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कश्मीर में 200 स्कूल बंद करने के आदेश
भारत-प्रशासित कश्मीर में अधिकारियों ने क़रीब 200 स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हैं. सरहद पर हो रही गोलीबारी के चलते फैले तनाव को देखते हुए ये आदेश दिए गए हैं.
अधिकारियों के अनुसार मंगलवार को गोलीबारी में भारत के आठ नागरिक मारे गए थे.
इस हफ्ते की शुरूआत में पाकिस्तान ने भारत पर चार लोगों को मारने का आरोप लगाया था.
भारत-प्रशासित कश्मीर में जुलाई में चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद से भारत प्रशासित कश्मीर में शिक्षा सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले क्षेत्रों में से एक है.
शिक्षण संस्थान बंद हैं और अब अज्ञात हमलावर सरकारी स्कूलों को निशाना बना रहे हैं.
भारत प्रशासित कश्मीर में रविवार को रहस्यमयी हालात में दो और सरकारी स्कूलों में आग लगा दी गई, और इसी के साथ यहां पिछले कुछ हफ्तों में आग के हवाले कर दिए गए स्कूलों की संख्या 27 हो गई है.
हालांकि इस मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और इनमें से दस के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करवाया गया है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूरे क्षेत्र के 10 ज़िलों में स्कूलों को निशाना बनाया गया है, उनका कहना है कि वो अभी घटनाओं की जांच कर रहे हैं.
प्रदेश की पीडीपी और बीजेपी गठबंधन सरकार का कहना है कि ये अभी तक पता नहीं चल पाया कि इन घटनाओं का ज़िम्मेदार कौन है लेकिन इन घटनाओं की काफ़ी आलोचना हुई है.
एक छात्र गुलज़ार ने बीबीसी को बताया, ''ये बेहद दुखद है. एक छात्र के तौर पर मैं बहुत दुखी हूं. स्कूलों को क्यों जला रहे हैं? वो हमारे संस्थान हैं, हमारी संपत्ति हैं. शिक्षण संस्थानों को जलाकर किसी को क्या मिलेगा?"
राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख़्तर ने कहा, ''शिक्षा किसी भी समाज के लिए ऑक्सीजन की तरह है. इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. ज़ाहिर है जो लोग स्कूलों को जलाने और शिक्षण संस्थानों को नष्ट करने की घटनाओं के पीछे हैं वो कश्मीर के शुभचिंतक नहीं कहे जा सकते.''
शिक्षा मंत्री का ये भी कहना है कि सभी 12000 स्कूलों को सुरक्षा प्रदान करना असंभव है.
जम्मू-कश्मीर हाई कार्ट के एक जज भी इस बात से सहमत हैं, उनका कहना है कि स्कूलों को बचाने के लिए ''सामूहिक प्रयास'' होना चाहिए क्योंकि उनके अनुसार शिक्षा में निवेश करना आने वाली पीढ़ी में निवेश करना है.
हालांकि हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है.
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की प्रोफेसर डॉ. रुमाना हामिद मक़दूमी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ''स्कूल ज़रूरी हैं उनकी सुरक्षा की ज़रूरत है. उनकी रक्षा उसी तरह करें जैसे सचिवालय की करते हैं, जैसे वीवीआईपी लोगों की करते हैं. अगर सुरक्षा को लेकर कोई मु्द्दा है तो वीआईपी लोगों की सुरक्षा परतों में से एक परत कम दें और उसे स्कूलों को दे दें.''
हक़ीक़त ये है कि 100 से ज़्यादा दिनों से स्कूल बंद हैं जिससे लोग हताश हैं, कई लोगों का कहना है कि चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद अलगाववादियों के बुलाए बंद से शिक्षा को छूट मिलना चाहिए.
(श्रीनगर से गौहर गिलानी से बातचीत पर आधारित)
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