|
ओम पुरी को 'ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एंपायर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय और पश्चिमी फ़िल्मों की जानी मानी भारतीय कड़ी ओम पुरी को ब्रिटेन का प्रतिष्ठित 'ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एंपायर' सम्मान दिया गया है. फ़िल्म उद्योग को ओम पुरी के उल्लेखनीय योगदान के लिए ब्रिटेन की महारानी की ओर से ये सम्मान दिया गया है. इस घोषणा के बाद ओम पुरी ने बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में कहा, "मुझे बहुत ख़ुशी हुई है, काफ़ी अच्छा लगा. मैं आभारी हूँ. " उनका कहना था, "10 साल से मैं काम कर रहा हूँ तो ये उनकी उदारता है कि वहाँ का नागरिक नहीं होते हुए भी मुझे ये सम्मान दिया गया. मेरे काम को सराहा है." ब्रिटेन के साथ संबंधों को याद करते हुए ओम पुरी ने बताया कि उन्होंने 1981 में 'ज्वैल इन द क्राउन' में सबसे पहले अभिनय किया और उसके बाद आई प्रसिद्ध फ़िल्म 'गाँधी'. इसके अलावा ओम पुरी ने 'ब्रदर ऑफ़ ट्रबल, सिटी ऑफ़ जॉय, माइ सन अ फ़ैनेटिक' जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया. उन्होंने टेलीविज़न सिरीज़ 'कैंटरबरी टेल्स' में भी प्रमुख भूमिका निभाई थी. ये पूछे जाने पर कि ब्रिटेन की संसद की एक समिति ने इस पुरस्कार को कुछ समय पहले साम्राज्यवाद का प्रतीक कहकर इसे ख़त्म करने की सिफ़ारिश की है और वह साम्यवाद के नज़दीक़ माने जाते हैं, ओम पुरी का कहना था, "साम्राज्य से मुझे कोई चिढ़ नहीं है." उनके अनुसार, "भारत में भी क़िस्म-क़िस्म के राजा हुए हैं. भारत में तो अकबर भी थे और औरंगज़ेब भी. ये निर्भर करता है कि कौन कैसा है और उसनकी नीतियाँ कैसी हैं? ये मानना होगा कि अकबर दयालु और प्रगतिशील थे और अच्छे राजा थे." हिंदी फ़िल्मों में अपने जीवन के बारे में ओम पुरी का कहना था, "हिंदी फ़िल्मों में मैंने तरह-तरह की भूमिकाएँ कीं और अच्छा काम किया. उनका कहना था कि जो कमी रह गई उसके बारे में तो कुछ किया नहीं जा सकता. सोचकर आगे अच्छा काम कर सकते हैं." गोविंद निहलानी, सत्यजीत रे, मृणाल सेन, श्याम बेनेगल जैसे निर्देशकों के साथ किए काम को याद करते हुए उनका कहना था कि इनके साथ उन्होंने सामाजिक विषयों पर अच्छी फ़िल्में की हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||