नेशनल पेंशन सिस्टम के नियमों में हुए 10 बदलावों को समझिए- पैसा वसूल

वीडियो कैप्शन, PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम के नियमों में बड़ा बदलाव किया
नेशनल पेंशन सिस्टम के नियमों में हुए 10 बदलावों को समझिए- पैसा वसूल

पेंशन फंड रेगुलेटर (पीएफ़आरडीए) ने नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस के नियमों में बड़ा बदलाव किया है.

दावा है कि इससे नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

नए नियमों में एनपीएस में बने रहने की एज लिमिट बढ़ाने से लेकर कई नए प्रावधान किए गए हैं.

पैसा वसूल के इस एपिसोड में बात उन 10 बदलावों की जिन्हें आपके लिए जानना ज़रूरी है.

नेशनल पेशन सिस्टम में हुए ये 10 बदलाव

पीएफ़आरडीए की तरफ से जारी नोटिफ़िकेशन में मौजूदा नियमों में कई बदलाव किए गए हैं.

ये बदलाव गवर्नमेंट और नॉन-गवर्नमेंट दोनों तरह के कर्मचारियों के लिए हैं.

पीएफ़आरडीए ने जो बदलाव किए हैं, उनमें पहला एज लिमिट से जुड़ा है. अब 85 साल की उम्र तक नेशनल पेंशन सिस्टम में बने रह सकते हैं, पहले ये एज लिमिट 75 साल थी.

दूसरा बदलाव पेंशन फंड की रकम से जुड़ा है. अब पेंशन के लिए सिर्फ 20% पैसा रखना होगा, रिटायरमेंट या कुछ खास स्थितियों में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी अपने कुल जमा फंड का कम से कम 20% हिस्सा एन्युटी खरीदने में इस्तेमाल कर सकते हैं.

पहले नियम यह था कि अगर आपका फंड 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको कम से कम 40% हिस्से से एन्युटी खरीदनी पड़ती थी. मतलब ये कि अब आपके हाथ में ज्यादा कैश आ सकेगा.

तीसरा बदलाव निकासी को लेकर है. कुछ मामलों में पूरा पैसा एक बार में निकाल सकते हैं. गवर्नमेंट और प्राइवेट सब्सक्राइबर्स का फंड आठ लाख रुपये या इससे कम है तो जमा फंड का 100 फ़ीसदी पैसा निकाल सकते हैं.

अगर वो पूरा पैसा नहीं निकालना चाहते तो सरकारी कर्मचारियों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे फंड का 40% एन्युटी में डालें. वहीं, प्राइवेट कर्मचारियों को एन्युटी के लिए फंड का कम से कम 20% इस्तेमाल करना होगा.

किस्तों में पैसा निकालने का नया तरीका

चौथा बदलाव निकासी के नए तरीके से जुड़ा है. पीएफ़आरडीए ने पैसा निकालने का एक नया तरीका पेश किया है जिसे सिस्टमैटिक यूनिट रिडेम्पशन यानी एसयूआर कहा जाता है.

यह बिल्कुल म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान जैसा है.

यह सुविधा उन लोगों के लिए है जिनका फंड 8 लाख से 12 लाख रुपये के बीच है. वे 6 लाख रुपये तक एकमुश्त निकाल सकते हैं और बाकी पैसे को एसयूआर के जरिए फिर किस्तों में ले सकते हैं.

शर्त यह है कि यह एसयूआर लेने वाले को कम से कम 6 साल तक किस्तों में पैसा लेना होगा.

पांचवा बदलाव ये है कि अगर फंड 8 से 12 लाख के बीच है तो सरकारी कर्मचारियों के पास पैसे निकालने के तीन विकल्प होंगे: पहला- 6 लाख रुपये एकमुश्त निकालें और बाकी पैसे को अगले 6 साल तक एसयूआर (किस्तों) के ज़रिए लें.

दूसरा- 6 लाख रुपये नकद लें और बाकी बचे पैसे से पेंशन प्लान खरीद लें. तीसरा- अपने रिटायरमेंट फंड का 60% टैक्स-फ्री कैश निकालें और कम से कम 40% से एन्युटी खरीदें.

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पहले दो विकल्प एक जैसे ही हैं. वह 80% पैसा कैश निकाल सकते हैं और उन्हें सिर्फ 20% पैसे से एन्युटी खरीदनी होगी.

छठा बदलाव है, एनपीएस सब्सक्राइबर अब 60 साल की उम्र या रिटायरमेंट से पहले अधिकतम 4 बार पैसा निकाल सकेंगे.

पहले यह लिमिट 3 बार की थी. शर्त यह है कि दो बार पैसा निकालने के बीच कम से कम 4 साल का गैप होना चाहिए.

सातवां बदलाव है, जो लोग 60 साल या रिटायरमेंट के बाद भी एनपीएस में बने रहते हैं, वे भी बीच-बीच में पैसा निकाल सकते हैं.

लेकिन इसमें भी दो विद्ड्राल के बीच 3 साल का अंतर होना चाहिए. इस ऑप्शन के तहत आप अपने खुद के जमा किए गए पैसे का अधिकतम 25% ही निकाल सकते हैं.

आठवां बदलाव ये है कि नए नियम के मुताबिक, अगर कोई सब्सक्राइबर भारत की नागरिकता छोड़ देता है, तो वह अपना पूरा जमा पैसा एकमुश्त निकालकर ले जा सकता है.

वहीं नौवां बदलाव में कहा गया है कि अगर कोई एनपीएस सब्सक्राइबर लापता हो जाता है या उसे मृत मान लिया जाता है, तो नए नियम के मुताबिक उसके नॉमिनी या कानूनी वारिस को अंतरिम राहत के तौर पर कुल जमा फंड का 20% तुरंत एकमुश्त दे दिया जाएगा.

बाकी बचा 80% पैसा इन्वेस्टेड रहेगा और कानूनन मृत घोषित होने पर रिलीज होगा.

आखिर और दस बदलाव है- पीएफ़आरडीए ने हर अकाउंट की अलग पहचान बनाई है. अब 'परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट' की जगह 'इंडिविजुअल पेंशन अकाउंट' शब्द का इस्तेमाल किया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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