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फ़ैज़ के साथ रहेगी पायल उर्फ़ आरिफ़ा: हाईकोर्ट
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक हिंदू लड़की को अपनी मर्ज़ी से धर्म बदलकर एक मुस्लिम युवक के साथ विवाह करके रहने की इजाज़त दी है.
अदालत ने पायल उर्फ़ आरिफा की मर्ज़ी पूछी. पायल ने अदालत से कहा कि न तो वो अपने माता-पिता के घर जाना चाहती है, न ही नारी निकेतन में रहना चाहती हैं.
इस मामले में मंगलवार को जोधपुर में जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास की खंड पीठ के सामने पायल उर्फ़ आरिफ़ा को पेश किया गया जहां अदालत ने उनसे उनका मत पूछा.
इसके बाद अदालत ने पुलिस से कहा कि उन्हें उनकी मर्ज़ी से जाने दिया जाए. अदालत ने कहा कि वह बालिग हैं और उन्हें अपनी मर्ज़ी से कहीं भी रहने का हक़ है.
हिंदू संगठनों ने की नारेबाज़ी
इससे पहले वह करीब एक हफ़्ते से नारी निकेतन में रह रही थीं. जब अदालत में उन्हें पेश किया गया तो अदालत परिसर में हिंदू संगठनों ने नारेबाज़ी की और इस विवाह को 'लव जिहाद' बताया.
इन संगठनों ने अधिवक्ता महेश बोड़ा के ख़िलाफ़ भी नारे लगाए. बोड़ा पायल उर्फ़ आरिफा के पति फ़ैज़ मोदी की पैरवी के लिए अदालत पहुंचे और इस शादी को कानून सम्मत बताया.
अदालत इस मामले में धर्मांतरण पर बुधवार को सुनवाई करेगी. इस बीच अदालत परिसर में मौजूद रहे पायल के परिजनों ने इस निकाह का विरोध किया और आरोप लगाया कि उनकी बेटी को ग़लत ढंग से फंसाया गया है.
पुलिस के मुताबिक, पायल उर्फ़ आरिफा ने इस साल अप्रैल में जोधपुर के फ़ैज़ मोदी से शादी कर धर्म बदल लिया था. पायल के परिजनों ने इसे यह कहकर चुनौती दी कि पायल अक्टूबर तक उनके साथ घर पर ही थीं.
धर्म स्वातंत्र्य विधयेक को अभी नहीं मिला कानून का दर्जा
अदालत ने सरकार से धर्म परिवर्तन की विश्वनीयता और प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा है. अदालत को अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव कुमार व्यास ने बताया कि राजस्थान में धर्म स्वातंत्र्य विधयेक पारित किया जा चुका है. लेकिन अभी इसे कानून का दर्जा नहीं मिल सका है. अदालत इस पर बुधवार को सुनवाई करेगी.
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि यह विधेयक साल 2008 से विचाराधीन है. राजस्थान सरकार इस बाबत केंद्र को पत्र लिख चुकी है. अब फिर इस पर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया जाएगा.
इस बीच सत्तारूढ़ भाजपा में नाराज़ चल रहे विधायक घनश्याम तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है. वह कहते हैं कि सरकार अगर रुचि लेती तो यह कानून बहुत पहले बन गया होता.
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