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एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के पूर्व निदेशक आकार पटेल के ख़िलाफ़ एक ट्विटर पोस्ट को लेकर FIR दर्ज
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक आकार पटेल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यकों को अमरीका में हो रहे विरोध प्रदर्शन की तर्ज़ पर आंदोलन करने के लिए उकसाया है.
बेंगलुरु में जेसी नगर पुलिस स्टेशन में उनके ख़िलाफ़ दो जून को एफ़आईआर दर्ज की गई थी. आकार पटेल जाने-माने लेखक, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. उन्होंने 31 मई को एक ट्वीट किया था और उसी को लेकर उन पर एफ़आईआर दर्ज की गई है.
आकार पटेल ने कोलाराडो टाइम्स रिकॉर्डर का एक वीडियो क्लिप पोस्ट किया था. इस वीडियो में दिख रहा है कि हज़ारों लोग कोलाराडो के कैपिटोल बिल्डिंग के पास काले अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.
इस वीडियो को ट्वीट करते हुए आकार पटेल ने लिखा था, ''दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों, ग़रीबों और महिलाओं की तरफ़ से भारत में ऐसे ही प्रदर्शन की ज़रूरत है. दुनिया का ध्यान खींचेगा.''
पटेल पर आरोप है कि उन्होंने इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 505(1)(b) का उल्लंघन किया है. इस सेक्शन में राज्य के ख़िलाफ़ लोगों को अपराध करने के लिए भड़काने का मामला बनता है.
आकार पटेल पर आईपीसी के सेक्शन 153 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसमें लोगों को दंगे के लिए उकसाने का मामला बनता है. इसके अलावा सेक्शन 117 के तहत भी मामला दर्ज हुआ है.
क्या आकार पटेल ने वाक़ई समाज के एक तबक़े को भड़काया है?
इस सवाल पर बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''उनकी टिप्पणी भड़काऊ है. यह टिप्पणी तब आई है जब सोशल डिस्टेंसिंग की बात की जा रही है. लोगों के जुटने पर पाबंदी है. ऐसा संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किया गया है. आकार पटेल की टिप्पणी संक्रमण फैलाने और हिंसा भड़काने वाली है.''
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने बयान जारी कर इसे प्रताड़िता करने वाली कार्रवाई क़रार दिया है.
अविनाश कुमार ने कहा कि आकार पटेल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर उन कई मिसालों में से एक है जहां असहमति को अपराध के दायरे में लाया जा रहा है.
एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने अपने बयान में कहा है, "आकार पटेल के ख़िलाफ़ दर्ज हुई एफ़आईआर इस बात का एक और उदाहरण है कि इस देश में असहमति जताने के अधिकार को किस तरह आपराधिक बनाया जा रहा है. बेंगलुरु पुलिस को अपनी अथॉरिटी का ग़लत इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने संवैधानिक रूप से प्राप्त अधिकार के इस्तेमाल के लिए आकार पटेल को परेशान करना और प्रताड़ित करना बंद करना चाहिए. इस देश के लोगों के पास सत्ता में बैठे लोगों से सहमत या असहमत होने का अधिकार है. साथ ही बिना किसी डर या गैरकानूनी दबाव के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अपने विचार रखने की आज़ादी है. सरकार के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध नहीं है. सत्ता में बैठे लोगों की नीतियों से सहमत न होने से कोई देशद्रोही नहीं हो जाता.''
लेकिन ये मामला सिर्फ़ आकार पटेल का नहीं है. पिछले दिनों में देखा गया है कि सरकारों ने ऐसे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है जिन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ कोई बात कही है.
भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था.
हर्ष मंदर ने कथित तौर पर नफ़रत भरे भाषण देने के लिए भाजपा नेताओं- कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा पर एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में शामिल छात्रों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. जामिया के छात्र मीरान हैदर और सफ़ूरा ज़रगर समेत कई छात्र गिरफ़्तार हैं तो ख़ालिद सैफ़ी नाम के एक कार्यकर्ता भी दिल्ली पुलिस की गिरफ़्त में हैं.
ये सभी सीएए के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में शामिल रहे थे लेकिन अब पुलिस का कहना है कि इन पर दिल्ली में हुए दंगों की साज़िश रचने का आरोप है.
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