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'लेडिज वॉशरूम जाना मेरे लिए बड़ी बात'
- Author, प्रगित परमेश्वरन
- पदनाम, तिरुवनंतपुरम से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पिछले साल अबू धाबी में जब ज़ारा शेख ने नौकरी छोड़ी थी और अपनी ट्रांसजेंडर पहचान को लेकर खुलकर सामने आई थीं तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वो ज़िंदगी की चुनौतियों से कभी हार नहीं मानेंगी.
ज़ारा शेख की ज़िंदगी में एक मौक़ा ऐसा भी आया जब वो ख़ुदकुशी के बारे में सोचने लगीं. इसकी वजह थी- लोगों के ताने और मानसिक तनाव.
अब वो किसी मल्टिनेशनल आईटी कंपनी में बड़े ओहदे पर पहुंचने वाली केरल की पहली ट्रांसजेंडर हैं. अबू धाबी उनकी ज़िंदगी में अब पीछे छूट गया है.
अबू धाबी में ज़िंदगी
वो कहती हैं, "अबू धाबी में ज़िंदगी दुश्वार हो गई थी. काम के दबाव के अलावा, वहां के स्टाफ मेरा मज़ाक उड़ाया करते थे क्योंकि लड़का होने के बावजूद मेरा मिज़ाज लड़कियों वाला था.''
उन्होंने कहा, ''मेरी पसंद लड़कियों वाली है. मुझे लिपस्टिक और आई लाइनर का इस्तेमाल करना अच्छा लगता है लेकिन वहां कंपनी में इनके इस्तेमाल पर पाबंदी थी. मैं ख़ुदकुशी के बारे में सोचने लगी थी क्योंकि मुझे अपने तरीके से जीने की इज़ाजत नहीं थी."
ज़ारा शेख तिरुवनंतपुरम की रहने वाली हैं और हाल ही में उन्होंने टेक्नोपार्क में यूएसटी ग्लोबल कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट में बतौर सीनियर असोशिएट जॉइन किया है.
नौकरी के इंटरव्यू
ज़ारा बताती हैं, "अगस्त, 2016 में अबू धाबी से लौटने के बाद मैंने कई इंटरव्यू दिए. हालांकि इंटरव्यू में पास होने के बावजूद भी किसी ने भी मुझे एक ट्रांसजेंडर के तौर पर नहीं अपनाया.''
उन्होंने कहा, ''अपने आप को अब तक लड़के के तौर पर पेश करते-करते मैं थक गई थी. मैं अब ऐसी जगह पर काम करना चाहती थी जहां मुझे वैसे ही स्वीकार किया जाए, जैसी मैं हूं. उन्होंने मुझे कहा कि वे मुझे नौकरी देने के लिए तैयार हैं अगर मैं इंटरव्यू के तीन राउंड क्वॉलिफाई कर जाऊं."
अपनी पहचान के साथ नौकरी हासिल करना ज़ारा के लिए किसी ख़्वाब के हक़ीक़त में बदलने जैसा ही था.
नई ज़िंदगी
उन्होंने बताया, "ये कंपनी मुझे मेरी ट्रांसजेंडर पहचान के साथ नौकरी देने के लिए तैयार थी. जिस बात से मुझे हैरत हुई, वो मेरे सहयोगियों का बर्ताव था. जब मैं पहली बार दफ्तर पहुंची तो मेरे मन में ये सवाल था कि पता नहीं दूसरे लोग मुझे कैसे देखेंगे.''
ज़ारा ने बताया, ''मेरी पुरानी मान्यताओं को तोड़ते हुए मुझे स्वीकार करके खुश थे. मेरी पहचान के लिए उनके मन में आदर था. कंपनी ने मुझे बताया कि मैं लेडीज़ वॉशरूम इस्तेमाल कर सकती हूं. मेरे लिए ये बड़ी बात थी."
कोच्चि मेट्रो रेल में ट्रांसजेंडर समुदाय के 23 लोगों की भर्ती की ख़बर के बाद यूएसटी ग्लोबल और टेक्नोपार्क थर्ड जेंडर के लोगों को नौकरी देकर नई नज़ीर पेश कर रहा है.
केरल में बदलाव
ज़ारा कहती हैं, "मैं ये तो नहीं कह सकती कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को नौकरी देने में केरल सबसे आगे हैं. तमिलनाडु हमसे कहीं आगे है. यहां एक हफ़्ते हो चुके हैं लेकिन मेरे जैसे किसी शख़्स को कोई रहने के लिए घर देने को तैयार नहीं है."
लेकिन केरल में हो रहे बदलाव को लेकर ज़ारा खुश हैं. वो कहती हैं कि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण दिख रही है.
ज़ारा अगले दो सालों में सेक्स चेंज की सर्जरी कराने के बारे में सोच रही हैं.
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