You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जिबूती में चीन का पहला विदेशी सैन्य अड्डा
चीन की सेना जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य ठिकाना शुरू करने के लिए तैयार है. इससे पहले अमरीका, जापान और फ्रांस भी जिबूती में अपना सैनिक अड्डा बना चुके हैं.
अफ्रीका का यह छोटा सा देश जिबूती लगातार विदेशी सेनाओं के केंद्र में रहा है. चीनी मीडिया के अनुसार चीनी सैनिकों की टुकड़ियों को लेकर कुछ समुद्री जहाज जिबूती की तरफ रवाना हो चुके हैं. यह जानना दिलचस्प है कि आखिर इस छोटे से देश में तमाम बड़े राष्ट्रों की रूचि क्यों है.
जिबूती ही क्यों?
जिबूती की लोकेशन उसे मिलिट्री बेस बनाने के लिए काफी उपयुक्त समझी जाती है. यह एक व्यस्त शिपिंग मार्ग पर पड़ने वाला देश है. इसके साथ ही अपने बाकी पड़ोसी देशों के मुकाबले यहां के राजनीतिक हालात स्थिर हैं.
चीन का कहना है कि वह अपने मिलिट्री बेस के ज़रिए अफ्रीका और दक्षिण एशिया में शांति औक मानवता कायम करने में मदद करेगा. चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार इससे सैन्य सहयोग, नौसैनिक अभ्यास और बचाव मिशन के कार्य भी किए जाएंगे.
अफ्रीका में बढ़ता चीनी निवेश
चीन लगातार अफ्रीका में निवेश के स्तर को बढ़ा रहा है, साथ ही वह पिछले कुछ सालों में अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर भी बहुत ध्यान दे रहा है. शिन्हुआ की रिपोर्ट में बताया गया कि मंगलवार को चीन के दक्षिणी ग्वांगदोंग प्रांत के शहर झांजियांग से चीनी सेना जिबूती के लिए रवाना हो चुकी है.
रिपोर्ट के अनुसार जिबूती बेस का निर्माण चीन और जिबूती के बीच हुए दोस्ताना समझौते का नतीजा है. इस कदम को अफ्रीकी क्षेत्र में चीन की मौजूदगी दर्ज कराने के रूप मे देखा जा रहा है.
साल 2015 में अफ्रीकी राष्ट्रों के साथ हुए शिखर सम्मेलन में चीन ने अफ्रीका के विकास के लिए 60 बिलियन डॉलर निवेश करने का वादा किया था. इसके साथ ही चीन अफ्रीका महाद्वीप का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर भी बन चुका है. वहीं अफ्रीका के ज़रिए चीन को कई प्राकृतिक संसाधन प्राप्त हो रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)