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प्रेस रिव्यू: लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल ने खोले दरवाज़े
लड़कियों के लिए खुले दरवाज़े
दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक देश में पहली बार सैनिक स्कूल के दरवाज़े छात्राओं के लिए खोले गए हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित कैप्टन मनोज पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल में छात्राओं को प्रवेश दिया गया है.
2018-19 के शैक्षणिक सत्र में कक्षा 9 के लिए विभिन्न वर्ग की 2,500 छात्राओं में से 15 छात्राओं को चुना गया है. छात्राओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है. इन छात्रों के पिता डॉक्टर, पुलिस, शिक्षक के परिवारों के साथ ही किसान भी हैं. उदय प्रताप सिंह ने बताया कि छात्राओं को सैनिक स्कूल में प्रवेश दिए जाने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल दिया था.
हिंदुस्तान के मुताबिक पाकिस्तान के 24 वर्षीय तेज़ गेंदबाज़ हसन अली ने शनिवार को वाघा बॉर्डर पर ऐसी हरकत की जो सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ़ को ग़लत लगी.
बीएसएफ़ की नाराज़गी
अख़बार के मुताबिक इसके लिए बीएसएफ़ शिकायत भी दर्ज करवा सकती है. दरअसल, वाघा बॉर्डर पर झंडा उतारने के रंगारंग और जोशीले कार्यक्रम (फ्लैग डाउन परेड सेरेमनी) में बीएसएफ जवानों और भारतीयों की तरफ़ हसन अली ने कुछ इशारे किए.
हसन अली ने प्रोटोकोल तोड़कर परेड सेरेमनी के बीच में आकर बीएसएफ़ की तरफ़ ठीक वैसे ही इशारे किए, जैसे कि पाक रेंजर्स और बीएसएफ़ के जवानों के बीच होते हैं. प्रोटोकॉल के मुताबिक इस परेड में कोई भी 'आम नागरिक' हिस्सा नहीं ले सकता है.
आयरलैंड दौरे से पहले ट्रेनिंग कैंप में आई हुई पाकिस्तान की क्रिकेट टीम शनिवार को वाघा बॉर्डर पर आई हुई थी.
भारत और पाकिस्तान की सेनाएं रोज़ाना अटारी-वाघा बॉर्डर पर फ्लैग-डाउन परेड सेरेमनी (झंडा उतारने की रस्म) करती हैं. इस दौरान दोनों सेनाएं अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज को नियमों के मुताबिक रोज़ाना उतारती हैं. इस सेरेमनी को देखने के लिए दोनों देशों के आम नागरिक अपने-अपने बॉर्डर पर इकट्ठा होते हैं. ये सेरेमनी 1959 से की जा रही है.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मंडी बहाउद्दीन में जन्मे हसन अली दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं. उन्होंने पाकिस्तान की तरफ़ से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत अगस्त 2016 में आयरलैंड के ख़िलाफ़ की थी. हसन अली ने अभी तक 30 वनडे मुक़ाबले खेले हैं और 62 विकेट चटकाए हैं.
मुख्य न्यायाधीश का विरोध
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि वो सोमवार से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत में नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा कि उनके कई मामले चीफ़ जस्टिस की अदालत में हैं, लेकिन वो तब तक उनकी अदालत में नहीं जाएंगे जब तक वो रिटायर नहीं हो जाते.
यह पूछे जाने पर कि पूव मंत्री पी चिदंबरम ने महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए, कपिल सिब्बल ने कहा, "हमने तो चिदंबरम से हस्ताक्षर करने को नहीं कहा, क्योंकि उनके कुछ मामले लंबित हैं और मैं उनका वकील हूँ. ये उनके लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि अब मैं चीफ़ जस्टिस की कोर्ट में नहीं जा रहा हूँ."
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