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अल-जज़ीरा पर फ़िल्म की अमरीका में धूम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अरबी समाचार चैनल अल-जज़ीरा पर बनी एक डॉक्यूमेंटरी ने पहले ही हफ़्ते में न्यूयॉर्क में बॉक्स ऑफ़िस के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. 'कंट्रोल रूम' नाम से बनी इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि अल-जज़ीरा के पत्रकारों ने इराक़ युद्ध के समाचार किस तरह लोगों तक पहुँचाए. इसे मिल रही सफलता से ये बात स्पष्ट हो रही है कि जिस टेलीविज़न चैनल की बुश प्रशासन इतनी आलोचना करता रहा है उसी देश की जनता उसके बारे में काफ़ी रुचि दिखा रही है. अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड जैसे कई लोग तो इस चैनल को अमरीका विरोधी प्रचार का माध्यम बताते हैं और इसे तो 'ओसामा बिन लादेन की आवाज़' तक कहा जा चुका है. इसे लेकर इतने विवाद हो चुके हैं कि अमरीका में जब इस चैनल पर बनी डॉक्यूमेंटरी प्रसारित हुई तो इसने एक प्रमुख घटना का रूप ले लिया. अमरीका में रुचि न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित 'फ़िल्म फ़ोरम सिनेमा' में जब ये डॉक्यूमेंटरी लगी तो इसके सारे टिकट तुरंत हाथों-हाथ बिक गए.
'कंट्रोल रूम' के वितरक मैग्नोलिया पिक्चर्स का कहना है कि इसकी सफलता से इसके प्रति पूरे अमरीका में रुचि बढ़ी है. इस फ़िल्म का निर्देशन अरब मूल की अमरीकी निर्देशक जिहान नुजाएम ने किया है जिसमें अल-जज़ीरा को गंभीर और पेशेवर संगठन के तौर पर दिखाया गया है जो कि समाचार को एक अलग नज़रिए से लोगों के सामने पेश करता है. फ़िल्म की प्रशंसा अमरीका में इस फ़िल्म की समीक्षाएँ काफ़ी अच्छी आई हैं और डेविड स्टेरिट जैसे आलोचक भी डॉक्यूमेंटरी की प्रशंसा कर रहे हैं. निश्चित रूप से फ़िल्म समय से रिलीज़ भी हुई है क्योंकि अल-जज़ीरा अब भी ख़बरों में है. जिस दिन फ़िल्म रिलीज़ हुई उसी दिन इस चैनल का एक कर्मचारी इराक़ में मारा गया था. उधर अल-जज़ीरा के प्रवक्ता जिहाद बालुत का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई आश्चर्य नहीं हो रहा है कि अमरीकी ये फ़िल्म देखना चाहते हैं क्योंकि ये चैनल काफ़ी विवादास्पद हो चुका था. उन्हें उम्मीद है कि इस फ़िल्म के बाद चैनल के बारे में लोगों की धारणा बदलेगी. |
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