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'चेन्नई में कहीं किताबें पढ़ रहे होंगे मेरे भाई करनन'
जस्टिस करनन के भाई अरीवुडई नंबी ने कहा है कि उनके गाँव में लोगों ने जस्टिस करनन के समर्थन में काले झंडे लगाए हुए हैं. अदालत की अवमानना के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश करनन को छह महीने की सज़ा सुनाई गई है और पुलिस को उनकी तलाश है.
बीबीसी संवाददाता प्रमिला कृष्णन से बातचीत में अरीवुडई नंबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के खि़लाफ़ लोग अपना विरोध जताना चाहते हैं. अरीवुडई नंबी कुडुलोर में विरुधाचलम कोर्ट में वकील हैं.
उन्होंने कहा, "मेरे भाई बहुत बहादुर हैं. वो चेन्नई में किसी कोने में कानूनी किताबें पढ़ रहे होंगे. वो राष्ट्रपति से मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे. वो फरार नहीं हैं."
जब उनसे मानसिक जाँच की बात पूछी गई तो अरीवुडई नंबी ने कहा, "न्यायापालिका में बहुत से लोग उन्हें पसंद नहीं करते क्योंकि वो उनसे जुड़े कई घोटाले सामने लाने वाले थे. वो सभी समस्याओं का सामना करेंगे और उभरेंगे."
पिछले कई महीनों से वे लगातार विवादों से घिरे रहे हैं. मद्रास हाई कोर्ट में जज बनने से लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में तबादले तक वो कई बार दलित होने के कारण भेदभाव का शिकार होने की शिकायत कर चुके हैं.
कोर्ट और विवाद
2009 में मद्रास हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एके गांगुली की सिफ़ारिश पर करनन को इसी अदालत में जज नियुक्त किया गया.
मद्रास हाई कोर्ट में जज नियुक्त होते ही उनकी अदालत के अन्य न्यायाधीशों के साथ अनबन शुरू हो गई.
मुख्य विवाद
- एक मामले में जस्टिस करनन ने कहा कि दो वयस्कों के बीच अगर शारीरिक संबंध हो और बच्चे का जन्म हो तो उन्हें पति-पत्नी के रूप में देखा जाना चाहिए.
- जस्टिस करनन ने आदेश दिया कि कोई उनकी इस टिप्पणी का मज़ाक न बनाए.
- करनन ने कहा कि क्योंकि वो दलित हैं इसलिए मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उनसे भेदभाव कर उन्हें मामूली केस थमा रहे हैं.
- जस्टिस करनन ने मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ मामलों का स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत की अवमानना के आरोप लगाए. इन मामलों की जांच भी करनन खुद ही करते थे.
- 2016 फ़रवरी में करनन का तबादला कलकत्ता हाईकोर्ट में कर दिया गया तो उन्होंने ख़ुद ही इस पर रोक लगा ली. उन्होंने अपने चीफ़ जस्टिस को ही नोटिस जारी कर दिया था.
- कलकत्ता हाईकोर्ट जाने के बाद उन्होंने जनवरी 2017 में प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाई कोर्ट के 20 न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.
- सुप्रीम कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए 13 फ़रवरी को करनन को पेश होने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छह महीने की सज़ा सुनाई.
- 13 अप्रैल को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सात जजों को 28 अप्रैल को उनके सामने पेश होने का आदेश दिया. इसके बाद सात न्यायाधीशों की बेंच ने करनन की मानसिक जांच करने का आदेश दिया.
- उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वॉरंट जारी कर दिया और फिर चीफ़ जस्टिस समेत अन्य जजों को पांच साल की सज़ा सुना दी.
- अब 11 जून को वो सेवानिवृत्त हो रहे हैं.
कौन हैं जस्टिस करनन?
कुड्डालोर ज़िले के एक गांव में मध्य वर्गीय परिवार में 12 जून 1955 को जन्मे करनन के पिता स्कूल हेडमास्टर हुआ करते थे.
आठ संतानों वाले इस परिवार में पिता ने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाई.
न्यायाधीश करनन के दो भाई वकील हैं वहीं एक भाई तमिलनाडु के विशेष सुरक्षा दस्ते में शामिल हैं.
मंगलमपेट्टई हाई स्कूल से स्कूल पढ़ाई करने के बाद करनन ने वीरुथाटलम आर्ट्स कॉलेज में पढ़ाई की और फिर चेन्नई के न्यू कॉलेज से बीएससी की डिग्री ली.
मद्रास लॉ कालेज से कानून की पढ़ाई लेकर करनन मेट्रो वॉटर जैसी सरकारी एजेंसियों में सलाहकार के तौर पर काम करने लगे और कई मामलों में वो सरकारी वकील के तौर भी पेश होते. 2009 में मद्रास हाईकोर्ट में वे जज नियुक्त हुए.
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