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माता-पिता के हत्यारों का पता न चलने से मथुरा में 'हताश' बेटी की ख़ुदकुशी
- Author, विजय कुमार आर्य 'विद्यार्थी'
- पदनाम, मथुरा से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
सोमवार शाम को मथुरा के शहीद भगत सिंह पार्क से तिलक द्वार बाजार तक सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने कैंडल मार्च किया.
ये सभी राखी नाम की उस लड़की को श्रद्धांजलि दे रहे थे, जिसने कथित तौर पर अपने माता-पिता के हत्यारों का सात महीने से पता न चलने से निराश होकर शनिवार को ख़ुदकुशी कर ली थी.
लोगों की मांग थी कि परिवार में बाकी रहे दो भाई-बहनों और उनकी सौ साल की दादी के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता दी जाए और हत्यारों को जल्दी गिरफ़्तार किया जाए.
वह मनहूस रात...
इसी साल आठ मार्च को मथुरा के थाना हाईवे इलाके की अमर कॉलोनी के द्वारिकेश नगर में रहने वाले ट्रक चालक बनवारी लाल और उनकी पत्नी रविबाला की उनके निर्माणाधीन मकान में सोते समय बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.
हत्यारों ने उनके चेहरे और सिर पर वार किए थे. रविबाला की तो मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि बनवारी लाल ने इलाज के दौरान दो दिन बाद दम तोड़ा था.
दोनों की मौत के बाद परिवार में बड़ी बेटी राखी (19 वर्ष), बेटा राहुल (17), छोटी बेटी दीपा (15) और उनकी 100 वर्षीय दादी खिल्लो देवी रह गई थीं.
इस घटना ने इन सभी को झकझोर कर रख दिया था. एक तरफ़ माता-पिता के जाने का ग़म था, दूसरी तरफ़ सवाल कि आखिर उनकी हत्या की किसने. भविष्य की चुनौतियों की चिंता अलग थी.
राखी सबसे बड़ी बेटी थीं और बीएससी तृतीय वर्ष की पढ़ाई करते हुए एक निजी स्कूल में पढ़ा रही थीं. मगर माता-पिता के हत्यारों का पता लगाने के चक्कर में दर-दर की ठोकरें खाते हुए पांच हज़ार रुपये की नौकरी भी गंवानी पड़ी. ये हालात तब थे, जब परिवार में कोई और कमाने वाला भी नहीं बचा था.
'हर जगह से मिल रही थी निराशा'
परिजन कहते हैं कि जितना राखी हत्यारों को जल्द पकड़वाने की कोशिश कर रही थी, उतनी ही निराशा उन्हें पुलिस, प्रशासन और शासन की तरफ से मिल रही थी.
राखी के छोटे भाई-बहन बताते हैं कि उनकी दीदी ने स्थानीय विधायक एवं ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा व जनपद के एक अन्य विधायक व दुग्ध विकास, संस्कृति, वक्फ़ एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण से भी मुलाकात की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
इस लड़ाई में राखी का साथ देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मनोज चौधरी कहते हैं, "जब हर तरफ से उसे कोरे आश्वासन मिलने लगे तो वह निराश हो गई. हालांकि, उसने इस बीच कई बार धरना-प्रदर्शन करके प्रशासन पर मामले के खुलासे के लिए दबाव भी बनाया, किंतु सफलता नहीं मिली."
चौधरी ने बताया, 'अंत में 3 अगस्त को उसने आमरण अनशन शुरू कर दिया. इसके बाद जिला प्रशासन ने अगले ही दिन उसकी भूख हड़ताल तुड़वा दी. तब भी उससे यही कहा गया कि पुलिस जल्द ही हत्यारों को पकड़ कर उनके सामने ला खड़ा करेगी."
इसके बाद राखी ने पुलिस और प्रशासन को धमकी दी थी कि अगर जल्द उसके माता-पिता के हत्यारों को नहीं पकड़ा गया तो वह छोटे भाई-बहनों के साथ जान दे देगी.
जीते-जी पूरी नहीं हो पाई इच्छा
दादी खिल्लो देवी बताती हैं कि माता-पिता की हत्या के बाद उसे बस एक ही धुन सवार थी कि किसी भी तरह से उसके मां-बाप के हत्यारों का पता चले.
खिल्लो देवी बताती हैं, "इस ग़म में वह काफ़ी दुबली भी हो चुकी थी. उसे अपने लिए कोई चाह नहीं थी. एक ही चिंता करती थी कि बालिग होने पर भाई को कोई अच्छी नौकरी मिल जाए और मम्मी-पापा के हत्यारे पकड़े जाएं."
लेकिन उसके जीते-जी ऐसा न हो सका. हत्या के बाद से जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दो बार बदल गए, मगर राखी की मांग पूरी नहीं हो पाई.
शनिवार की शाम को उसने कथित तौर पर ज़हरीली चीज़ खा ली. हालत बिगड़ी तो परिजन और पड़ोसी उसे अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
इस घटना का समाचार मिलते ही शहर के उस इलाके के लोगों में आक्रोश फैल गया. लोगों ने राखी का शव मथुरा-गोवर्धन रोड पर रखकर जाम लगा दिया. वे न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे.
आसपास के दर्जन भर थानों की पुलिस की मौजूदगी में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रविंद्र कुमार एवं अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) श्रवण कुमार सिंह बमुश्किल हजारों की भीड़ को काबू में कर राखी का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज पाए.
पुलिस बता रही है ब्लाइंड मर्डर
अब, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई का कहना है कि यह एक ब्लाइंड मर्डर केस है जिसमें हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है. उनका कहना है कि मृतक बनवारी लाल की किसी से भी रंजिश के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
उनका कहना है, "जहां तक लूट का सवाल है तो ऐसा लगता है कि उनके पास नकद धनराशि होने की भनक किसी ऐसे व्यक्ति को लग चुकी थी जिसने या तो खुद या फिर पेशेवर मुजरिमों के माध्यम से लूट की घटना को अंजाम देकर लाभ उठाने की कोशिश की थी."
उन्होंने बताया, "इस मामले में उदासीनता, कर्तव्य पालन में लापरवाही, अकर्मण्यता और अनुशासनहीनता के कारण थाना प्रभारी गिरीश चंद्र तिवारी को निलंबित कर दिया गया है. क्राइम ब्रांच के निरीक्षक डीएन मिश्रा को जांच सौंप दी गई है. पुलिस जल्द से जल्द खुलासा करने में जुटी हुई है."
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