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दुनिया के बड़े ख़ानसामों का जमघट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एथेंस में ओलंपिक खेल तो ख़त्म हो गए हैं लेकिन जर्मनी में एक नए तरह का ओलंपिक शुरू हो रहा है. जानना चाहते हैं आप! तो चलिए जर्मनी जहाँ प्रतियोगिता तो हैं ही और साथ में हैं लज़ीज़ खाने और बेहतरीन से बेहतरीन खाना बनाने वाले ख़ानसामों के बीच होड़. 32 देशों ने अपने सबसे बहतरीन ख़ानसामों को जर्मनी के शहर एफ़र्ट भेजा है. ये प्रतियोगिता 1900 में शुरू हुई थी मगर इस वर्ष सबसे ज़्यादा ख़ानसामे इसमें हिस्सा ले रहे हैं. इस ओलंपिक में कई तरह के खाने बनाने की प्रतियोगिता होगी जैसे स्नैक्स, सेना के लिए बनाए जाने वाले खाने और मिठाई. माना जा रहा है कि क़रीब 25 हज़ार लोग इस प्रतियोगिता को देखने पहुँचेंगे. सभी टीमें काँच की दीवारों की बनी रसोई में खाना बनाएँगी. खाने का स्वाद, उसकी सजावट और खाने की प्रस्तुति के आधार पर ही विजेता का फ़ैसला किया जाएगा. ख़ानसामों का ओलंपिक जर्मनी में हर चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है. 1900 में जर्मनी के कुछ ख़ानसामों ने मिलकर इसकी शुरूआत की थी मगर दोनों विश्व युद्ध के दौरान इन्हें आयोजित नहीं किया गया था. इसका उद्देश्य दुनियाभर में जर्मनी के खानों का प्रचार करना था मगर पिछली बार स्वीडन की टीम ने यह ओलंपिक जीता था. इस बार जर्मनी की सेना के ख़ानसामों की टीम ने प्रतियोगिता की शुरूआत से पहले अपना हुनर दिखाते हुए शहर के बीचों-बीच लोगों को अलग-अलग तरह का खाना खिलाया. |
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