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'विपक्ष दूध का धुला है तो बहस करे'
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि नोटबंदी की मुहिम भ्रष्टाचार और काला धन के खिलाफ़ एक धर्म युद्ध है.
बीजेपी प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा का कहना है कि इस युद्ध में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है.
बीबीसी से बातेचीत में श्रीकांत शर्मा ने माना कि इस ''युद्ध में निश्चित रूप से कुछ दिक्क़तें हैं, कुछ परेशानियां हैं, लेकिन इन परेशानियों को आम जन समझ रहा है.''
उनके मुताबिक़ विपक्ष परेशान और 'कन्फ्यूज्ड' है, ''कभी विपक्ष के नेता कहते हैं कि भाजपा ने अपने नेताओं को नोटबंदी की जानकारी पहले दे दी जिसका लाभ उन्होंने उठाया. राहुल गाँधी कहते हैं कि इसकी जानकारी वित्त मंत्री को भी नहीं थी.''
वो कहते हैं, "मुहिम ख़ुफ़िया थी. और, प्रधानमंत्री मोदी इसकी देख-रेख कर रहे थे.''
बीजेपी प्रवक्ता कहते हैं, "जनाब जो जाली नोटों के रैकेट चला रहे हैं वो बहुत ताक़तवर लोग हैं जिन्होंने अपनी तिजोरियां भरी हुई हैं. इस मुहिम के बारे में थोड़ा बहुत भी पता लगता तो ये सफल नहीं होता.''
नोटबंदी पर संसद में हंगामा हो रहा है और विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री बहस के दौरान संसद में मौजूद रहें.
विपक्षी दलों का ये भी इलज़ाम कि बीजेपी के कुछ लोगों को नोटबंदी से पहले ही नोटबंदी की खबर लीक कर दी गयी थी. इसकी जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग की जा रही है.
क्या सरकार इस मांग को स्वीकार करेगी?
शर्मा कहते हैं, ''इन्होंने ने चर्चा की मांग की वो कल (बुधवार) हमने करा दी. इनमें अगर नैतिकता थी तो चर्चा को सुचारू क्यों नहीं रखा?"
उन्होंने कहा कि विपक्ष की नियत में खोट है, "हम तो चुनौती देते हैं. अगर आप ईमानदार हैं, दूध के धुले हैं तो बहस करिये ना."
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि ये मुहिम अब वापस नहीं ली जा सकती.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुछ अन्य नेताओं की मांग है कि मुहिम को ख़त्म किया जाए क्योंकि जनता को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ रही है.
देश भर में 8 नवंबर की रात से 1000 और 500 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगाकर सरकार ने सब को हैरान कर दिया.
अगले दिन के हर छोटे-बड़े शहरों में बैंकों और एटीएम मशीनों के बाहर लोगों की लंबी क़तारें लगने लगीं. कई लोग घंटो क़तार में खड़े रहे.
राहुल गाँधी, अरविंद केजरीवाल और दूसरे कई लीडरों ने कहा कि वो काले धन के ख़िलाफ़ अभियान के विरूद्ध नहीं है लेकिन सरकार को जनता की सुविधा के लिए कड़े क़दम उठाने चाहिए थे.
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि सरकर ने 10 ऐसे क़दम उठाये हैं जिससे आम आदमी को परेशानी नहीं होगी जिनमें बैंकों को इस मामले में जारी दिशा निर्देश और एटीएम पर अधिक से अधिक नए नोटों को पहुँचाना शामिल है.