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कई राज्यों में पलटी सत्ता
भारत के राज्यों में भी इस साल राजनीतिक माहौल काफ़ी गर्म रहा और कुछ राज्यों ने जहाँ वैधानिक तरीक़े से सत्ता परिवर्तन देखा तो कुछ में जोड़-तोड़ की वजह से नई सत्ता आई. देश की राजनीति की नब्ज़ माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कथित रूप से अगड़ों और पिछड़ों की पार्टी का मिलन ज़्यादा दिन नहीं चला. केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से राज्य में चल रही बहुजन समाज पार्टी की सरकार आधा साल बीतते-बीतते गिर गई और मुलायम सिंह यादव की कई वर्षों बाद प्रदेश की सत्ता में वापसी हुई. ताजमहल के निकट ही कांप्लेक्स बनाने का मायावती सरकार का फ़ैसला उसके लिए मुश्किल बन गया और जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र में मंत्री जगमोहन के विरुद्ध मोर्चा खोला तो भाजपा ने समर्थन खींच लिया. इसके बाद से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बढ़ती नज़दीक़ियाँ राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. चर्चा ये भी है कि आगामी आम चुनाव में दोनों मिलकर बसपा को किनारे करने की गुप्त रणनीति बना सकती हैं. जम्मू कश्मीर जम्मू-कश्मीर की राजनीति भी देश की मुख्य राजनीति को प्रभावित करती रही है. सरकार ने पूर्व रक्षा और गृह सचिव एनएन वोहरा को अलगाववादी गुटों और विभिन्न पक्षों से बात करने के लिए वर्ष की शुरुआत में मुख्य वार्ताकार बनाया मगर अलगाववादियों की ओर से इसपर कोई गर्मजोशी नहीं दिखी.
इसके अलावा राज्य की मुफ़्ती मोहम्मद सईद की सरकार केंद्र से समीकरण ठीक रखकर ही चलने की कोशिश कर रही है. वर्ष के अंत तक सरकार ने उपमुख्यमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को हुर्रियत कांफ़्रेंस से बातचीत करने के लिए अधिकृत करके महत्त्वपूर्ण क़दम उठाया है और अब उम्मीद की जा रही है कि इससे कुछ ठोस नतीजे निकलेंगे. झारखंड और बिहार झारखंड में साल की शुरुआत में ही बाबू लाल मरांडी के विरुद्ध गुटबाज़ी हुई और भाजपा ने अर्जुन मुंडा को राज्य की कमान सौंप दी. पड़ोसी राज्य बिहार तो हमेशा से ही चर्चा का केंद्र रहा है. राज्य में इस बार मतों का विभाजन रोकने के लिए समता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड का विलय ही हो गया. इसके अलावा वर्ष का अंत होते-होते राज्य के पुलिस महानिदेशक डीपी ओझा को हटाए जाने के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. इस प्रकरण पर राज्य सरकार के विरुद्ध विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया जो कि पहले से तय भविष्य के अनुसार ही गिर गया. बिहार के ही गया में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए काम कर रहे इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की हत्या के मामले ने भ्रष्टाचार को लेकर बहस तेज़ कर दी है. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. महाराष्ट्र उधर महाराष्ट्र में भी जनवरी में ही सत्ता परिवर्तन हो गया और विलासराव देशमुख के बजाए कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे को कमान सौंप दी.
वर्ष के अंत तक महाराष्ट्र में एक और राजनीतिक तूफ़ान उठ खड़ा हुआ और वो था तेलगी स्टांप पेपर घोटाले का. मामले में राजनीतिज्ञों और पुलिस विभाग के उच्च पदाधिकारियों के शामिल होने की आशंका ने सत्ता पक्ष को हिला दिया है. कर्नाटक और तमिलनाडु कर्नाटक सरकार भी इस घोटाले में घिर गई है और उसके लिए भी ये घोटाला मुश्किलें पैदा कर रहा है क्योंकि इस घोटाले की जड़ें कई राज्यों तक फैली हुई हैं. पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में हिंदू अख़बार के कुछ पत्रकारों के विरुद्ध राज्य विधानसभा अध्यक्ष का क़ानूनी कार्रवाई का आदेश राष्ट्रीय स्तर पर उठा और इसे लोकतंत्र के चौथे खंभे पर एक प्रहार माना गया. अन्य राज्य गुजरात में पिछले वर्ष के अंत में नई सरकार आई थी और उसके बाद इस वर्ष कई तरीक़ों से राज्य के विकास का चेहरा आगे करने की कोशिश हो रही है. आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को नक्सलियों ने इस साल निशाना बनाने की कोशिश की मगर वह बाल-बाल बच गए. इसके बाद विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच राज्य सरकार ने समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने के लिए विधानसभा भंग कराने की संस्तुति कर दी. पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश में भी इस बार नाटकीय घटनाक्रम में सत्ता परिवर्तित हो गई. राज्य के अकेले विपक्षी विधायक गेगांग अपांग ने मुकुट मीथी की सरकार का तख़्ता पलट दिया और बहुमत के साथ मुख्यमंत्री का पद सँभाला. असम में बिहार राज्य के लोगों के विरुद्ध हिंसा हुई. राज्य की नौकरियों के लिए परीक्षा देने गए बिहारवासियों के साथ दुर्व्यवहार के बाद ये तनाव बढ़ा. पंजाब में भी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बीच का संघर्ष बना रहा. बादल के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ और इसके लिए वह गिरफ़्तार तक हो गए. जबकि राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सरकार में मंत्री रजिंदर कौर भट्टल सत्ता पाने की जी-तोड़ कोशिश में लगी रहीं. यानी कुल मिलाकर राज्यों की राजनीति भी काफ़ी उठापठक भरी रही. |
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