कोरोना के ख़िलाफ़ जंग भी राजनीति की भेंट चढ़ रही है?
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Author, तारेंद्र किशोर
पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
भारत में पिछले क़रीब डेढ़ महीने से कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन चल रहा है.
केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर इस क़वायद में जुटी हुई हैं. लेकिन अब इन प्रयासों को लेकर राजनीतिक बहसों और विवादों ने तूल पकड़ लिया है. केंद्र सरकार बनाम राज्य सरकार की लड़ाई छिड़ गई है.
अलग-अलग मसलों को लेकर जिन राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तकरार की स्थिति पैदा हो गई है, उनमें पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान प्रमुख हैं.
अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई का भी हाल दूसरे मुद्दों की तरह राजनीति की भेंट तो नहीं चढ़ रही है.
पश्चिम बंगाल बनाम केंद्र सरकार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार मोदी सरकार को कोरोना वायरस पर नियंत्रण के आड़ में राजनीति करने का आरोप लगा रहीं हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए हुई बैठक में केंद्र के रवैए पर नाराज़गी जताई और कहा कि राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने इस बैठक के दौरान कहा कि एक राज्य के रूप में वे कोरोना वायरस से निपटने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं, लेकिन हमसे हमारी राय नहीं पूछी जाती.
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इससे पहले भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर कोरोना वायरस के नियंत्रण के लिए की जा रही कोशिशों को लेकर निशाना साधा है. मार्च के महीने में केंद्र की एक टीम पश्चिम बंगाल के दौरे पर वहां की स्थिति का जायज़ा लेने गई थी. पश्चिम बंगाल के ऊपर कोरोना वायरस के मामलों की ग़लत जानकारी देने के आरोप की जाँच करने यह टीम पहुँची थी.
ममता बनर्जी केंद्र के इस क़दम से नाराज़ हो गई थी और उन्होंने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि उन्हें केंद्र की टीम के दौरे की जानकारी क्यों नहीं दी गई.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
केंद्र का पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप है कि पश्चिम बंगाल में जनसंख्या के अनुपात में काफ़ी कम टेस्टिंग हुई है, जबकि मृत्यु की दर वहाँ देश में सबसे ज़्यादा है.
इस पर पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि शुरू में कम मामले इसलिए सामने आएँ क्योंकि आधारभूत सुविधाओं की कमी थी और इसलिए वहाँ कोरोना से होने वाली मृत्यु दर अधिक है.
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छत्तीसगढ़ बनाम केंद्र सरकार
छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार को कई ऐसे सुझाव दिए है जो अभी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए हुई बैठक में कहा कि आर्थिक गतिविधियों के संचालन का निर्णय केंद्र सरकार की बजाए राज्य सरकार को दिया जाए.
इसके अलावा रेड ज़ोन, ग्रीन ज़ोन और ऑरेंज ज़ोन का निर्धारण भी केंद्र सरकार की एजेंसी ना कर के राज्य सरकार की एजेंसी करें.
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पंजाब बनाम केंद्र सरकार
पंजाब को विशेष राहत पैकेज देने को लेकर केंद्र सरकार और पंजाब सरकार में उस समय तकरार पैदा हो गई जब केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब को आर्थिक सहायता और खाद्यान्न देकर मदद करने की बात कही.
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस तरह की कोई भी मदद मिलने से सरासर इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जनता को भटकाने की कोशिश कर रही हैं.
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इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के बीच कई बार केंद्र की ओर से मिलने वाली मदद को लेकर ट्विटर पर कहासुनी हुई.
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर अप्रैल के लिए 3000 करोड़ रुपये के अंतरिम मुआवज़े और चार महीने से बक़ाए 4400 करोड़ रुपये की जीएसटी छोड़ने की माँग की थी.
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अभी हाल में फिर से हरसिमरत कौर ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल के महीने में दिए राशन को मई आने के बाद भी जनता में अब तक नहीं बांटा है.
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केरल बनाम केंद्र सरकार
केंद्र और केरल की राज्य सरकार उस वक़्त आमने-सामने आ गई जब केरल सरकार ने अपने यहाँ लॉकडाउन में ढील देने की बात कही. केरल की सरकार का कहना था उनके यहाँ चूंकि अब स्थिति नियंत्रण में है इसलिए वो नाई की दुकानें, रेस्तरां, बुक शॉप वग़ैरह खोलने की इजाज़त दे रहे हैं. इस पर केंद्र सरकार ने एतराज़ जताया था.
केंद्र सरकार का कहना था कि यह केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. इस पर केंद्र गृह सचिव अजय भल्ला ने केरल के गृह सचिव को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज़ जताया था. केरल सरकार ने केंद्र के ऐतराज़ के बाद हालांकि यह फ़ैसला वापस ले लिया था.
इसके बाद केरल से लौटने वाले प्रवासी मज़दूरों से किराए के पैसे लेने की बात भी केंद्र सरकार के पैसे नहीं लेने के दावे से विरोधाभासी रही है.
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महाराष्ट्र बनाम केंद्र सरकार
महाराष्ट्र सरकार और केंद्र की मोदी सरकार प्रवासी मज़दूरों के सवाल पर एक-दूसरे के सामने आ चुकी है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांद्रा रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर अपने-अपने घर जाने के लिए पहुँच गए और अफ़रा-तफ़री मच गई. मज़दूरों की इस मुसीबत के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को दोष दिया तो वहीं केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को स्थिति नहीं संभालने का आरोप लगाया.
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि बांद्रा में जुटी भीड़ हो या सूरत में भड़की हिंसा, इसके लिए केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है जो प्रवासी मज़दूरों के घर वापस लौटने की व्यवस्था नहीं कर पा रही है. प्रवासी मज़दूर शेल्टर या खाना नहीं चाहते, वो अपने घर जाना चाहते हैं.
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प्रवासी मज़दूरों के सामने पैदा हुए इस संकट पर केंद्र सरकार का कहना था कि राज्य सरकारों को उनके राज्य के राहत कोष का इस्तेमाल कर प्रवासी मज़दूरों की मदद करनी चाहिए.
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राजस्थान बनाम केंद्र सरकार
रैपिड टेस्टिंग कीट के इस्तेमाल के सवाल पर राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार से अलग रूख़ अपनाते हुए इसे बंद कर दिया था.
राजस्थान सरकार का कहना था कि त्रुटिपूर्ण नतीजे आने के बाद राज्य सरकार ने रैपिड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल बंद कर दिया है और इसकी सूचना इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च को दे दी है.
इसके बाद आईसीएमआर ने दो दिनों तक सभी राज्यों को किट इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी थी.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.