जेल जहां मुस्कुराती हैं महिला क़ैदी

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe
- Author, सुधारक ओल्वे
- पदनाम, जानेमाने फोटोग्राफर, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जेल में रहने वाले लोगों को अपराधी, सज़ायाफ्ता या क़ानून तोड़ने वालों में गिना जाता है.
हाल ही में मैं लखनऊ गया, जहां मुझे नारी बंदी निकेतन जाने का मौका मिला. यह जेल महिला क़ैदियों के लिए है और इसमें उनके बच्चों के भी रहने की जगह है.
लेकिन मुझे ये जेल अच्छे मूल्यों की शिक्षा देने वाला संस्थान नज़र आया. ऊपर की तस्वीर 25 साल की नीलम रामचंद्र गुप्ता की है.
नीलम 11 साल नारी बंदी निकेतन में बिता चुकी हैं. वे कम्प्यूटर-स्किल में माहिर हैं और जेल के अंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संचालित करती हैं.

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe
यहां रहने वाली महिला क़ैदियों ने बंज़र ज़मीन को ऊपजाऊ बना दिया है जहं वो कई तरह की सब्जियां उगाती हैं.
साफ़ सुथरा जेल होने के साथ साथ यहां का खाना भी मुझे काफ़ी पसंद आया.

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe
इन क़ैदियों को अपनी रिहाई का इंतज़ार है और यही इंतज़ार उन्हें गेट से बाहर झांकने के लिए विवश कर देता है.

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe
इस जेल में जहां एक ओर महिलाएं अपनी सज़ा काट रही हैं, वहीं उनके बच्चों को पढ़ने लिखने की सुविधाएं मिली हुई है, स्कूल जैसा माहौल दिखता है.

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe

इमेज स्रोत, Sudharak Olwe
यहां कई तरह की महिला क़ैदी अपनी सज़ा काट रही हैं. इसमें सबसे ज़्यादा उम्र सकीना बेगम महमूद की है. वे 83 साल की हैं.
सकीना ने यहां क्रोएशिया से काम करना सीखा है और दूसरी क़ैदियों को सिखाने का काम भी किया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












