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कब-कब 'बंधक' बनाया गया विधायकों को
अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला को पांच फरवरी को विधायक दल का नेता चुना गया था जिसके बाद उनका तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था.
मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा दे दिया जिसे स्वीकार कर राज्यपाल ने उन्हें नई व्यवस्था होने तक काम करते रहने को कहा.
लेकिन पनीरसेल्वम ने आठ फ़रवरी को बगावत का बिगुल फूंक दिया और कहा कि उनसे दबाव देकर इस्तीफ़ा लिया गया.
इस बग़ावत से डरकर शशिकला ने अन्नाद्रमुक के एक सौ से अधिक विधायकों को चेन्नई के पास एक रिसॉर्ट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में रखा.
यह पहला मामला नहीं है कि समर्थन जुटाने या सरकार बचाने के लिए विधायकों को ऐसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया हो.
2010 - कर्नाटक
साल 2008 में भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक में बीएस येदुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाई जो दक्षिण भारत में पार्टी की पहली सरकार थी.
अक्तूबर 2010 में उनके19 विधायकों ने बग़ावत कर दी जिससे सरकार अल्पमत में आ गई.
समर्थन वापस लेने के बाद ये विधायक गोवा चले गए, जहाँ वो एक पांच सितारा होटल में रुके. वहां उन्हें मनाने के लिए सरकार और विपक्ष के नेता पहुंचे थे.
2012 - उत्तराखंड
उत्तराखंड में 2012 में हुए चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला.
70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 31, कांग्रेस को 32 और सात सीटें निर्दलीय और बसपा को मिली थीं.
सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 36 विधायकों की दरकार थी. भाजपा को डर था कि उसके विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त हो सकती है.
इससे बचने के लिए भाजपा ने 30 अपने और दो निर्दलीय विधायकों को मध्य प्रदेश के इंदौर पहुंचा दिया.
वहां उन्हें भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पदाधिकारियों की देख-रेख में रखा गया.
उस साल कांग्रेस ने बसपा विधायकों के सहयोग से उत्तराखंड में सरकार बना ली.
2016 - उत्तराखंड
राज्य में हरीश रावत की सरकार उस समय संकट में आ गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में नौ विधायकों ने भाजपा की शह पर बग़ावत कर दी.
मामला हाई कोर्ट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. अदालत ने हरीश रावत को 10 मई 2016 को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा और बाग़ी विधायकों को मतदान देने से रोक दिया.
इसके बाद विधायकों को किसी तरह की ख़रीद-फरोख्त से बचाने के लिए कांग्रेस और रावत सरकार को समर्थन दे रहे अन्य विधायकों को मसूरी के एक होटल में रखा गया.
वहीं ख़बरों के मुताबिक़ भाजपा ने कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ-साथ अपने विधायकों को गुड़गांव के एक फ़ाइव स्टार होटल में रखा.
2016 - राजस्थान राज्यसभा चुनाव
राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों के लिए 2016 में चुनाव हुआ था.
चुनाव के दौरान किसी खरीद फरोख्त से बचाने के लिए भाजपा ने जून 2016 में अपने सभी 164 विधायकों को राजधानी जयपुर के एक होटल में रखा.
सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए होटल में जैमर तक लगा दिया गया था.
हालांकि भाजपा ने इसे चुनाव से पहले विधायकों को प्रशिक्षण देने के लिए लगाया गया शिविर बताया.
2016 - कर्नाटक राज्यसभा चुनाव
पिछले साल कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने तीन उम्मीदवार खड़े किए.
भाजपा और जेडीएस ने भी एक-एक उम्मीदवार खड़े किए.
कांग्रेस की दो सीटों पर जीत तय थी, लेकिन तीसरे सीट के लिए उसे राज्य के 14 निर्दलीय विधायकों के समर्थन की ज़रूरत थी.
इन निर्दलीय विधायकों को ख़रीद-फरोख़्त से बचाने के लिए कांग्रेस के दो विधायक क़रीब 12 विधायकों को लेकर मुंबई चले गए.