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केरल में धर्म परिवर्तन की मची है होड़
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
केरल के कोच्चि शहर के बाहर त्रिपुनिथुरा के एक योग केंद्र में एक महिला को कथित तौर पर 22 दिन तक ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से बंद कर रखा गया, क्योंकि उसने एक ईसाई से शादी की थी.
महिला ने जब पुलिस में शिकायत की, तब पता चला कि वहां उसी तरह की दूसरी औरतों को भी रखा गया था. अब इस सेंटर को बंद कर दिया गया है. कथित रूप से इस योग केंद्र में महिलाओं को हिंदू धर्म में वापस लाने या 'घर वापसी' जैसा अभियान चलाया जा रहा था.
महिला के वकील ए राजासिम्हन ने बताया, "महिला हिंदू है और जिससे शादी की है वो इसाई है. दोनों की शादी एक मंदिर में सम्पन्न हुई. इस विवाह में कोई भी धार्मिक या राजनीतिक दबाव नहीं था. लेकिन कुछ ग्रुप ऐसे हैं जो इस योग सेंटर की तरह ही काम कर रहे हैं, जहां लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता रहा है."
महिलाओं के साथ ज़बरदस्ती
उनके मुताबिक़, "उसने मुझे बताया कि योग सेंटर में मौजूद लोग अधिकांश समय इस्लाम और ईसाई धर्म के बारे अनाप शनाप बातें करते रहे. सबसे अजीब बात ये थी कि ये महिलाएं पड़ोस के मंदिर भी नहीं जा सकती थीं. हम इस जैसे अन्य केंद्रों के बारे में तो नहीं जानते लेकिन वहां जो कुछ किया गया, वो मेरे मुवक्किल को डराने के लिए था."
राजसिम्हन ने बताया, "पुलिस में उसने शिकायत दर्ज कराई है कि उसे ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से क़ैद कर रखा गया. उसका उत्पीड़न किया गया और एक ऐसे हिंदू व्यक्ति से शादी करने के लिए ज़बरदस्ती की गई, जिससे वो शादी नहीं करना चाहती थी. टॉर्चर के दौरान उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई और दुर्व्यवहार किया गया."
ये मामला अब केरल हाईकोर्ट के हवाले है. लेकिन इससे पहले दो अलग अलग घटनाएं सामने चुकी हैं.
पहली घटना में, कुछ समय पहले मुसलमान युवक से शादी करने वाली एक हिंदू महिला को इसी योग सेंटर में लाया गया था और उसका पुनः धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनाया गया था.
इससे बहुत पहले, एक हिंदू महिला अखिला उर्फ़ हाडिया ने पहले इस्लाम धर्म स्वीकार किया और फिर एक मुस्लिम से शादी कर ली थी.
हाडिया के मामले में केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के आदेश पर उन्हें सत्यसारनी नामक एक इस्लाम अध्ययन केंद्र में भेजा गया, क्योंकि वो इस्लाम का अध्यय करना चाहती थीं.
आरोप प्रत्यारोप
लेकिन उनके पिता असोकन के वकील ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि सत्यसारनी एक धर्म परिवर्तन का केंद्र है और इसे पॉपुलेशन फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) चलाता है.
पीएफ़आई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पी कोया का कहना है, "पहली बात तो ये कि पीएफ़आई इस्लाम को फ़ैलाने का काम नहीं करता. ये सच है कि सत्यसारनी को चलाने वाले कुछ लोग पीएफ़आई के भी क़रीबी हैं, लेकिन वो धर्म परिवर्तन में शामिल नहीं है. कोई भी यहां आ सकता है और इस्लाम का अध्ययन कर सकता है."
तो क्या राज्य में एक तरफ़ सत्यसारनी और दूसरी तरफ़ योग सेंटर जैसे केंद्रों में मज़हब बदलवालने की होड़ लगी है?
केरल में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन कहते हैं, "मैं नहीं समझता कि कोई प्रतियोगिता जैसी कोई चीज है. बल्कि ये हो रहा है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ कट्टरपंथी तत्वों को दूसरी तरफ़ से प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है."
वो कहते हैं, "योग सेंटर की कई गतिविधियों में संभव है कि कुछ गतिविधियां हिंदू लड़कियों के इस्लाम में धर्म परिवर्तन को रोकने से संबंधित हों."
माहौल बिगाड़ने की कोशिश
कोया के अनुसार, "केरल में जो हो रहा है, वो ये कि हिंदुत्व ताक़तें एक सेक्युलर समाज के सांस्कृतिक घेरे में घुसपैठ कर रही हैं. ये चिंता की बात है."
सामाजिक कार्यकर्ता राहुल ईश्वर का कहना है, "केरल में हिंदू और मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों के बीच आगे निकलने की होड़ सी लगी है. इसमें कोई आध्यात्मिकता नहीं है. माहौल को साम्प्रदायिक करने की कोशिश हो रही है. दोनों तरफ़ से राजनीतिक खेल जारी है."
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक बीआरपी भास्कर भी इस बात से सहमति जताते हुए बताते हैं कि दोनों ही पक्ष अपने अनुयायियों की संख्या बढ़ाने की जुगत भिड़ा रहे हैं. दोनों ही इसका राजनीतिक असर देखना चाहते हैं क्योंकि साम्प्रदायिक विभाजन आख़िरकार राजनीतिक लाभ भी लाता है.
हालांकि इस बात की शंका है कि वे अपने मक़सद में क़ामयाब होंगे, "हमारे पास सेक्युलरिज़्म का सदियों पुराना एक समृद्ध इतिहास रहा है. पिछली शताब्दी में यह इलाक़ा तगड़े सामाजिक सुधार आंदोलनों का गवाह रहा है. इसने केरल के समाज में सेक्युलर और साम्प्रदायिकता विरोधी भावनाओँ को मज़बूत किया है और इन्हीं की वजह से सामप्रदायिक ताक़तें हाशिए पर हैं."
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