केजरीवाल-एलजी विवाद, अब तक जो मालूम है

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले पांच दिनों से उपराज्यपाल के घर पर धरने पर बैठे हैं. केजरीवाल के साथ उनके तीन मंत्री भी हैं.
शुक्रवार को धरने पर बैठे-बैठे ही उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया है.
आठ मिनट के इस वीडियो में उन्होंने सोमवार 11 जून की शाम से लेकर अब तक की पूरी कहानी सुनाई. अपनी मांग दोहराई और न मानने पर केंद्र सरकार को दोबारा जन आंदोलन की चेतावनी दी.

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दिल्ली सरकार की मांग
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक आईएएस अफ़सर हड़ताल पर हैं, जिसकी वजह से दिल्ली सरकार जन कल्याण की योजनाएं लागू नहीं कर पा रही है. इसलिए, उन्होंने प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल दोनों से गुहार लगाई है कि वो अफ़सरों की हड़ताल जल्द से जल्द ख़त्म कराएं और उन्हें काम पर लौटने का आदेश दें.
इस बारे में उन्होंने दो दिन में दो चिठ्ठियां प्रधानमंत्री को लिखी हैं.
चिट्ठी में केजरीवाल ने लिखा है, "दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज की आख़िरी किश्त जानी है. अफसरों की हड़ताल की वजह से वो रुकी हुई है. कोर्ट के आदेश पर मैं ब्रिज का मुआयना करने गया. मुआयने पर सभी आईएएस अफ़सरों ने आने से साफ इनकार कर दिया है."
साथ ही उन्होंने कई दूसरे काम भी गिनाए जो अफ़सरों की हड़ताल की वजह से प्रभावित हैं. जैसे मानसून के पहले नालों की सफाई, डेंगू-चिकनगुनिया पर सरकार की तैयारी, स्कूलों की रंगाई पुताई और मोहल्ला क्लीनिक का काम.
दिल्ली सरकार की मांग है कि न सिर्फ अफ़सरों की हड़ताल खत्म हो बल्कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा भी दिया जाए.
दूसरी तरफ, दिल्ली के मुख्यमंत्री और बाकी मंत्री काम पर लौटें, इस मांग को लेकर आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा, बीजेपी के तीन विधायकों के साथ मुख्यमंत्री दफ्तर में धरने पर बैठे हैं.

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आईएएस अधिकारियों की हड़ताल
दिल्ली सरकार और आईएएस अफ़सरों के बीच खींचतान इस साल फरवरी से चल रही है.
19 फ़रवरी की देर रात को दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर एक बैठक बुलाई गई थी. दिल्ली के मुख्य सचिव के मुताबिक़ इस बैठक में मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उनके साथ बदसलूकी की थी.
दिल्ली सरकार का आरोप है कि उसी समय से अफ़सर काम नहीं कर रहे हैं.
लेकिन आईएएस ऑफ़िसर एसोसिएशन इस आरोप से इनकार करती है.

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अधिकारियों की मांग
आईएएस एसोसिएशन की तरफ से इस पूरे विवाद के बाद लिखित बयान जारी किया गया है.
बयान में कहा गया है, "19 फरवरी के पहले भी अफसरों के साथ मंत्रियों और विधायकों की ओर से होने वाली बदतमीज़ी की शिकायत सामने आती थीं. लेकिन उस रात सभी हदें पार हो गई थी. हमारी एसोसिएशन के अधिकारी उस घटना से आहत है. हर दिन लंच ब्रेक में हम मौन रखकर अपना विरोध भी ज़ाहिर करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि हम काम नहीं कर रहे हैं."
अपने दावों को पुष्ट करने के लिए वो तथ्य भी पेश करते हैं. उनके मुताबिक़ दिल्ली सरकार ने बजट सत्र का भी आयोजन किया और बजट भी पेश किया. ये साफ़ बताता है कि हम काम पर हैं.
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार में काम कर रहे आईएएस अधिकारी सरकार के मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे. इसके पीछे वो अपनी सुरक्षा की चिंता को वजह बताते हैं.
अफ़सरों का कहना है कि जहां तक प्रोजेक्ट, प्लानिंग, फाइलों पर जवाब देना और योजनाओं पर काम करने की बात है, वो सब ज़िम्मेदारी हम पूरी तरह से निभा रहे हैं.
अफ़सरों ने भी सरकार के सामने दो मांगे रखी हैं.
उनकी पहली मांग है कि 19 फरवरी की घटना के लिए मुख्यमंत्री माफ़ी मांगें और दूसरी मांग है कि सरकार अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो.

