर के तौर पर एनसीसी, स्काउट गाइड्स के अलावा सेवा भारती, आर्य समाज और गुरुद्वारा प्रबंधक जैसी संस्थाओं की मदद भी ली जानी चाहिए.

दिल्ली

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एनसीसी, स्काउट्स से मदद लेने की बात अमित शाह ने रविवार की बैठक के बाद कही थी.

सेवा भारती बीजेपी की पैतृक संस्था आरएसएस से जुड़ी है.

इस तरह के काम में किसी विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं को शामिल किए जाने से नया विवाद जन्म ले सकता है.

कांग्रेस दिल्ली अध्यक्ष अनिल चौधरी ने जिन कोरोना फ्रंट वॉरियर्स की काम के दौरान मौत हो गई है उन्हें मुआवज़ा देने की माँग को दोहराया और कहा कि केजरीवाल सरकार इसे पूरा नहीं कर रही है.

उन्होंने इस मामले में सरकार पर जवाबदेही तय करने की बात भी की.

केजरीवाल अब सबके साथ मिलकर इस समस्या से निपटने की बात कह रहे हैं. उस पर पूछा जा रहा है कि यही बात केजरीवाल पहले भी तो कह सकते थे. ऐसे फ़िकरे अमित शाह पर भी उछाले जा रहे अस्सी दिनों बाद जो करने की बात कह रहे वो पहले भी तो कर सकते थे.

डॉक्टर भट्टी कहते हैं कि महामारी के इस दौर में सभी राजनीतिक दल मिलकर भारत की जर्जर स्वास्थ्य क्षेत्र की व्यवस्था को बेहतर करने के काम में लगा सकते थे लेकिन फ़िलहाल सभी एक बलि का बकरा ढूंढ़ने की फ़िराक़ में लगे दिख रहे हैं.

इधर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की एक ट्वीट के मुताबिक़ वो महामारी के हालात को लेकर मंगलवार को अपनी-अपनी दहलीज़ पर धरना देंगें.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
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