तमिलनाडु: विश्वासमत जीता, पलनीसामी नए मुख्यमंत्री

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भारी हंगामे और तोड़फोड़ के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी ने शनिवार को विधानसभा में विश्वासमत वोट जीत लिया है. इस दौरान विधानसभा में विपक्ष पूरी तरह से ग़ायब रहा.
विपक्षी कांग्रेस, डीएमके और पनीरसेल्वम का खेमा विश्वासमत में गोपनीय वोटिंग की मांग कर रहा था. स्पीकर ने इस मांग को ख़ारिज कर दिया था. इसके बाद विधानसभा में जमकर तोड़फोड़ हुई थी.
पलनीसामी ने विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वासमत ध्वनिमत से जीता. पलनीसामी का सदन में 122 विधायकों ने समर्थन किया. इनके ख़िलाफ़ केवल 11 विधायक रहे. इन सब के बीच प्रदेश की विपक्षी पार्टी डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन राजभवन राज्यपाल से मिलने पहुंचे हैं.

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हालांकि पहले इससे पहले विधानसभा में अराजक स्थिति देखने को मिली थी. पलनीसामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
विधानसभा अध्यक्ष का कहना था कि झड़प में उनकी शर्ट फट गई. उन्होंने बताया कि विधानसभा में अराजक स्थिति के बीच उन्हें अपमानित होना पड़ा. विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करने से पहले स्पीकर ने विपक्षी डीएमके के सदस्यों को सदन से निकालने का आदेश दिया था. इसके बाद सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया था.
हालांकि डीएमके नेता एमके स्टालिन ने दावा किया है कि स्पीकर ने अपनी शर्ट ख़ुद से ही फाड़ ली. 134 सदस्यों वाली विधानसभा में पलनीसामी को 117 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत थी.

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विधानसभा अध्यक्ष के मेज पर लगी माइक भी तोड़ दी गई और अध्यक्ष के आसन पर डीमएके सदस्य जाकर बैठ गए थे.
हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी. एक बजे जब सदन का कार्यवाही दुबारा शुरू हुए तो द्रमुक के सदस्यों ने हंगामा जारी रखा. इसे देखकर विधानसभा की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी.
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 134 विधायक हैं. इसमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं. वहीं राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक के 89 विधायक हैं. इसके अलावा आठ विधायक कांग्रेस के हैं. जयललिता के निधन की वजह से एक सीट खाली है.
अम्मा के निधन के बाद उठापटक
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 14 फ़रवरी को अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला को चार साल की सज़ा सुनाए जाने के बाद पलनीसामी को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुना गया था.
राज्यपाल विद्यासागर राव ने गुरुवार सुबह पलनीसामी को मिलने के लिए बुलाया था. इस दौरान ही उन्होंने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया था.
इस दक्षिण भारतीय राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता का पिछले साल पांच दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था.
इसके बाद राज्य के वरिष्ठ मंत्री पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री और शशिकला को अन्नाद्रमुक महासचिव बनाया गया था.

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अन्नाद्रमुक विधायक दल ने पांच फ़रवरी को शशिकला को अपना नया नेता चुना. इसके बाद पनीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
राज्यपाल ने पनीरसेल्वम का इस्तीफ़ा स्वीकार करते हुए उनसे नई व्यवस्था होने तक काम करते रहने को कहा था.
शशिकला को उम्मीद थी कि राज्यपाल उन्हें सरकार गठन के लिए बुलाएंगे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

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सात फ़रवरी की रात पनीरसेल्वम अचानक जयललिता की समाधि पर पहुंचे और आधा घंटे तक ध्यान लगाया.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए उन्हें मज़बूर किया गया. उन्होंने अपना इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए राज्यपाल को अर्जी दी.
उनका कहना था कि उनसे जब कहा जाएगा, वो विधानसभा में बहुमत साबित कर देंगे.
उन्हें पार्टी के क़रीब दस सासंदों का समर्थन मिला. लेकिन ज़रूरी विधायकों का समर्थन नहीं मिला.

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पाला बदलने की आशंका को देखते हुए शशिकला ने पार्टी के अधिकांश विधायकों को चेन्नई के पास स्थित एक रिसार्ट में कड़ी सुरक्षा में रखा.
इस बीच क़रीब 19 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति के मामले में 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला को चार सला की सज़ा सुना दी.
इस फ़ैसले के बाद शशिकला का मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं हो पाया.












