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ये देश के सबसे कम पगार वाले विधायक हैं
- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
देश में सबसे गरीब समझे जाने वाले पश्चिम बंगाल के विधायकों का वेतन अब पहली अप्रैल से औसतन पांच हज़ार रुपए बढ़ जाएगा.
उनका दैनिक भत्ता भी बढ़ा कर दो हज़ार रुपए कर दिया गया है. हालांकि इस बढ़ोतरी के बावजूद नए बने राज्य तेलांगाना के विधायकों से यह कम है.
तेलंगाना के विधायक वेतन-भत्तों के मामले में सबसे अमीर हैं और उनको महीने में ढाई लाख रुपए मिलते हैं.
बिजली मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय इस बढ़ोतरी को जायज़ ठहराते हैं.
वे कहते हैं, "दूसरे राज्यों के मुकाबले यहां विधायकों का वेतन बहुत ही कम है. छोटे-छोटे राज्यों के विधायकों का वेतन भी यहां के विधायकों से ज़्यादा है. तेलंगाना के विधायकों को हर महीने ढाई लाख रुपए मिलते हैं."
पुरानी थी मांग
पश्चिम बंगाल में विधायकों का वेतन-भत्ता बढ़ाने की मांग बहुत पुरानी थी. बरसों से इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ था.
कांग्रेस के एक विधायक नेपाल महतो ने विभिन्न राज्यों के विधायकों के वेतन और भत्तों का एक तुलनात्मक अध्ययन विधानसभा में पेश किया था.
इसमें बताया गया था कि इस मामले में राज्य के विधायक सबसे 'ग़रीब' हैं. इसके बाद हाल में वेतन और भत्तों में वृद्धि के लिए विधानसभा में दो विधेयक पारित किए गए हैं.
अब पहली अप्रैल से विधायकों का वेतन बढ़ कर 17 हज़ार 500 रुपए हो जाएगा.
इसी तरह अब कैबिनेट मंत्री को 22 हज़ार रुपए और राज्य मंत्री को 21 हज़ार 900 रुपए मिलेंगे.
विधानसभा अध्यक्ष का वेतन अब 27 हज़ार होगा जबकि मुख्यमंत्री का 27 हज़ार एक रुपये. हालांकि ममता बनर्जी हर महीने सांकेतिक वेतन के तौर पर एक रुपया ही लेती हैं.
कांग्रेस विधायक नेपाल महतो कहते हैं, "विभिन्न राज्यों के विधायकों के वेतन के तुलनात्मक अध्ययन से साफ़ है कि बंगाल के विधायकों को बेहद कम वेतन मिलता है. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, झारखंड और असम समेत पूर्वोत्तर के तमाम छोटे राज्यों में विधायकों का वेतन बंगाल के मुकाबले ज़्यादा है."
लाखों का वेतन
कई राज्यों में विधायकों का वेतन लाखों में हैं. मिसाल के तौर पर नए बने तेलांगाना में बीते साल विधायकों का वेतन बढ़ा कर ढाई लाख रुपए कर दिया गया.
इसके बाद मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने दलील दी थी कि यह त्याग का दौर नहीं है. हम सब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शामिल हैं. राव को फिलहाल 4.21 लाख रुपए मिलते हैं.
इसी तरह दिल्ली के विधायकों को हर महीने 2.10 लाख रुपए मिलते हैं जबकि हिमाचल प्रदेश में सवा लाख.
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी बीते साल विधायकों का वेतन बढ़ा कर 1.87 लाख कर दिया था.
आंध्र प्रदेश में विधायकों का वेतन 1.25 लाख है. पूर्वोत्तर में वामपंथी शासन वाले त्रिपुरा में विधायकों का वेतन 24 हज़ार दो सौ है और छोटे-से सिक्किम में 52 हज़ार रुपए.
सीपीएम की दलील
सीपीएम ने विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी का ख़ास विरोध तो नहीं किया है, उसकी दलील है कि पूर्व विधायकों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए.
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "पूर्व विधायकों को भी इसके दायरे में रखना चाहिए था. इसके साथ ही पंचायतों और नगरपालिकाओं में भी वेतन वृद्धि होनी चाहिए थी."
लेकिन संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी चुटकी लेते हुए कहते हैं, "चक्रवर्ती शायद अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं. आखिर बाद में वे भी पूर्व विधायक कहलाएंगे."
चटर्जी कहते हैं कि वाम मोर्चा सरकार के लंबे शासनकाल के दौरान यहां विधायकों का वेतन देश में सबसे कम रहा.
वे कहते हैं, "मौजूदा दौर में ऐसे मामूली वेतन से ईमानदारी से ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करना मुश्किल है."
चटर्जी मानते हैं कि यह वेतन और ज़्यादा बढ़ना चाहिए था. उन्होंने राज्य के ख़ज़ाने की हालत सुधारने पर इसमें और वृद्धि का भरोसा दिया है.
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