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तबरेज़ को किसने मारा? पुलिस ने हटाया हत्या का आरोप: प्रेस रिव्यू
झारखंड पुलिस ने तबरेज़ लिंचिंग मामले में दायर की अपनी चार्जशीट से हत्या का आरोप हटा दिया है.
ये रिपोर्ट अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने पर छपी है.
हत्या का आरोप हटाने के पीछे ये तर्क दिया है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार तबरेज़ की मौत कार्डिएक अरेस्ट से हुई थी.
22 वर्षीय मुसलमान युवक तबरेज़ अंसारी को 18 जून को झारखंड में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था.
उन्हें चोरी के आरोप में एक खंबे से बांधकर कई घंटों तक पीटा गया था जिससे गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई थी.
इस पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया में सर्कुलेट किया गया था.
वीडियो में भीड़ को पिटाई के दौरान उनसे 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के नारे लगवाते भी देखा गया था.
इमरान के पूर्व विधायक ने मांगी भारत में शरण
दैनिक भास्कर में छपी ख़बर के मुताबिक़ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के पूर्व विधायक बलदेव कुमार अपने परिवार समेत भारत के पंजाब राज्य में आ गए हैं.
ख़ैबर पख़्तून ख्वा से विधायक (एमपीए) रहे बलदेव ने पंजाब के खन्ना की युवती से शादी की है और अभी वो अपने परिवार के साथ खन्ना में ही किराए के एक मकान में रह रहे हैं.
उन्होंने भारत में राजनीतिक शरण की गुहार लगाई है और कहा है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित नहीं है.
बलदेव कुमार ने उम्मीद जताई है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी मदद ज़रूर करेंगे.
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अगस्त में कारों की बिक्री में 41% की गिरावट
हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट कहती है कि अगस्त महीने में कारों की बिक्री में 41% की कमी आई है.
अख़बार लिखता है कि कार कंपनियों ने बिक्री की कमी को देखते हुए डर की वजह से उत्पादन भी कम कर दिए हैं.
अमर उजाला ने भी पहले पन्ने पर इसी ख़बर को जगह दी है.
अख़बार लिखता है कि वाहनों की बिक्री में 22 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और पिछले 10 महीने से कारों की बिक्री घट रही है.
रिपोर्ट के अनुसार ऑटो सेक्टर में 23.55% की गिरावट आई है.
वाहन कंपनियों के संगठन 'सोसायटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स' के अनुसार अगस्त 2019 में कारों की घरेलू बिक्री में 41.09% की गिरावट दर्ज की गई.
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गांवों में जाने वाले डॉक्टरों को आरक्षण
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने मेडिकल के उन छात्रों के 10-20 फ़ीसदी आरक्षण का प्रस्ताव रखा है जो 5-7 साल गांवों में जाकर प्रैक्टिस करने को तैयार होंगे.
हालांकि ये आरक्षण कड़ी शर्तों पर ही दिया जाएगा. छात्र इसका कड़ाई से पालन करें, प्रस्ताव में इसका भी ध्यान रखा गया है.
अगर कोई मेडिकल छात्र कोर्स पूरा होने पर राज्य सरकारी अस्पताल में प्रैक्टिस करने में नाकाम रहता है तो उसे पांच साल के लिए जेल की सज़ा हो सकती है. इतना ही नहीं, उसकी मेडिकल की डिग्री भी रद्द की जा सकती है.
महाराष्ट्र सरकार के इस प्रस्ताव को कैबिनेट की ओर से समर्थन मिला है और जल्दी ही इस सम्बन्ध में एक विधेयक भी पेश किया जाएगा.
राज्य सरकार का कहना है ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी और मेडिकल छात्रों की गांवों में प्रैक्टिस करने की अनिच्छा को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है.
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