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नोटबंदी का समर्थन कर चुके नायडू अब नाराज़
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
ढाई साल में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अहम दल तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने नाखुशी ज़ाहिर की है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने नोटबंदी के मुद्दे पर अपनी नाखुशी जतायी है.
हालांकि चंद्रबाबू नायडू ने मोदी सरकार के इस क़दम का पहले समर्थन किया था. कहा जा रहा है कि नायडू ने नोटबंदी के मामले में दो क़दम आगे बढ़ने के बाद एक क़दम पीछे खींच दबाव बनाने की कोशिश की है ताकि वह केंद्र से फंड और सियासत दोनों में बाजी मार सकें.
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सबसे दिलचस्प है कि चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्रियों की उस हाई-प्रोफ़ाइल समिति के अध्यक्ष हैं जिसे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए रणनीति तैयार करने की ज़िम्मेदारी दी गई है. इस ज़िम्मेदारी के साथ नायडू की तरफ से नोटबंदी पर मोदी सरकार से नाख़ुशी जताना मायने रखता है.
जब 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1,000 और 500 के नोटों को रद्द करने की घोषणा की तो चंद्रबाबू ने पहले ही दिन सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने पीएम को यह सलाह दी थी. नायडू ने यहां तक दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में 18 अक्तूबर को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था.
नायडू पिछले कुछ हफ्तों से हर दिन दो घंटों से ज़्यादा वक्त बैंक अधिकारियों से बातचीत कर पैसे निकालने को आसान बनाने को लेकर बातचीत कर रहे थे. हालांकि इस मामले में बैंको ने नायडू के सामने अपनी असमर्थता ज़ाहिर की. इसके बाद ही नायडू ने अपना रुख बदला.
स्थानीय मीडिया में चंद्रबाबू नायडू का बयान छपा है, ''नोटबंदी पर मेरी इच्छा नहीं थी लेकिन यह हुआ. नोटबंदी के 40 दिन बाद भी समस्या बनी हूई है. अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है. अब तक यह समस्या नाजुक और जटिल बनी हुई है. मैं हर दिन इस पर माथापच्ची कर रहा हूं लेकिन कोई भी राह दिखाई नहीं दे रही.''
राजनीतिक विश्लेषक ए श्रीनिवासन राव का कहना है, ''नायडू ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनके ऊपर पार्टी नेताओं का दबाव है. उन्हें हर दिन प्रदेश से लोगों की समस्याओं की शिकायत मिल रही है. इस मामले में बैंकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं क्योंकि उनके पास कैश नहीं हैं. हालांकि उनका यह बयान नोटबंदी के ख़िलाफ़ नहीं है.''
नायडू ने बुधवार को बैंकरों के साथ बैठक में कहा कि उन्होंने ही पीएम को बड़े नोट अमान्य करने की सलाह दी थी ताकि काले धन को काबू में किया जा सके.
एशियानेट तेलुगू के संपादक नागार्जुन जिंका ने कहा कि नायडू का बयान उनके दोहरे मानदंड को ही दर्शाता है. जिंका ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू के बारे में एक छवि बनी है कि वह मोदी के नोटबंदी के ब्रैंड ऐम्बैस्डर हैं. हालांकि दूसरी तरफ पार्टी विधायकों का दबाव है कि वह नोटबंदी पर मोदी को समर्थन देने को लेकर फिर से सोचें.
हालांकि अर्थशास्त्री और टिप्पणीकार पेंडापति पुला राव इस मुद्दे को अलग तरीके से देख रहे हैं.
उन्होंने कहा, ''यहां तक कि चंद्रबाबू को भी नहीं पता था कि नोटबंदी काले धन के ख़िलाफ़ एक ख़तरनाक क़दम है. इससे बीजेपी कमजोर ही होगी. बीजेपी ने अभी तक चंद्रबाबू नायडू को बहुत तवज्जो नहीं दी है. जब बीजेपी कमजोर होगी तो उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद नायडू स्थिति को भांप सकते हैं. इसके बाद नायडू रणनीतिक रूप से दबाव बनाना शुरू करेंगे. यूपीए सरकार में जो रवैया डीएमके का था वैसा ही नायडू करना चाहते हैं.'
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