'बेटे को ऐसे मार डाला जैसे पागल कुत्ते को मारते हैं'

    • Author, सुधारक ओल्वे
    • पदनाम, सामाजिक कार्यकर्ता, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

(दलितों पर अत्याचार पर बीबीसी हिंदी की ख़ास सिरीज़ का दूसरी कड़ी में आगे परिवार पर हुए अत्याचार की कहानी.)

महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के महार लड़के नितिन आगे की अगर हत्या नहीं होती तो उसका भविष्य कुछ और होता.

जामखेड़ कस्बे के खारदा गांव के रहने वाले 17 साल के नितिन की सिर्फ इसलिए बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई कि उन्होंने एक ऊंची जाति के समुदाय से आने वाली लड़की से बात की थी.

नितिन को मारने के बाद शव को एक पेड़ पर टांग दिया गया था.

लड़की के भाई समेत उसी ऊंची जाति से ही आने वाले तीन लोगों को संदेह था कि नितिन का उस लड़की से अफ़ेयर था और वो स्कूल में लगातार उसको परेशान कर रहा था.

नितिन नवीं कक्षा का होनहार विद्यार्थी था, जो पिछले कुछ सालों से पार्ट टाइम काम करते हुए एक मोटरसाइकिल गैराज में ट्रेनिंग ले रहा था.

पढ़ाई और अन्य कामों में वो बहुत तेज़ तर्रार था. कई लोगों को उसके ईर्ष्या होती थी.

28 अप्रैल 2014 को, जिस दिन उसकी हत्या हुई, खारदा गांव में अंग्रेज़ी माध्यम के सरकारी स्कूल में 12वीं की तैयारी की एक परीक्षा में वो शामिल होने गया था.

उसके पिता राजू आगे के मुताबिक, जब नितिन स्कूल गया था, उन्होंने (अभियुक्तों) ने वहां उसे पीटा था. स्कूल के शिक्षक और प्रिंसिपल ने मारपीट रोकने की कोशिश भी नहीं की, बल्कि उन्हें स्कूल से बाहर जाकर मारपीट करने को कहा था.

इसके बाद नितिन को स्कूल से बाहर ले जाया गया और उसकी बुरी तरह पिटाई की गई.

राजू कहते हैं, "यहां तक कि उन्होंने उसे नंगा कर गांव में घुमाया लेकिन इस अत्याचार को किसी ने नहीं रोका. भीड़ में अधिकांश मराठा थे, जाति की वजह से उन्हें हस्तक्षेप करने के बारे में ख्याल भी नहीं आया. मेरे बेटे को ऐसे मार डाला गया जैसे एक पागल कुत्ते को मार डालते हैं."

राजू प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को पिरोते हुए कहते हैं कि तीन आदमियों ने पहले उसके हाथ-पैर तोड़कर उसे ज़मीन पर पटका. फिर, उन्होंने उसके बेहोश शरीर को कई बार मोटरसाइकिल से रौंदा, मानो किसी फ़िल्म में स्टंट कर रहे हों. इसके बाद उन्होंने उसके शव को ईंट के एक भट्ठे में खींच ले गए और उसके गुप्तांगों में लोहे की गरम रॉड डाली. बाद में इसे आत्महत्या की शक्ल देने के लिए उसे नींबू के एक छोटे पेड़ पर टांग दिया.

राजू बताते हैं, "ये विश्वास करना बेहद मुश्किल था कि उसने इतने छोटे पेड़ से लटक कर आत्महत्या की होगी."

घटना के दिन, नितिन के अभिभावकों को बिल्कुल पता नहीं था कि वो कहां है और काफी तलाश करने के बाद उन्हें उसका शव पेड़ से लटका हुआ मिला.

नितिन के पिता के मुताबिक, "हम उसे जामखेड़ अस्पताल लेकर गए जहां बाद में शव का पोस्टमार्टम हुआ. यह घटना मीडिया में सुर्खियां बनी."

सिर्फ संदेह

नितिन के साथ ऐसी जघन्य बर्बरता, उसी गांव की रहने वाली एक लड़की के साथ अफ़ेयर होने के संदेह पर किया गया था. हालांकि लड़की के परिवार का दावा था कि नितिन को केवल पीटा गया था, हत्या नहीं की गई थी.

उनका कहना था कि उसने खुद ही आत्महत्या कर ली होगी.

एक अंग्रेज़ी अख़बार में लड़की के परिवार के एक सदस्य के हवाले से कहा गया कि नितिन लड़की को परेशान कर रहा था और जब लड़की के भाई ने उसे पकड़ा तो उसने उसके साथ मारपीट की.

उस सदस्य का कहना था, "ये केवल धमकाने के लिए किया गया था. नितिन को बेइज्ज़ती महसूस हुई होगी और उसने आत्महत्या कर ली होगी."

लेकिन नितिन की मां का कुछ और कहना है. घटना के दो दिन पहले नितिन ने अपनी मां के सामने खुद स्वीकार किया था कि लड़की ने ही उससे बातचीत की पहल की थी.

रुंधे गले से नितिन की मां कहती हैं, "मेरा बेटा बहुत ही सीधा सादा लड़का था. उसने हमें कभी किसी समस्या में नहीं डाला. उसने अपने डर को मुझसे ज़ाहिर किया था क्योंकि वो पढ़ाई में खलल नहीं चाहता था और इसके अलावा वो किसी झगड़े में नहीं पड़ना चाहता था."

आक्रोषित राजू आगे कहते हैं, "अध्यापक भी इसके दोषी हैं. वो मराठा समुदाय से ही आते हैं और उन्होंने आरोपियों का बचाव किया. उन्होंने उनको क्यों नहीं रोका? अगर उन्होंने उस समय रोका होता तो मेरा बेटा मरा नहीं होता."

तारीख़ पर तारीख़

हालांकि नितिन की हत्या में 10 से अधिक लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस ने बस उन्हीं तीन लोगों को नामजद किया जिनका नितिन के पिता ने नाम लिया था. इसमें लड़की का भाई भी शामिल था.

बाद में धारा 302 और उत्पीड़न विरोधी क़ानून के तहत अन्य आरोपियों को भी गिरफ़्तार किया गया.

13 आरोपियों में तीन नाबालिग रिहा हो गये, तीन को ज़मानत मिल गई, जिनमें से कुछ ने गांव छोड़ दिया है.

जब चार्जशीट तैयार हो गई तो पुलिस इस मामले में काफी ढिलाई बरतने लगी. अपराधी खुले घूम रहे हैं क्योंकि कोर्ट के लगातार वारंट दिए जाने के बाद भी पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया.

पुलिस का दावा है कि अपराधी फरार हैं लेकिन राजू आगे का दावा है कि इनमें से एक उनके घर से होकर गुजरता है.

तीन साल बीत चुके हैं लेकिन मुक़दमा अभी भी चल रहा है.

राजू के साथ एक अच्छी बात ये रही कि नितिन की मां को एक बेटा हुआ है, जिसका नाम उन्होंने नितिन ही रखा है.

हालांकि नया नितिन उनकी खुशियां लौटा सकता है, लेकिन जातीय अत्याचार और भेदभाव के जो घाव आगे परिवार को लगे हैं, वो शायद ही भर पाएं.

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