प्रेस रिव्यू: हर दिन सड़क हादसों में मरते हैं 56 पैदलयात्री

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सड़कों पर हर दिन औसतन 56 पैदलयात्री हादसों में मारे जाते हैं. साल 2014 में सड़क हादसों में 12,330 पदयात्री मारे गए थे. साल 2017 में संख्या बढ़कर 20457 हो गई.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रोज़ाना 133 दोपहिया सवार और 10 साइकिल सवार भी हादसों में मारे जाते हैं. सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा पदयात्रियों की मौतें तमिलनाडु में हुई हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2014 से अप्रैल 2018 के बीच भारत की 21 सरकारी बैंकों ने कुल 3,16,500 करोड़ रुपए का क़र्ज़ माफ़ कर दिया और कुल 44900 करोड़ रुपए का क़र्ज़ वसूल किया.

भारतीय रिज़र्व बैंक से प्राप्त इन आंकड़ों के मुताबिक बैंकों ने जितना क़र्ज़ वसूला उससे सात गुणा क़र्ज़ माफ़ कर दिया. यानी 2018-19 में स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा पर ख़र्च होने वाले कुल बजट से दोगुणा से अधिक रुपया बैंकों ने डुबो दिया.

तकनीक का असर चुनावों में बड़ी चुनौती

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया पर तकनीक का असर एक बड़ी चुनौती है.

रावत के मुताबिक फ़ेक़ न्यूज़ और पेड न्यूज़ से निबटना और पैसों के अधिक इस्तेमाल पर निगरानी रखना भी बड़ी चुनौतियां हैं. रावत ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता की कमी भी चिंता की वजह है.

लखनऊ हत्याकांड में दूसरी एफ़आईआर दर्ज

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के गोमती नगर इलाक़े में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की गोली से मारे गए विवेक तिवारी की हत्या के मामले में पुलिस न दूसरी एफ़आईआर दर्ज की है. तिवारी के परिवार ने अभियुक्त पुलसकर्मियों को बचाने के लिए एफ़आईआर लिखने में ढील बरतने के आरोप लगाते हुए दोबारा एफ़आईआर दर्ज किए जाने की मांग की थी.

जनाक्रोश की वजह से पुलिस को अब इस मामले में दूसरी एफ़आईआर दर्ज करनी पड़ी है. पुलिस ने पहली एफ़आईआर में हत्या के अभियुक्त पुलिसकर्मियों के नाम दर्ज नहीं किए थे. विवेक की पत्नी कल्पना की ओर से दर्ज करवाई गई एफ़आईआर में दोनों पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है.

लखनऊ पुलिस पर मामले में ढील बरतने और हत्या के अभियुक्तों को बचाने के लिए सबूत से छेड़छाड़ करने के आरोप लग रहे हैं.

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