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अफ़ग़ान टीवी की वापसी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वह वाक़ई दिलचस्प घटना थी जब 19 नवंबर, 2001 को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एकमात्र टीवी केंद्र ने पांच साल बाद प्रसारण प्रारंभ किया. तालेबान ने सत्ता में आने के बाद इसे इस्लाम विरोधी बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया था. तभी से काबुल के लोग दरी और पश्तो भाषा में संगीत और ख़बरें सुन पा रहे हैं. कार्यक्रम के एक प्रस्तुतकर्ता, शिमुद्दीन शम्सुद्दीन का कहना था कि महिलाओं के लिए प्रसारण का शुरु होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी स्वतंत्रता का तालेबान ने हनन किया था. उनका कहना था, 'हर कोई अब टीवी में काम करना चाहता है. लेकिन पिछले तीन दिनों से हम इसे किसी तरह चलाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन हम बेहद ख़ुश हैं.' उनकी सहयोगी 16 वर्षीय मरियम शकेबर ने भूरे रंग का दुपट्टा पहनकर कार्यक्रम प्रस्तुत किया. नए नियम तालेबान के शासन में केवल दुपट्टा ओढ़ने पर भारी सज़ा की व्यवस्था थी. महिलाओं को बुर्क़ा पहनना ज़रूरी था और उनके काम करने पर प्रतिबंध था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, आपसी संघर्ष के दौरान काबुल टीवी केंद्र को भारी क्षति पहुंची और यह 1996 से खाली पड़ा था. 1990 के संघर्ष के दौरान इसकी सेटेलाइट डिश नष्ट हो गई थी. लेकिन छोटी-सी रेडियो डिश बनाई गई जिसमें गोलियों से छेद बने हैं, उससे प्रसारण शुरु किया गया है. इस स्टेशन ने प्रसारण की शुरुआत इस घोषणा से की कि वह अपने कार्यक्रमों को सेंसर नहीं करेगा. कार्यक्रम की शुरुआत यह कर की गई, 'हमें ख़ुशी है कि आतंकवाद और तालेबान नष्ट हो गए और हम अपना यह प्रसारण आप तक पहुँचा पा रहे हैं.' |
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