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केजरीवाल सरकार ने 'सत्ता का दुरुपयोग' किया- शुंगलु कमिटी
दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त शुंगलु कमेटी की पड़ताल के अनुसार अरविंद केजरीवाल के नेतृव वाली दिल्ली सरकार ने बड़े पैमाने पर अपनी ताक़त का दुरुपयोग किया है.
इस तीन सदस्सीय कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी (आप) को अपना कार्यालय बनाने के लिए आवंटित की गई ज़मीन, दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन में राज्य के मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी की निदेशक के तौर पर हुई नियुक्ति और आप के कई तथाकथित पदाधिकारियों को सलाहकार बनाए जाने का जिक्र किया है.
तबादले और नियुक्ति
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कमेटी ने एंटी करप्शन ब्रांच में अधिकारियों की नियुक्ति, अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति, उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना मंत्रियों के विदेश दौरे और वकीलों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं.
कमेटी का गठन राज्य के पूर्व उपराज्यपाल नज़ीब ज़ंग ने अपने कार्यकाल में किया था.
सौ पेज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विवाद की शुरुआत अप्रैल 2016 में उस समय हुई जब केजरवील ने सभी विभागों को एक निर्देश जारी किए.
इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो दिल्ली विधानसभा की ओर से भारतीय संविधान की धारा 239 एए (3) के तहत भेजे गए सभी विषयों पर उपराज्यपाल की सलाह के बिना फ़ैसला लें.
ज़मीन का आबंटन
कमेटी का कहना है कि आप को कार्यालय बनाने के लिए ज़मीन आवंटित करने के फ़ैसले को वैध नहीं माना जाना चाहिए. कमेटी ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल को आवास आवंटित करने के फ़ैसले पर भी सवाल उठाए हैं.
रिपोर्ट में अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार की ओर से कुछ लोगों को सरकार का सलाहकार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया गया है. कमेटी के मुताबिक़ इस तरह के फ़ैसले लेने का अधिकार सरकार के पास नहीं है, वह भी उपराज्यपाल की सलाह के बिना.
पूर्व उपराज्यपाल नज़ीब जंग ने कहा था कि कमेटी ने अनियमितता के जो मुद्दे उठाए हैं, उनमें अरविंद केजरीवाल को आपराधिक आरोप का सामना करना पड़ सकता है.