प्रेस रिव्यूः 1986 के मुकाबले गंगा का पानी अब ज़्यादा साफ़!

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ गंगा का पानी साल 1986 के मुक़ाबले अब ज़्यादा साफ़ हो गया है. हालांकि इस ख़बर के शीर्षक के साथ अखबार ने प्रश्नचिह्न भी लगाया है.

अखबार लिखता है कि साल 1986 में जब पहली बार गंगा के पानी को साफ करने की कोशिशें शुरू हुई थीं उसके मुक़ाबले अब गंगा नदी का पानी ज़्यादा साफ़ पाया गया है. यह ख़बर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के आधार पर लिखी गई है.

बताया गया है कि गंगा के पानी की गुणवत्ता नापने के लिए 10 प्रमुख शहरों में पानी की जांच की गई. जांच के दौरान जो मापदंड अपनाए गए उनमें गंगा के पानी में घुली हुई ऑक्सीजन और उसकी बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड को पैमाना बनाया गया.

इन पैमानों के आधार पर गंगा के पानी 1986 के मुक़ाबले अब ज्यादा साफ़ है. लेकिन अखबार साथ ही यह भी लिखता है कि इन आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण मापदंड फैसेल कोलीफॉर्म लेवल को शामिल नहीं किया गया जिसके जरिए यह पता लगता है कि पानी पीने और नहाने के लिए कितना उपयुक्त है.

महाराष्ट्र सरकार का मामला

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट कहती है कि महाराष्ट्र सरकार के 11 हज़ार 700 कर्मचारियों पर नौकरी से निकाले जाने का ख़तरा मंडरा रहा है.

दरअसल यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सात महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया था कि फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर सरकारी नौकरियां हासिल करने वाले लोगों को नौकरी से निकाला जाए. उसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने यह कदम उठाया है.

अखबार लिखता है कि इनमें से कई कर्मचारी क्लर्क के रूप में भर्ती हुए थे जो अब उपसचिव के पद तक पहुंच चुके हैं, निकाले गए कर्मचारियों में से कई लोग 20 साल से अधिक समय से नौकरी कर रहे थे. पिछले चार दशकों में महाराष्ट्र सरकार ने एससी एसटी कोटा के तहत 63 हजार 600 कर्मचारियों की भर्ती की थी.

कासगंज हिंसा

वहीं इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कासगंज हिंसा के बाद सहारनपुर की एक सरकारी अधिकारी रश्मी वरुण ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि कासगंज हिंसा में हुई युवक की मौत के पीछे भगवाधारी लोग थे.

हालांकि बाद में रश्मी से जब उनकी पोस्ट के संदर्भ में सवाल पूछे गए तो उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी. इससे पहले बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने भी कासगंज हिंसा से जुड़ी एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी जिसके बाद विवाद पैदा हो गया था.

अखबार ने इसी खबर को दूसरे पन्ने पर भी जगह दी है उसमें उन्होंने लिखा है कि उत्तर प्रदेश के एक मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कासगंज हिंसा को एक छोटी-मोटी घटना करार दिया है. उन्होंने कहा है कि इस तरह की घटनाएं तो होती रहती है. पचौरी राज्य के खादी, ग्रामीण उद्योग और कपड़ा मंत्री हैं.

ऑटो से सस्ता है हवाई सफर

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने शनिवार को कहा कि अब हवाई यात्रा करना ऑटो और रिक्शा से यात्रा करने से भी सस्ती हो गई है.

नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि प्रति किलोमीटर की दर से देखा जाए तो अब देश में हवाई यात्रा ऑटो रिक्शा से सस्ती हो गई है. जयंत सिन्हा इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन में आयोजित 27वें अंतरराष्ट्रीय मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे.

अखबार आगे लिखता है, जयंत सिन्हा ने इस किराए का गणित समझाते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति इंदौर से दिल्ली की हवाई यात्रा करता है तो उसे महज़ 5 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया चुकाना पड़ता है जबकि इसी शहर में ऑटो ये सफर करने पर 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से किराया देना पड़ता है.

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