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राम की मूर्ति बनाने पर किसी को ऐतराज़ क्यों नहीं हुआ: मायावती - प्रेस रिव्यू
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उनकी मूर्तियां बनाने से संबंधित एक याचिका का उत्तर देते हुए सवाल किया है कि अयोध्या में 221 मीटर राम की मूर्ति बनने से किसी को कोई ऐतराज़ क्यों नहीं हुआ?
मायावती ने यूपी की मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी और अन्य दलित नेताओं की मूर्तियां बनवाई थीं. इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ अब मायावती की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र में पूछा गया है कि जब अयोध्या में राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति बनाने का प्रस्ताव दिया गया तो कोई आपत्ति क्यों नहीं की गई.
अपने शपथ पत्र में मायावती ने कहा है कि जाने माने लोगों की मूर्तियां लगवाना और उनकी यादें ताज़ा रखना भारत में कोई नई बात नहीं है.
उन्होंने कहा कांग्रेस के शासनकाल में देशभर में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की मूर्तियां जनता के पैसों से लगवाई गई थीं. लेकिन न तो मीडिया ने कोई आपत्ति की न ही याचिकाकर्ता ने.
नाबालिग बेटियों की हत्या कर पत्नी को भेजी तस्वीर
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक शिक्षक ने अपनी दो नाबालिग बेटियों की हत्या करके तस्वीरें व्हाट्सएप पर अपनी पत्नी को भेज दीं और बाद में ख़ुद भी जान दे दी.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेशे से शिक्षक कोपाल सी कुडुपल्ली की पत्नी उनसे अलग रह रहीं थीं और वो इससे परेशान चल रहे थे. मंगलवार सुबह उन्होंने अपनी छह साल और 18 महीने की बेटियों की हत्या कर दी और तस्वीर व्हाट्सएप पर पत्नी को भेज दी और बाद में अपनी जान भी दे दी.
कुडुपल्ली की पत्नी कुछ महीने पहले शाहनवाज़ ख़ान नाम के एक युवक के साथ चली गईं थी जिससे वो बहुत आहत थे.
प्रतिबंध के बाद रफ़ाल पर किताब हो गई लांच
चुनावी उड़नदस्ते ने चैन्ने में कथित रफ़ाल घोटाले पर लिखी गई किताब के विमोचन को रोकने की ख़बर द हिंदू अख़बार में छपी है.
बाद में प्रकाशक चुनाव आयोग से किताब जारी करने की अनुमति लेने में कामयाब रहे और कुछ घंटे बाद ही किताब जारी कर दी गई.
द हिंदू अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चुनाव आयोग ने उड़नदस्ते में शामिल लोगों को इसके बाद ड्यूटी से हटा दिया है और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
दलित की हत्या का अभियुक्त लड़ना चाहता है चुनाव
बीते साल दो अप्रैल को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुई हिंसा में 23 साल की दलित युवा दीपक जाटव की मौत हो गई थी. वो अपने पिता की चाय की दुकान के पास खड़े थे कि उच्च जाति के समूह ने हमला कर दिया.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दीपके के परिवार ने अब बंदूकों के पांच लाइसेंसों के लिए आवेदन दिए हैं. वहीं हत्या में शामिल एक अभियुक्त राजा सिंह चौहान अब लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.
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