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सहगल के गीतों की किताब | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुंदनलाल सहगल की जन्म-शताब्दी पर पहली बार उनके गाए हुए गीतों का संकलन भी प्रकाशित हुआ है. 'जब दिल ही टूट गया' नाम की इस किताब में सहगल की 185 फ़िल्मी और ग़ैर फ़िल्मी गीतों का संकलन किया गया है. इनमें से 143 हिंदी गीत हैं और 42 क्षेत्रीय भाषाओं के. यह संकलन किया है हरमंदिर सिंह 'हमराज़' और हरीश रघुवंशी ने. हरमंदिर सिंह 'हमराज़' ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि 1931 में बोलती फ़िल्मों का दौर शुरु हुआ और 1932 में सहगल फ़िल्म में आ गए. वे कहते हैं कि इस तरह वे सही मायने में गायक थे. हरमिंदर सिंह का कहना है कि सहगल वास्तव में जितने बड़े कलाकार थे उतना उन पर काम हुआ नहीं और हुआ भी तो उसका संकलन नहीं हुआ. उनका कहना है कि सहगल की जन्म शताब्दी पर जब हरीश रघुवंशी ने सहगल के गीतों के संकलन का प्रस्ताव किया तो उन्होंने इसकी स्वीकृति दे दी. उन्होंने कहा,"मैंने तो स्वार्थ में हामी भर दी. मेरा स्वार्थ यह था कि सहगल के गीतों का संकलन करने के लिए सारे गीत सुनने का अवसर मिलेगा. और वह मिला भी." संकलन के बारे में उनका कहना है कि बहुत कोशिशों के बाद भी उन्हें सहगल की छह फ़िल्मों के गीत नहीं मिल सके. इनमें तीन फ़िल्में, मोहब्बत के आँसू, ज़िंदा लाश और सुबह का सितारा फ़िल्में 1932 की हैं, एक फ़िल्म 1933 का है और दो फ़िल्में 1934 की हैं. इस तरह कोई पंद्रह-बीस गाने और होंगे जो इस संकलन में नहीं आ पाए हैं. उन्होंने बताया कि सहगल की कुल 39 फ़िल्मों का पता चला है. हरमंदिर सिंह 'हमराज़' ने इससे पहले फ़िल्मी गीतों के पाँच कोष तैयार किए हैं जिसमें 1931 से 1981 तक हर दशक के हिंदी फ़िल्मों के गीतों का संकलन है. |
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