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'लड़के कभी चुन्नी खींच लेते हैं कभी कुछ और'
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रेवाड़ी के गोठड़ा टप्पा डहीना गांव से
हरियाणा में रेवाड़ी के गोठड़ा टप्पा डहीना गांव में 13 स्कूली छात्राएं सात दिन से अनशन पर बैठी हैं.
वे इस बात से नाराज़ हैं कि उनके लिए दसवीं के आगे की पढ़ाई की कोई सुविधा नहीं है. इसके लिए उन्हें ढाई-तीन किलोमीटर दूर एक स्कूल में जाना पड़ता है. उनका आरोप है कि रास्ते में उनसे अक़्सर छेड़खानी की जाती है.
इन छात्राओं के साथ उनके परिजन, गांव के लोग और सरपंच भी धरने पर बैठ गए हैं. इन सबकी मांग है कि गांव के स्कूल को अपग्रेड करके बारहवीं तक कर दिया जाए.
'वे नक़ाब पहनकर आते हैं, चुन्नी खींचते हैं'
बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक लाइव में ओमवती ने कहा, 'मेरा अपनी बच्चियों को पढ़ाने का मन नहीं है क्योंकि रास्ते में इनके साथ छेड़खानी होती है. लड़के कभी चुन्नी खींच लेते हैं, कभी कुछ और. ये दुबकती हुई जाती हैं. इस बार मैंने इन्हें इनकार कर दिया कि मैं तुम्हें पढ़ने नहीं भेजूंगी. पर ये पढ़ना चाहती हैं.'
सुजाता नाम की छात्रा ने बताया, 'लड़के पीछे से बाइक पर नकाब पहनकर आते हैं, चुन्नी खींचते हैं. रास्ते में प्याऊ के मटके रखे होते हैं, हमें देखकर उन्हें फोड़ते हैं और हमारे ऊपर पानी गिराते हैं. दीवारों पर मोबाइल नंबर लिखकर चले जाते हैं. हम मीडिया के आगे हर चीज़ तो बता नहीं सकते. लिमिट होती है.'
ओमवती ने कहा, 'हम मोदी जी से धन-दौलत नहीं मांगते. एक बारहवीं तक का स्कूल मांगते हैं बस.'
'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के नारे का क्या मतलब है?'
पूजा ने दो-तीन साल पहले बारहवीं की पढ़ाई पूरी की थी. उन्होंने कहा, 'इतनी धूप में पैदल चलकर देखिए. सुनसान रास्ता है. फिर बीच में लड़के कमेंट पास करते हैं. फिर मोदी जी ने ये भी लगा रखा है- बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ. क्या मतलब है इस नारे का. बंद कर देना चाहिए. क्यों यह मुहिम छेड़ रखी है?'
हालांकि शिक्षा मंत्री ने गांव के स्कूल को बारहवीं तक अपग्रेड करवाने का वादा कर दिया है. लेकिन प्रदर्शनकारी इस पर लिखित में आश्वासन चाहते हैं. पूजा कहती हैं, 'वादे हर साल होते हैं, एक भी पूरा नहीं हुआ. गारंटी दो.'
इन छात्राओं के साथ हाल ही में बीएसएफ़ से बर्ख़ास्त किए गए तेज़ बहादुर यादव भी बैठे हुए मिले. उन्होंने कहा, 'मैं यहां से 40-45 किलोमीटर दूर रहता हूं. यहां के सरपंच और समाज के लोगों ने मुझे यहां की समस्याओं के बारे में बताया.'
तेज़ बहादुर ने कहा, 'दो बच्चियों की हालत पीछे देखो कितनी ख़राब है. बड़े शर्म की बात है.'
छात्राओं के परिवार के पुरुष सदस्य भी उनके साथ हड़ताल पर बैठे हैं.
अभिभावकों में से एक उषा चौहान ने कहा कि जब हम पुलिस से शिकायत करते हैं तो कार्रवाई की बजाय बाहर ही समझौता करा दिया जाता है.
अपनी बेटी को पांवों पर लिटाए बैठी एक महिला ने कहा, 'हमारी बेटी सात दिन से यहां बैठी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही. जब तक शिक्षा मंत्री नहीं आ जाते, हम हड़ताल जारी रखेंगे.'
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