प्रेस रिव्यू: विधानसभा चुनाव में हार से 2019 में बीजेपी पर क्या होगा असर?

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनावी नतीजे जैसा ही माहौल रहा तो बीजेपी को लोकसभा चुनावों में नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

अख़बार में छपे विश्लेषण की मानें तो अगर 2019 में इन तीन राज्यों में बीजेपी 31 सीटें खो सकती है. 2014 में हुए चुनावों में इन तीन राज्यों में बीजेपी ने 65 में से 62 सीटें जीती थीं.

हालांकि बीजेपी भले ही बड़ी पार्टी बनकर न उभरी हो लेकिन सीटों के लिहाज़ से राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन बहुत ख़राब नहीं रहा है.

अमर उजाला ने भी ऐसा ही एक विश्लेषण छापा है. इसके मुताबिक़, पांच राज्यों के ताज़ा नतीजों को 2014 के लोकसभा चुनाव की रौशनी में देखें तो बीजेपी को 40 सीटों का नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

इन राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं. बीजेपी के पास इनमें से 63 सीटें हैं. 2019 में लोगों ने ऐसे ही मतदान किया तो बीजेपी के पास कुल 83 में से बीस सीटें बचेंगी.

शादी में आ सकेंगे गिनती के मेहमान?

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि वो खाने की बर्बादी रोकने के लिए ख़र्चीली शादियों में मेहमानों की संख्या सीमित करने पर विचार कर रही है.

दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव ने कहा, ''एक ओर हम मेहमानों को नियंत्रित कर सकते हैं और दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा एवं मानक क़ानून के तहत केटरर और बेसहारा लोगों को भोजन मुहैया कराने वाले ग़ैर-सरकारी संगठनों के बीच व्यवस्था बनाई जा सकती है.''

कोर्ट ने देव से कहा कि पहले मामले में एक नीति तैयार की जाए. इसके बाद उठाए गए क़दमों पर ठीक से अमल करना होगा.

दिल्ली सरकार ने इस मामले में नीति तैयार करने के लिए आठ सप्ताह का वक़्त मांगा है.

'रेप पीड़िता को आइकॉन बनाकर न हो धरना प्रदर्शन'

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये बेहद दुखद है कि समाज दुष्कर्ष पीड़ित के साथ 'अछूत' जैसा व्यवहार करती है.

कोर्ट ने कहा कि रेप और यौन उत्पीड़न की पीड़ित महिलाओं की पहचान मीडिया सार्वजनिक न किया करे.

जस्टिस मदन बी लोकुर की पीठ ने कहा, ''पीड़िताओं की पहचान सार्वजनिक करने की आशंका वाले किसी भी विवरण का ख़ुलासा नहीं होना चाहिए. मीडिया को ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग का अधिकार है लेकिन ये उसका दायित्व है कि लक्ष्य ऐसे मामलों को सनसनीख़ेज़ बनाना नहीं होना चाहिए.''

कोर्ट के मुताबिक़, पुलिस को भी नाबालिग़ों के ख़िलाफ़ केस समेत दुष्कर्म के मामलों की एफ़आईआर सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए. रेप पीड़िता को आइकॉन बनाकर धरना प्रदर्शन नहीं होना चाहिए.''

AAP को मिले नोटा से कम वोट

जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.

'आप' ने मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 208 पर उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से ज़्यादातर अपनी ज़मानत तक नहीं बचा पाए.

एमपी में पार्टी को सिर्फ़ 0.7 फ़ीसदी वोट मिले जबकि 1.5 फीसदी मतदाताओं ने नोटा को अपनाया.

जनसत्ता की दूसरी ख़बर के मुताबिक़, आम आदमी पार्टी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में लोकसभा चुनाव लड़गी. पार्टी घर-घर जाकर समर्थन जुटाने का अभियान शुरू करेगी.

ये अभियान 14 दिसंबर से शुरू होगा.

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