'अगर वो देश के ख़िलाफ़ था तो हमें शव नहीं चाहिए'

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- Author, रोहित घोष
- पदनाम, कानपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
लखनऊ के ठाकुरगंज इलाक़े में उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए संदिग्ध चरमपंथी मोहम्मद सैफ़ुल्ला के परिवार ने उनका शव लेने से इनकार कर दिया है.
कानपुर के जाजमऊ इलाक़े के मनोहर नगर में रहने वाले सैफ़ुल्ला के पिता सरताज अहमद ने कहा, "पुलिस वाले हमारे पास आए थे और कहा कि हम शव दफ़नाने के लिए ले लें लेकिन हमने मना कर दिया."
सरताज कहते हैं, "अगर वो देश के ख़िलाफ़ है तो हमारा उससे कोई संबंध नहीं है."
कानपुर के घनी आबादी वाले जाजमऊ इलाक़े में रहने वाले सरताज अहमद के तीन बेटे और एक बेटी हैं. वो ख़ुद उन्नाव में चमड़े का काम करते हैं.

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उनका एक बेटा चमड़े के कारखाने में काम करता है और दूसरा चाय की दुकान चलाता है. 22 साल का सैफ़ुल्ला घर में सबसे छोटा था और सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा भी.
अपने बेटे के बारे में सरताज कहते हैं, "अगर मैं कहूंगा तो आपको झूठ लगेगा. मोहल्ले में किसी से भी पूछ लीजिये. उससे नेक और शरीफ़ लड़का कोई नहीं था. अचानक ये क्या हुआ ये मुझे भी समझ नहीं आ रहा है."
सरताज अहमद के मुताबिक़ सैफ़ुल्ला पढ़ाई में होशियार था और दसवीं और बारहवीं के बोर्ड परीक्षाओं में अस्सी से ऊपर अंक लाया था.

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परिवार के मुताबिक़, सैफ़ुल्ला ने अपने घर के पास ही स्थित जय प्रकाश नारायण कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश लिया था. दो साल तक बीकॉम पढ़ने के बाद उसने कॉलेज छोड़ दिया. फिर उसने कंप्यूटर का कोर्स किया था.
सरताज अहमद के मुताबिक़ उन्होंने ढाई महीने पहले सैफ़ुल्ला को बहुत डांटा और मारा था.
सरताज कहते हैं, "वह कोई काम नहीं करता था. वो मुंबई जाने के बात कह के घर से भाग गया और फिर कभी संपर्क नहीं किया."

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वो कहते हैं, "अब ये सब क्या हुआ, कैसे हुआ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है."
सरताज अहमद के अनुसार सैफ़ुल्ला ने पिछले सोमवार फ़ोन करके उन्हें बताया था कि उसे दुबई का वीज़ा मिल गया है.
ये आख़िरी बात थी जो सैफ़ुल्ला से उसके पिता ने की थी. इसके बाद उन्हें टीवी के ज़रिए लखनऊ में हुए एनकाउंटर के बारे में जानकारी मिली.
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