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नेतागिरी मेरी औकात से बाहर का काम था: गोविंदा
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नब्बे के दशक के नंबर वन अभिनेता गोविंद ने फ़िल्मों में आने के लिए निर्माता और निर्देशकों के नौकरों से दोस्ती कर उनके हाथ अपने अभिनय की विडियो कैसेट निर्माता और निर्देशकों तक पहुँचाया करते थे.
अपनी आगामी फ़िल्म "आ गया हीरो" के सिलसिले में बीबीसी से रूबरू हुए गोविंदा ने बॉलीवुड में अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि उस दौरान नए अभिनेताओं को निर्माता निर्देशक से मिलने के लिए घंटो इंतज़ार करना पड़ता था.
गोविंदा बताते हैं कि उन्होंने इससे बचने के लिए तरकीब निकाली और उनके नौकरों से दोस्ती कर ली. ये नौकर उनके अभिनय की वीडियो कैसेट निमार्ताओं निर्देशक तक पहुँचाते और बिना इंतज़ार किये वो निर्माता निर्देशक से मुख़ातिब भी हो जाते.
तीन दशकों से हिंदी फ़िल्मों में काम कर रहे गोविंदा ने अपने ज़माने में एक महीने के अंतराल में 49 फ़िल्में भी साइन की थीं लेकिन वो कहते हैं कि काम की कमी की वजह से पत्नी के आग्रह पर नकारात्मक भूमिकाएं भी निभाई.
अपने इस फैसले को सही ठहराते हुए गोविंदा ने कहा, "मुझे मनचाहा काम नहीं मिल रहा था और जो मिल रहा था उससे मैं खुश नहीं था तब पत्नी ने कहा की इससे पहले बच्चों के लिए संघर्ष शुरू हो जाए जो काम मिल रहा है वो कर लीजिये."
संजय लीला भंसाली ने अपनी फ़िल्म देवदास में चुन्नीलाल का किरदार भी दिया था पर गोविंदा ने फ़िल्म ठुकरा दी और वो किरदार जैकी श्रॉफ ने निभाया.
अपने फ़ैसले पर कोई खेद ना करते हुए गोविंदा कहते हैं , "बड़ी फ़िल्मों में छोटा किरदार करना कोई ख़ुशी की बात नहीं है. मैंने उनसे कहा की आप मेरे दोस्त तो हो नहीं और ना ही अच्छा रोल है. मुझमें आपको चुन्नीलाल कहां से दिखाई दे गया? अगर शाहरुख़ खान मुझे ख़ास फ़ोन कर देते या सलमान कह देते तो मैं कर देता पर ऐसा कुछ नहीं था और पैसे भी नहीं मिल रहे थे."
गोविंदा ने माना कि उस समय वो थोड़े रूखे थे पर वो अपने स्तर से नीचे नहीं आना चाहते थे.
बॉलीवुड से कई कलाकार राजनीति की तरफ़ रुख़ कर चुके हैं और गोविंदा ने भी राजनीति में कदम रखा लेकिन गोविंदा के मुताबिक उनका ये फ़ैसला ग़लत था.
राजनीति में अपने दिनों पर अफ़सोस करते हुए गोविंदा आगे कहते हैं , "पिता ने कहा था अपनी औकात से बाहर जाकर काम करके दिखाना. राजनेता बनने की ना औकात थी और ना ही मैं राजनीति के लिए शिक्षित था. फिर भी मैंने औकात से बाहर जाकर काम किया. मैंने इतने पाप नहीं किए होंगे जितनी तकलीफ़ मुझे झेलनी पड़ी वहाँ."
हालांकि गोविंदा ने माना कि राजनीति में आने के बाद उनके घर की शांति भंग हो गई थी.
उन्हें धमकी मिला करती थी और उनके बच्चों के साथ हादसे भी हुए और घर पर पाबन्दी मज़बूरी बन गई थी. इसलिए उन्होंने राजनीति से दूर होने का फैसल किया. अब वो सिर्फ़ फ़िल्मों में काम करना चाहते हैं.
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