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केरल: रिश्तेदारों ने 'आईएस लड़ाके' के मारे जाने की पुष्टि की
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी गुट के कथित लड़ाके हफ़ीज़ुद्दीन टीके के रिश्तेदारों ने ड्रोन हमले में उनके मारे जाने की पुष्टि कर दी है.
हफ़ीज़ुद्दीन के मारे जाने की ख़बर उनके किसी दोस्त ने घरवालों को मैसेज से दी. मैसेज में कहा गया कि उनका बेटा 'शहीद' हो गया.
केरल में हफ़ीज़ुद्दीन के नज़दीकी रिश्तेदार बीसी रहमान ने बीबीसी से कहा, "बीते छह महीने सबसे ज़्यादा तक़लीफ़देह रहे. हमें अंदेशा था कि किसी भी दिन इस तरह का संदेश आ सकता है."
बीते साल जुलाई में हफ़ीज़ुद्दीन की मां इस कदर परेशान थीं कि वे बीमार हो गईं. हफ़ीज़ुद्दीन ने 5 जुलाई 2016 को एक मैसेज भेजकर अपनी मां से 'सलाम अलैकुम' कहा था.
खोज़-पड़ताल से जब कुछ पता नहीं चला तो पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया.
हफ़ीज़ुद्दीन ने ग्रैजुएशन पूरा नहीं किया था. घरवालों ने इस उम्मीद से उनकी शादी करवा दी थी कि वे इसके बाद ज़्यादा गंभीर हो जाएंगे. लेकिन बीते तीन साल से हफ़ीज़ुद्दीन यकायक कुछ ज़्यादा ही धार्मिक हो गए थे.
साल 2016 के मई में उन्होंने घर फ़ोन कर कहा कि मैं कोझीकोड में हूं और वायदा किया कि वे ईद के मौके पर ज़रूर आएंगे. लेकिन इसके बाद उनकी मां ने कई बार फ़ोन किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. एक बार मैसेज किया कि वे श्रीलंका में हैं.
परिवार के लोगों को बाद में पता चला कि करसगोड के 17 युवा लड़के और लड़कियां यकायक गायब हो गईं.
रहमान ने बीबीसी से कहा, "हमें जितने मैसेज मिले, हमने पुलिस को बता दिया. हर परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया. लेकिन न पुलिस और न ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी उनका ठिकाना तलाश पाई."
दरअसल, रहमान ने अशफ़ाक मजीद का मैसेज मिलने के बाद हफ़ीज़उद्दीन से संपर्क करने की कोशिश की. उन्होंने टेलीग्राम ऐप से एक वॉयस मैसेज भेजा.
रहमान ने कहा, "मैंने पाया कि वे मेरे वॉयस मैसेज का जवाब नहीं दे रहे हैं, सिर्फ़ टेक्स्ट में जवाब दे रहे हैं. वे एक स्थानीय सेल नंबर से मैसेज कर रहे थे."
मजीद ने मैसेज में लिखा था, "हफ़ीज कल ड्रोन हमले में मारे गए. हम उन्हें शहीद मानते हैं. अल्लाह बेहतर जानता है."
रहमान के मैसेज के जवाब में मजीद ने लिखा, "हम अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, इंशा अल्लाह."
केरल के एक आला पुलिस अफ़सर ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास है.
एनआईए से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा कि ग़ायब लोग अफ़ग़ानिस्तान में हो सकते हैं.