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अयोध्या मामले को मध्यस्थता से सुलझाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आज अयोध्या मामले पर तीन मध्यस्थ नियुक्त किए हैं.
ये फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने सुनाई. जस्टिस गोगोई के अलावा बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल थे.
अदालत ने कहा है कि मध्यस्थता की कार्यवाही पर मीडिया रिपोर्ट नहीं कर सकेगा.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फ़कीर मोहम्मद इब्राहिम ख़लीफ़ुल्ला (रिटायर्ड) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन किया है.
इस समिति में श्री श्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पंचू शामिल हैं. अदालत ने कहा है कि मध्यस्थ चाहें तो समिति में और सदस्यों को भी शामिल कर सकते हैं. अदालत के आदेश के मुताबिक मध्यस्थता की प्रक्रिया अगले एक हफ़्ते में शुरू कर देनी होगी.
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अदालत का आदेश है कि मध्यस्थता बंद कमरे में और पूरी तरह गोपनीय होगी. आदेश के मुताबिक़ मध्यस्थता की कार्यवाही फ़ैज़ाबाद में होगी.
उच्चतम न्यायालय ने ये भी कहा है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया आठ हफ्तों में पूरी होनी चाहिए.
जब ये फ़ैसला सुनाया जा रहा था तो वकील, मुवक्किल और सभी पक्षों समेत तक़रीबन 100 वकील अदालत में मौजूद थे.
हिंदू महासभा के नेता स्वामी चक्रपाणि ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है और हम इससे न्याय चाहते हैं.
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