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उपराज्यपाल का पक्ष
सरकार और अफ़सरों के बीच के इस विवाद में एक अहम किरदार दिल्ली के उपराज्यपाल भी है.
दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अपने तीन और मंत्रियों के साथ अफ़सरों की हड़ताल खत्म करवाने की मांग लेकर सोमवार को उपराज्यपाल से मिले.
उस मुलाकात के बाद, उपराज्यपाल दफ़्तर की तरफ़ से जारी सूचना के मुताबिक, " उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने धमकी भरे अंदाज में एलजी से अफ़सरों को बुला कर अफ़सरों की हड़ताल खत्म करवाने को कहा."
उनकी इस बात पर उपराज्यपाल की तरफ से मुख्यमंत्री को सूचित किया गया कि अफ़सरों की ऐसी कोई हड़ताल नहीं चल रही है. अफ़सरों में एक डर और अविश्वास का माहौल है. उसे खत्म किया जाए. ये प्रयास सरकार की तरफ से भी किया जाए.
दिल्ली सरकार ने एक और शिकायत उपराज्यपाल से की थी. दिल्ली सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना 'डोर स्टेप डिलीवरी' की फाइल पर अफ़सर बैठे हैं और ये योजना लागू नहीं हो पा रही है.

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यही बात अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को भी अपने वीडियो संदेश में दोहराई है.
इस पर उपराज्यपाल की तरफ से जवाब में कहा गया कि तीन महीने से वो फ़ाइल उन्हीं के मंत्री के पास है. उस पर कानून मंत्रालय की कुछ आपत्तियां है जिसका जवाब सरकार को देना है.
दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रहे विवाद को लेकर उपराज्यपाल और गृह मंत्री राजनाथ सिंह की गुरुवार को मुलाकात भी हुई है. लेकिन उनकी मुलाकात के बाद कोई बयान सामने नहीं आया है.
दिल्ली गवर्नमेंट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन का पक्ष
दिल्ली सरकार, आइएएस एसोसिएशन और उपराज्यपाल के झगड़े में अब दिल्ली गवर्नमेंट एम्प्लॉइज वेलफ़ेयर एसोसिएशन की भी एंट्री हो चुकी है.
दिल्ली गवर्नमेंट एम्प्लॉइज वेलफ़ेयर एसोसिएशन ने भी अब अपनी मांगों को लेकर चीफ़ सेक्रेटरी के ऑफि़स के बाहर 15 जून यानी शुक्रवार से सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की है.
कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष दयानंद सिंह का कहना है कि चीफ़ सेक्रेटरी करीब दो माह से दानिक्स एंव स्टेनो कैडर कर्मचारियों के 'कैडर रिस्ट्रक्चरिंग' से जुड़ी सिफ़ारिशों को लागू नहीं कर सके हैं.
इससे संबंधित फ़ाइल एलजी ऑफ़िस में है जिस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई.

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अब आगे क्या?
शुक्रवार को जारी किए गए वीडियो संदेश में अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि रविवार को दिल्ली की लाखों जनता, दिल्ली सरकार की मांग ले कर प्रधानमंत्री से मिलने उनके आवास पर जाएगी.
उनको आशा है कि रविवार को उनकी बात प्रधानमंत्री मान लेंगे.
लेकिन अगर रविवार को भी उनको सफलता नहीं मिली तो फिर दिल्ली में जन आंदोलन होगा. ठीक वैसे ही जैसे 2012 में दिल्ली में बिजली आंदोलन हुआ था.
तब तक एलजी दफ्तर पर उनका धरना जारी है.
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